लखनऊ। रक्षा मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को लखनऊ पहुंचे। यहां भाजपा की उत्तर प्रदेश इकाई के मुख्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान उनसे दिवंगत समाजवादी पार्टी (सपा) संरक्षक मुलायम सिंह यादव को पद्म विभूषण से सम्मानित किए जाने को लेकर सवाल पूछा गया। सवाल का संबंध वर्ष 1990 में अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन के दौरान कारसेवकों पर हुई पुलिस गोलीबारी से था। सवाल सुनने के बाद राजनाथ सिंह कुछ पल के लिए ठिठके और फिर संक्षिप्त जवाब देकर प्रेसवार्ता समाप्त कर दी। उनके इस रुख के बाद मुलायम सिंह यादव को दिए गए सम्मान और राम मंदिर आंदोलन के उस विवादित घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक चर्चा फिर तेज हो गई।
रामभक्तों पर गोलीबारी और पद्म विभूषण का सवाल, राजनाथ सिंह ने क्या कहा?
प्रेसवार्ता के अंतिम कुछ मिनटों में पत्रकारों ने राजनाथ सिंह से पूछा कि भाजपा लंबे समय तक मुलायम सिंह यादव की आलोचना करती रही है। इसकी प्रमुख वजह 1990 में अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन के समर्थक कारसेवकों पर पुलिस की गोलीबारी की घटना रही है। ऐसे में सवाल उठाया गया कि मुलायम सिंह यादव को पद्म विभूषण से सम्मानित क्यों किया गया? इस सवाल पर रक्षा मंत्री ने कहा, ‘चलिए, देखते हैं; उसके कई कारण थे। बहुत-बहुत धन्यवाद।’ इसके बाद उन्होंने पत्रकारों को धन्यवाद दिया और संवाददाता सम्मेलन समाप्त कर दिया। उन्होंने मौके पर इस विषय पर विस्तार से कोई जवाब नहीं दिया। प्रेसवार्ता के दौरान उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक भी मौजूद थे। मुलायम सिंह यादव को दिए गए सम्मान से जुड़े सवाल ने प्रेसवार्ता के दौरान राजनीतिक और ऐतिहासिक संदर्भों को फिर सामने ला दिया।
वर्ष 1990 में अयोध्या में क्या हुआ था?
मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल के दौरान वर्ष 1990 में अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन अपने महत्वपूर्ण दौर में था। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और उससे जुड़े संगठनों के हजारों कारसेवक कर्फ्यू और प्रशासनिक प्रतिबंधों के बावजूद विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद स्थल की ओर बढ़े थे। उनकी मांग वहां राम मंदिर का निर्माण कराने की थी। इस दौरान पुलिस ने गोलीबारी की, जिसमें कारसेवकों की मौत हुई थी। यह घटना उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक विवाद का विषय बनी रही। राम मंदिर आंदोलन से जुड़े संगठनों और भाजपा ने इस कार्रवाई को लेकर मुलायम सिंह यादव की आलोचना की। इसी राजनीतिक विवाद के बीच उन्हें ‘मुल्ला मुलायम’ कहकर भी निशाना बनाया गया। सपा पर तुष्टीकरण की राजनीति के आरोप भी लगते रहे हैं। राम मंदिर आंदोलन से जुड़े इस घटनाक्रम का राजनीतिक प्रभाव बाद के वर्षों में भी दिखाई देता रहा। भाजपा और सपा के बीच वैचारिक तथा राजनीतिक मतभेदों के संदर्भ में अयोध्या की गोलीबारी की घटना कई बार चर्चा में आई। ऐसे में मुलायम सिंह यादव को देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किए जाने पर सवाल उठना इसी पुराने राजनीतिक विवाद से जुड़ा है।
मुलायम सिंह यादव को कब और किस कारण मिला पद्म विभूषण?
समाजवादी पार्टी के संस्थापक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का निधन 10 अक्टूबर 2022 को हुआ था। उनके निधन के बाद वर्ष 2023 में उन्हें मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। यह देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में दूसरा स्थान रखने वाला सम्मान है। 5 अप्रैल 2023 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में मुलायम सिंह यादव को मरणोपरांत दिए गए पद्म विभूषण को उनके पुत्र और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को प्रदान किया था। इस सम्मान के जरिए मुलायम सिंह यादव के सार्वजनिक जीवन और देश के लिए उनके योगदान को मान्यता दी गई। हालांकि, सम्मान दिए जाने के फैसले को लेकर राजनीतिक सवाल भी उठते रहे हैं। राम मंदिर आंदोलन के दौरान हुई गोलीबारी और मुलायम सिंह यादव की तत्कालीन सरकार की भूमिका इस बहस का एक प्रमुख आधार रही है। राजनाथ सिंह से पूछा गया सवाल भी इसी विरोधाभास को सामने रखता था कि जिस नेता की भाजपा रामभक्तों पर गोली चलवाने के मामले में आलोचना करती रही, उन्हें बाद में पद्म विभूषण क्यों दिया गया।
प्रेसवार्ता में राहुल गांधी और कांग्रेस पर भी साधा निशाना
मुलायम सिंह यादव से जुड़े सवाल से पहले राजनाथ सिंह ने प्रेसवार्ता में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कांग्रेस की चुनावी स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में जबसे मतदाता पहचान पत्र आया है, तब से कांग्रेस के लिए बहुमत हासिल करना दूर की बात हो गई है। रक्षा मंत्री ने कहा कि लगातार सत्ता में रहने वाली कांग्रेस पिछले 37 वर्षों से उत्तर प्रदेश की सत्ता से बाहर है। इसके विपरीत उन्होंने भाजपा की राजनीतिक यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि कभी दो सांसदों वाली पार्टी आज कहां पहुंच गई है। राजनाथ सिंह ने कांग्रेस की स्थिति पर सवाल उठाते हुए पूछा कि पार्टी की यह हालत ‘वोट चोरी’ के कारण हुई या ‘काम चोरी’ के कारण। उन्होंने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए यह भी पूछा कि क्या वह समाजवादी पार्टी के सहयोग के बिना रायबरेली की सीट भी जीत सकते हैं या नहीं। उनके इस बयान को उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और सपा के राजनीतिक संबंधों तथा चुनावी सहयोग के संदर्भ में देखा जा रहा है। प्रेसवार्ता में जहां एक ओर विपक्षी दलों पर निशाना साधा गया, वहीं मुलायम सिंह यादव को पद्म विभूषण दिए जाने से जुड़ा सवाल भी राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया।
मुलायम सिंह यादव पर सवाल से क्यों बढ़ी राजनीतिक चर्चा?
मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश की राजनीति के प्रमुख नेताओं में रहे। वह समाजवादी पार्टी के संस्थापक और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। उनके राजनीतिक जीवन से जुड़े कई फैसले आज भी राज्य की राजनीति में बहस का विषय बनते हैं। वर्ष 1990 में अयोध्या में कारसेवकों पर हुई गोलीबारी उनमें से एक है। दूसरी ओर, मरणोपरांत पद्म विभूषण दिए जाने का फैसला उनके सार्वजनिक जीवन में योगदान को मान्यता देने से जुड़ा था। ऐसे में इस सम्मान और अयोध्या की घटना के बीच संबंध को लेकर सवाल उठना राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बना हुआ है। राजनाथ सिंह ने सवाल के जवाब में केवल इतना कहा कि इसके कई कारण थे। उन्होंने उन कारणों का विस्तार से उल्लेख नहीं किया और प्रेसवार्ता समाप्त कर दी। इसलिए उनके संक्षिप्त जवाब से सम्मान दिए जाने के पीछे के विशिष्ट कारणों की पूरी जानकारी सामने नहीं आई।
