जब वैश्विक मंचों पर व्यापार, जलवायु परिवर्तन और कृषि नीतियों पर बहस होती है, तब वहां किसी भारतीय किसान की आवाज़ पहुंचना अपने आप में बड़ी बात होती है। इसी संदर्भ में बिहार के बक्सर से सांसद सुधाकर सिंह ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। यूरोपियन संसद में आयोजित EU-India Leaders Conference 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने न केवल भारतीय कृषि की चुनौतियों को दुनिया के सामने रखा, बल्कि बिहार जैसे कृषि-प्रधान राज्यों की समस्याओं और संभावनाओं को भी वैश्विक विमर्श का हिस्सा बनाया। उनके इस प्रतिनिधित्व को समर्थक बिहार की राजनीतिक और बौद्धिक उपस्थिति के रूप में देख रहे हैं।ब्रसेल्स में सुधाकर सिंह का संबोधन

ब्रसेल्स में सुधाकर सिंह का संबोधन

यूरोपियन संसद में मिला भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर

ब्रसेल्स स्थित यूरोपियन संसद में आयोजित इस सम्मेलन में भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) समेत कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। सांसद सुधाकर सिंह उन चुनिंदा भारतीय प्रतिनिधियों में शामिल रहे जिन्हें इस मंच पर अपने विचार रखने का अवसर मिला। सम्मेलन के दौरान उन्होंने कृषि क्षेत्र पर वैश्विक व्यापार समझौतों के प्रभाव, किसानों की आय, कृषि उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच, गुणवत्ता मानकों और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से अपनी बात रखी। यह केवल राजनीतिक भागीदारी नहीं थी, बल्कि भारतीय कृषि मॉडल को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर भी था।

किसानों की आय, कृषि सुरक्षा और बिहार की चुनौतियों को बनाया केंद्र

सुधाकर सिंह ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि किसी भी व्यापार समझौते का मूल्यांकन केवल निर्यात बढ़ाने के नजरिए से नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों की आय, खाद्य सुरक्षा और कृषि संप्रभुता को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए। बिहार सहित देश के छोटे और सीमांत किसानों की स्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा असर कृषि पर पड़ रहा है। बाढ़, सूखा और मौसम की अनिश्चितता जैसी समस्याएं किसानों की आजीविका को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने वैश्विक मंच पर यह भी रेखांकित किया कि भारत की कृषि व्यवस्था विकसित देशों के मॉडल से अलग है और यहां करोड़ों परिवार सीधे खेती पर निर्भर हैं।ब्रसेल्स स्थित यूरोपियन संसद

ब्रसेल्स स्थित यूरोपियन संसद

GM फसलों से लेकर कृषि नीति तक, भारत का पक्ष मजबूती से रखा

सम्मेलन में जैव-संशोधित (GM) फसलों, टिकाऊ कृषि, खाद्य सुरक्षा और कृषि सुधारों जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। इस दौरान सुधाकर सिंह ने भारत के सतर्क और संतुलित दृष्टिकोण को सामने रखा। उन्होंने कहा कि नई तकनीकों को अपनाने के साथ-साथ किसानों के हितों और पर्यावरणीय संतुलन को भी ध्यान में रखना आवश्यक है। यूरोपीय संघ के सांसदों, नीति-निर्माताओं और विभिन्न देशों के विशेषज्ञों के साथ संवाद के दौरान भारतीय कृषि की जमीनी वास्तविकताओं और चुनौतियों को विस्तार से साझा किया गया। इससे भारत के कृषि अनुभवों को अंतरराष्ट्रीय नीति बहस में जगह मिली।

बक्सर से ब्रसेल्स तक, बढ़ा बिहार का मान

इस सम्मेलन में भागीदारी केवल एक सांसद की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे बिहार की बौद्धिक और राजनीतिक उपस्थिति के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। कृषि विषयों पर उनकी समझ और लंबे समय से किसानों के मुद्दों पर सक्रियता ने उन्हें इस मंच पर प्रभावी वक्ता के रूप में स्थापित किया। सम्मेलन के दौरान उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में कार्य कर रहे वैश्विक विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श का अवसर भी मिला। बक्सर और बिहार के समर्थकों के बीच इस बात को लेकर उत्साह है कि उनके सांसद ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर किसानों और कृषि संकट के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। यह सहभागिता भविष्य में भारत और विशेष रूप से बिहार के कृषि हितों को वैश्विक नीति चर्चाओं से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।