erer | Source: ererनई दिल्ली। दशहरा यानी बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व देशभर में अलग-अलग अंदाज में मनाया गया। आमतौर पर इस दिन रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाकर भगवान श्रीराम की विजय का संदेश दिया जाता है, लेकिन इस बार कई स्थानों पर लोगों ने अपने-अपने हिसाब से बुराइयों को रावण का रूप दिया। कहीं नशे को रावण के रूप में पेश किया गया, तो कहीं मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला जलाकर चुनावी मुद्दों पर विरोध जताया गया। दिल्ली में 30 फुट ऊंचे कॉकरोच का पुतला आकर्षण का केंद्र बना, जबकि पश्चिम विहार में नकली दवाओं और महंगी दवाइयों की समस्या को ‘आज का रावण’ नाम दिया गया। लखनऊ में राष्ट्रविरोधी गतिविधियों, सनातन विरोध और ‘दिमागी नक्सलवाद’ के खिलाफ संदेश देने के लिए विशेष थीम पर रावण का पुतला तैयार किया गया। इस तरह दशहरे के पारंपरिक आयोजन के साथ सामाजिक समस्याओं और राजनीतिक मुद्दों की झलक भी देखने को मिली।

दिल्ली में ज्ञानेश कुमार का पुतला जलाकर यूथ कांग्रेस ने जताया विरोध

दिल्ली में दशहरे के अवसर पर यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को रावण के रूप में चित्रित करते हुए उनका पुतला जलाया। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, इस दौरान कार्यकर्ताओं ने चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर विरोध दर्ज कराया। कार्यक्रम में ‘वोट चोरी की रासलीला’ नाम से एक नुक्कड़ नाटक भी प्रस्तुत किया गया। इसके माध्यम से कार्यकर्ताओं ने अपने राजनीतिक आरोपों और चुनाव से संबंधित चिंताओं को सामने रखा। इस आयोजन ने दशहरे के धार्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप के साथ राजनीतिक विरोध को भी जोड़ दिया। जहां देशभर में रावण दहन के माध्यम से बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जा रहा था, वहीं दिल्ली में यूथ कांग्रेस ने चुनावी मुद्दों को प्रतीकात्मक विरोध का रूप दिया। यह कार्यक्रम राजनीतिक दलों के बीच चुनावी प्रक्रिया को लेकर जारी बहस की पृष्ठभूमि में आयोजित किया गया।

30 फीट के कॉकरोच ने खींचा ध्यान, गंदगी के प्रतीक के रूप में किया गया दहन

दिल्ली के पीतमपुरा में दशहरे के आयोजन के दौरान रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पारंपरिक पुतलों के साथ 30 फुट ऊंचा कॉकरोच का पुतला भी जलाया गया। इस अनोखे पुतले ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया और दशहरे के आयोजन को एक अलग पहचान दी। पीतमपुरा में वार्षिक रामलीला का आयोजन करने वाली श्री केशव रामलीला समिति ने बताया कि कॉकरोच का पुतला गंदगी का प्रतीक है। इसके माध्यम से स्वच्छता से जुड़ा संदेश देने की कोशिश की गई। आमतौर पर रावण के दस सिर अहंकार, अन्याय और बुराइयों का प्रतीक माने जाते हैं। लेकिन इस आयोजन में कॉकरोच को प्रतीक बनाकर गंदगी की समस्या की ओर ध्यान खींचा गया। इस तरह पारंपरिक रावण दहन के साथ एक ऐसी समस्या को भी सामने रखा गया, जिसका संबंध लोगों के आसपास के वातावरण और साफ-सफाई से है।

कॉकरोच का पुतला जलने पर CJP की प्रतिक्रिया

कॉकरोच के पुतले को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रतिक्रिया देते हुए मुफ्त में प्रचार मिलने के लिए धन्यवाद दिया। वहीं, संगठन की लीगल हेड रत्ना सिंह ने इस आयोजन को ‘तमाशा’ बताया। इस प्रतिक्रिया के बाद कॉकरोच के पुतले का मामला केवल रामलीला आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे जुड़ी टिप्पणियां भी चर्चा का विषय बन गईं। हालांकि, आयोजक समिति ने पुतले को गंदगी का प्रतीक बताया था।

पश्चिम विहार में ‘आज का रावण’, महंगी और नकली दवाओं के कारोबार पर निशाना

दिल्ली के पश्चिम विहार में इंद्रप्रस्थ रामलीला समिति ने दशहरे पर एक अलग पहल की। समिति ने रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पारंपरिक पुतलों के अलावा चौथा पुतला तैयार किया, जिसे ‘आज का रावण’ नाम दिया गया। समिति के अध्यक्ष संदीप बिंदु ने बताया कि यह पुतला जेनेरिक दवाओं की कीमतों में हो रही भारी हेरफेर और नकली दवाओं के काले कारोबार का प्रतीक है। उनके अनुसार, दवाइयों की कीमतें इतनी अधिक हो रही हैं कि आम आदमी के लिए उन्हें खरीदना मुश्किल हो जाता है। इसके साथ ही नकली दवाओं का खतरा भी गंभीर चिंता का विषय है। समिति ने इस प्रतीकात्मक पुतले के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी समस्याओं को सामने रखने का प्रयास किया। दवाइयां आम लोगों की जरूरत हैं और उनकी कीमत तथा गुणवत्ता का सीधा संबंध लोगों के स्वास्थ्य से है। ऐसे में ‘आज का रावण’ के रूप में नकली दवाओं और कीमतों में कथित हेरफेर को दिखाना आयोजन का प्रमुख संदेश रहा। इस पहल ने यह सवाल भी उठाया कि दशहरे जैसे सार्वजनिक और सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए समाज में मौजूद समस्याओं को किस तरह लोगों के सामने रखा जा सकता है।

लखनऊ में 75 फीट ऊंचा रावण, राष्ट्रविरोधी और ‘दिमागी नक्सलवाद’ के खिलाफ थीम

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी दशहरे के अवसर पर विशेष थीम वाला रावण तैयार किया गया। रामलीला मैदान में रावण का 75 फीट ऊंचा पुतला बनाया गया, जिसे एक खास संदेश के साथ डिजाइन किया गया था। आयोजन की थीम का उद्देश्य ‘राष्ट्र विरोधी’, ‘सनातन विरोधी’ और ‘दिमागी नक्सलवाद’ को खत्म करने का संदेश देना था। इस तरह यहां रावण दहन को केवल पौराणिक परंपरा तक सीमित न रखते हुए समकालीन वैचारिक और सामाजिक मुद्दों से जोड़ा गया। इस आयोजन में इस्तेमाल किए गए शब्द राजनीतिक और वैचारिक बहस से जुड़े हैं। आयोजकों की ओर से इन्हें रावण दहन की थीम के रूप में प्रस्तुत किया गया। इस तरह लखनऊ में भी दशहरे के पारंपरिक स्वरूप के साथ एक विशिष्ट विचारधारा से जुड़ा संदेश देखने को मिला।

पंजाब में ‘चिट्टा’ बना रावण, अमित शाह ने नशे के खिलाफ दिया संदेश

पंजाब में नशे की समस्या को दशहरे के आयोजन से जोड़कर पेश किया गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पंजाब दौरे के दौरान लुधियाना के डेरेसी मैदान में आयोजित रावण दहन समारोह में शामिल हुए। यहां रावण को ‘चिट्टा’ का प्रतीक बनाया गया था। चिट्टा एक प्रकार के नशीले पदार्थ के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला नाम है। पंजाब में नशे की समस्या लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक चर्चा का विषय रही है। राज्य में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भी नशे का मुद्दा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समारोह के दौरान नशे के खिलाफ संदेश को प्रमुखता दी गई। अमित शाह ने वादा किया कि यदि पंजाब में भाजपा की सरकार बनती है, तो नशे को खत्म कर दिया जाएगा। इस आयोजन के जरिए नशे को एक ऐसी बुराई के रूप में पेश किया गया, जो युवाओं और समाज के भविष्य को प्रभावित कर सकती है। रावण के पुतले को ‘चिट्टा’ का प्रतीक बनाकर नशे के खिलाफ जागरूकता का संदेश देने की कोशिश की गई। इसके साथ ही यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा में भी प्रमुखता से सामने आया।

इंदौर में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला के पुतले जलाने की कोशिश

मध्य प्रदेश के इंदौर में दशहरे के अवसर पर ‘पौरुष’ नाम की संस्था ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला का पुतला जलाने की कोशिश की। दोनों के नाम हाल ही में सौरभ राजपूत की हत्या के मामले के संदर्भ में चर्चा में आए थे। हालांकि, पुलिस के समझाने के बाद पुतले से मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला की तस्वीरें हटा दी गईं। इसके बाद पुतले को बिना उन तस्वीरों के जलाया गया। इस घटनाक्रम में पुलिस के हस्तक्षेप के बाद कार्यक्रम के स्वरूप में बदलाव किया गया। दशहरे के दौरान पुतला दहन के जरिए संबंधित मामले को लेकर प्रतीकात्मक विरोध जताने की कोशिश की गई थी, लेकिन तस्वीरें हटाए जाने के बाद आयोजन आगे बढ़ा। इंदौर की यह घटना भी उन आयोजनों में शामिल रही, जहां पारंपरिक रावण दहन के साथ समकालीन घटनाओं और विवादों को जोड़ने का प्रयास किया गया।

दशहरे पर बदले रावण के चेहरे, लेकिन संदेश रहा बुराइयों के खिलाफ

देशभर में हुए इन आयोजनों से स्पष्ट हुआ कि दशहरा अब कई स्थानों पर पारंपरिक रावण दहन के साथ सामाजिक समस्याओं और राजनीतिक मुद्दों को सामने रखने का अवसर भी बन रहा है। दिल्ली में चुनावी विरोध, पीतमपुरा में गंदगी का प्रतीक बना कॉकरोच, पश्चिम विहार में महंगी और नकली दवाओं का मुद्दा, लखनऊ में वैचारिक संदेश और पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान जैसे अलग-अलग उदाहरण सामने आए। इन आयोजनों में रावण के प्रतीक का इस्तेमाल अलग-अलग उद्देश्यों के लिए किया गया। कहीं सामाजिक बुराई पर ध्यान खींचा गया, तो कहीं राजनीतिक विरोध दर्ज कराया गया। वहीं, इंदौर में एक चर्चित हत्या मामले से जुड़े लोगों के पुतले जलाने की कोशिश भी हुई।