नई दिल्ली: देश के जाने-माने राजनीतिक विश्लेषक और स्वराज इंडिया के प्रमुख योगेंद्र यादव ने एक ऐसा चौंकाने वाला बयान दे दिया है, जिसे सुनकर राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे मौजूदा विरोध प्रदर्शनों के बीच योगेंद्र यादव का यह रुख विपक्ष और सरकार, दोनों के खेमों में चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि इस आंदोलन से जुड़े लोग अभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे या सत्ता परिवर्तन की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि उनकी एकमात्र प्राथमिकता स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की है। इस बयान के सामने आने के बाद खुद योगेंद्र यादव ने यह आशंका भी जताई है कि उन्हें इस पर तीखी आलोचना और गालियों का सामना करना पड़ सकता है।
'मुझे गालियां पड़ेंगी, लेकिन सच यही है'
वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम को दिए गए एक इंटरव्यू में योगेंद्र यादव ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने स्वीकार किया कि इस तरह का बयान देने के बाद उन्हें सोशल मीडिया और राजनीतिक विरोधियों की तरफ से भारी विरोध का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि देश में असहमति की संस्कृति लगभग खत्म हो चुकी है और किसी भी बात पर तुरंत गाली-गलौज की भाषा का इस्तेमाल होने लगता है। इसके बावजूद, उन्होंने अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझते हुए इस गंभीर और यथार्थवादी बात को जनता के सामने रखने का फैसला किया। यादव का मानना है कि जो हजारों-लाखों लोग इस आंदोलन से जुड़ रहे हैं या सहानुभूति रख रहे हैं, उनकी मांगें बहुत सीमित और बुनियादी हैं, और हमें उसी दायरे में रहना चाहिए।
आंदोलन का मुख्य उद्देश्य सिर्फ निष्पक्ष चुनाव
'रेजीम चेंज' (सत्ता परिवर्तन) की मांग को लेकर उठ रहे सवालों पर योगेंद्र यादव ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में चुनाव के जरिए सत्ता बदलना कोई अपराध नहीं है, लेकिन वर्तमान आंदोलन का तात्कालिक लक्ष्य रेजीम चेंज नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी एक नेता की महत्वाकांक्षा से नहीं बल्कि इसमें शामिल तमाम लोगों की न्यूनतम साझा राय पर आधारित है। इस प्रदर्शन में कई तरह के लोग शामिल हैं—कुछ मोदी सरकार के घोर आलोचक हैं, कुछ विपक्षी दलों के नेता हैं जो भविष्य में सत्ता में आना चाहते हैं, तो कुछ ऐसे आम नागरिक भी हैं जिन्होंने कभी बीजेपी को वोट दिया होगा और अब सिर्फ चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता चाहते हैं। ऐसे में आंदोलन का केंद्रीय उद्देश्य केवल फ्री एंड फेयर चुनाव सुनिश्चित कराना होना चाहिए।
तख्तापलट और सत्ता परिवर्तन में अंतर
योगेंद्र यादव ने 'रेजीम चेंज' शब्द के दो अलग-अलग अर्थों पर भी रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि श्रीलंका, बांग्लादेश या नेपाल की तर्ज पर सड़क मार्ग से सरकार का तख्तापलट करने की बात किसी ने नहीं की है। प्रशांत भूषण या अन्य नेताओं ने ऐसा कोई असंवैधानिक बयान नहीं दिया है, हालांकि उन्होंने भाजपा पर इस मुद्दे को तोड़-मरोड़कर पेश करने का गंभीर आरोप भी लगाया। यादव ने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक प्रणाली के भीतर निष्पक्षता की मांग करना ही इस समय की सबसे बड़ी और जरूरी आवश्यकता है।
