पटना। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अध्यक्ष और बिहार के प्रमुख राजनीतिक नेताओं में शामिल लालू प्रसाद यादव की पहचान लंबे समय तक उनके पारंपरिक कुर्ता-पायजामा से रही है। राजनीतिक मंच हो, जनसभा हो या कोई सार्वजनिक समारोह, लालू यादव अक्सर सफेद कुर्ता-पायजामा में नजर आते थे। बाद के वर्षों में उनके पहनावे में बदलाव आया और वे सफेद कपड़ों के बजाय नीले, पीले, हरे और गुलाबी रंग के कुर्तों में दिखाई देने लगे। लेकिन अब उनकी पोशाक में एक और बड़ा बदलाव नजर आता है। लालू यादव अक्सर ट्राउजर, शर्ट या टी-शर्ट पहने दिखाई देते हैं। इस बदलाव के पीछे उनकी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों और आराम को प्रमुख वजह बताया जाता है। वहीं, उनके रंगीन कुर्ते पहनने के पीछे लखनऊ के ज्योतिषी शंकर चरण त्रिपाठी की सलाह से जुड़ा एक दिलचस्प राजनीतिक किस्सा भी है।
महाअष्टमी की पूजा से लेकर सार्वजनिक कार्यक्रमों तक बदला लालू यादव का पहनावा
हाल ही में दुर्गा पूजा के दौरान महाअष्टमी पर अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव के घर आयोजित पूजा में शामिल हुए लालू प्रसाद यादव ट्राउजर और शर्ट पहने नजर आए। उनकी यह पोशाक देखकर राजनीतिक और सार्वजनिक आयोजनों में उनके पुराने पहनावे से जुड़ी तस्वीरें फिर चर्चा में आ गईं। वर्ष 2023 में पटना के गांधी मैदान में आयोजित रावण वध कार्यक्रम में भी लालू यादव इसी तरह की सादी पोशाक में दिखाई दिए थे। उस समय बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और तत्कालीन राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर भी कार्यक्रम में मौजूद थे। लालू यादव ने आसमानी रंग की आधी बांह वाली शर्ट और गहरे नीले रंग का ट्राउजर पहन रखा था। यह आयोजन सार्वजनिक और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था, लेकिन लालू यादव ने वहां भी पारंपरिक कुर्ता-पायजामा के बजाय सामान्य शर्ट और ट्राउजर को चुना। हाल के वर्षों में उनके सार्वजनिक कार्यक्रमों में इस तरह के पहनावे की मौजूदगी बढ़ी है।
जब सफेद कुर्ता-पायजामा छोड़ रंगीन कुर्तों में दिखने लगे लालू यादव
लालू यादव की राजनीतिक पहचान के साथ उनके पहनावे का भी खास संबंध रहा है। एक दौर में वे सफेद कुर्ता-पायजामा को प्राथमिकता देते थे। यह भारतीय राजनीति में लंबे समय से प्रचलित पारंपरिक पहनावा है और अनेक नेता सार्वजनिक कार्यक्रमों में इसी पोशाक में दिखाई देते रहे हैं। हालांकि, लालू यादव के जीवन में ऐसा समय भी आया, जब उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चुनौतियां बढ़ गई थीं। चारा घोटाला मामले में अदालत से सजा मिलने के बाद उनके चुनाव लड़ने पर रोक लग गई थी। उनकी पार्टी को भी राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था। इसी दौर में लखनऊ के ज्योतिषी शंकर चरण त्रिपाठी की सलाह का किस्सा सामने आता है। बताया जाता है कि उन्होंने लालू यादव को सफेद कुर्ता छोड़कर रंगीन कुर्ते पहनने की सलाह दी थी। मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से उनके ग्रहों की स्थिति अनुकूल हो सकती थी। इसके बाद लालू यादव नीले, पीले, हरे और गुलाबी रंगों के कुर्तों में नजर आने लगे। हालांकि, ज्योतिषीय सलाह और राजनीतिक परिस्थितियों के बीच किसी प्रत्यक्ष कारण-परिणाम संबंध को प्रमाणित नहीं माना जा सकता। यह किस्सा मुख्य रूप से लालू यादव के पहनावे में आए बदलाव और उनके राजनीतिक जीवन के एक दौर से जुड़ी चर्चा के रूप में सामने आता है।
2015 में महागठबंधन की जीत और शंकर चरण त्रिपाठी को राजद में जिम्मेदारी
वर्ष 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को जीत मिली। इस चुनावी सफलता के बाद राष्ट्रीय जनता दल राज्य की सत्ता में महत्वपूर्ण भूमिका में लौटा। लालू यादव के छोटे बेटे तेजस्वी यादव उपमुख्यमंत्री बने, जबकि बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को मंत्री पद मिला। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद लालू यादव की पार्टी की स्थिति मजबूत हुई और बिहार की राजनीति में उनका प्रभाव फिर प्रमुखता से दिखाई देने लगा। रंगीन कुर्ते पहनने से जुड़ी ज्योतिषीय सलाह का किस्सा भी इसी दौर की चर्चा में शामिल रहा। बताया जाता है कि लालू यादव ने शंकर चरण त्रिपाठी को वर्ष 2017 में राजद का राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया था। हालांकि, वर्ष 2018 में राहुल गांधी के खिलाफ बयान देने के बाद उन्हें इस पद से हटा दिया गया। उस समय कांग्रेस और राजद के बीच राजनीतिक संबंधों को लेकर भी चर्चा थी। इस पूरे घटनाक्रम में लालू यादव के पहनावे, ज्योतिषीय सलाह और पार्टी की राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर कई तरह की बातें कही जाती रही हैं। लेकिन चुनावी जीत को केवल कपड़ों के रंग या ज्योतिषीय सलाह का परिणाम मानने के बजाय उसे राजनीतिक परिस्थितियों और चुनावी समर्थन के संदर्भ में देखना अधिक उचित है।
2018 में एम्स में भर्ती होने के दौरान भी पहना था कुर्ता-पायजामा
लालू यादव के पुराने पहनावे की एक तस्वीर अप्रैल 2018 की है, जब वे किडनी संबंधी उपचार के लिए दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती थे। उस दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी उनसे मिलने पहुंचे थे। मुलाकात के समय लालू यादव हरे रंग का कुर्ता और सफेद पायजामा पहने हुए थे। वहीं, राहुल गांधी सफेद कुर्ते के साथ नीली जींस में नजर आए थे। यह तस्वीर उस समय के राजनीतिक संबंधों के साथ-साथ दोनों नेताओं की अलग-अलग पोशाक शैली के कारण भी चर्चा में रही थी। समय के साथ राहुल गांधी के पहनावे में भी बदलाव देखने को मिला है। वे अब कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में सफेद टी-शर्ट और खाकी या कत्थई रंग की ढीली पतलून पहने नजर आते हैं। इसी तरह लालू यादव की पोशाक में भी पारंपरिक कुर्ता-पायजामा की जगह आरामदायक कपड़ों की मौजूदगी बढ़ी है।
2022 से स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के कारण आरामदायक कपड़ों को प्राथमिकता
लालू यादव के ट्राउजर, शर्ट और टी-शर्ट पहनने के पीछे सबसे प्रमुख वजह स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को बताया जाता है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 2022 से वे चिकित्सकीय सलाह और उपचार के दौरान सुविधा को ध्यान में रखते हुए स्ट्रेचेबल ट्राउजर तथा शर्ट या टी-शर्ट पहनने लगे। लालू यादव को अपने स्वास्थ्य की जांच और उपचार के लिए नियमित रूप से चिकित्सकों के पास जाना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में आरामदायक कपड़े पहनना सुविधाजनक हो सकता है। जांच के दौरान कपड़े बदलने या चिकित्सकीय परीक्षण कराने में भी ऐसे परिधान उपयोगी हो सकते हैं। इसके अलावा, उपचार के दौरान स्वच्छता और संक्रमण से बचाव का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण होता है। हालांकि, लालू यादव के कपड़ों में बदलाव के पीछे किसी विशेष चिकित्सकीय निर्देश का विस्तृत विवरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। इसलिए यह कहना उचित होगा कि उनकी वर्तमान पोशाक को स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों और आराम से जोड़कर देखा जाता है। जब लालू यादव उपचार के लिए सिंगापुर गए थे, तब भी वे अपनी बेटी रोहिणी आचार्य के साथ स्पोर्ट्स ट्राउजर, टी-शर्ट और खेल वाले जूते पहने नजर आए थे। इन तस्वीरों से भी उनके पहनावे में आए बदलाव की झलक मिली थी।
राजद के स्थापना दिवस पर भी शर्ट और ट्राउजर में आए नजर
लालू यादव अब केवल निजी या पारिवारिक कार्यक्रमों में ही नहीं, बल्कि राजनीतिक आयोजनों में भी अक्सर शर्ट और ट्राउजर पहने दिखाई देते हैं। राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते वे पार्टी की गतिविधियों से जुड़े हुए हैं, हालांकि उनकी सक्रिय चुनावी भूमिका पहले की तुलना में सीमित है। एक जुलाई 2026 को राजद के 30वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान भी लालू यादव हल्के भूरे रंग की शर्ट और ट्राउजर में नजर आए थे। इस कार्यक्रम में उनकी पोशाक ने एक बार फिर ध्यान खींचा, क्योंकि लंबे समय तक उनकी पहचान पारंपरिक कुर्ता-पायजामा से रही है। अब उनके सार्वजनिक जीवन में आरामदायक कपड़ों की मौजूदगी बढ़ गई है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि उन्होंने हमेशा के लिए कुर्ता-पायजामा पहनना छोड़ दिया है। उपलब्ध तस्वीरों और रिपोर्टों से इतना स्पष्ट होता है कि वे अब अक्सर अपनी सुविधा के अनुसार पोशाक चुनते हैं।
लालू यादव के पहनावे में बदलाव की कहानी क्या बताती है?
लालू प्रसाद यादव के पहनावे में आए बदलाव को तीन प्रमुख चरणों में देखा जा सकता है। पहले वे सफेद कुर्ता-पायजामा में अपनी पारंपरिक राजनीतिक पहचान के साथ नजर आते थे। इसके बाद ज्योतिषी शंकर चरण त्रिपाठी की सलाह से जुड़े किस्से के बीच उन्होंने रंगीन कुर्तों को अपनाया। अब स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों और आराम को ध्यान में रखते हुए वे ट्राउजर, शर्ट और टी-शर्ट में अधिक दिखाई देते हैं। उनके पहनावे की यह यात्रा बिहार की राजनीति के कई अहम दौरों की याद भी दिलाती है। वर्ष 2015 की चुनावी सफलता, वर्ष 2017 में शंकर चरण त्रिपाठी को राजद में जिम्मेदारी मिलना और बाद के वर्षों में स्वास्थ्य संबंधी उपचार के दौरान पोशाक में बदलाव, ये सभी घटनाएं उनके सार्वजनिक जीवन के अलग-अलग पहलुओं को सामने लाती हैं। फिलहाल, लालू यादव के ट्राउजर-शर्ट या टी-शर्ट पहनने की प्रमुख वजह आराम और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें बताई जाती हैं। वहीं, रंगीन कुर्ते पहनने के पीछे ज्योतिषीय सलाह का किस्सा उनके राजनीतिक जीवन से जुड़ी चर्चित कहानियों में शामिल है। उनके पहनावे में बदलाव यह दिखाता है कि सार्वजनिक जीवन में लंबे समय से बनी पहचान के बावजूद व्यक्ति की परिस्थितियों और जरूरतों के अनुसार उसकी पसंद बदल सकती है।
