अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ (आयात शुल्क) नीति एक बार फिर कानूनी विवाद में घिर गई है। भारत समेत करीब 60 देशों से आने वाले सामान पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ को लेकर अमेरिका के 25 राज्यों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। राज्यों का कहना है कि इस नीति का असर सिर्फ विदेशी कारोबार पर ही नहीं, बल्कि अमेरिकी उपभोक्ताओं, उद्योगों और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुकदमा दायर करने वाले राज्यों का आरोप है कि इतने बड़े पैमाने पर टैरिफ लागू करने के लिए राष्ट्रपति ने अपने अधिकारों का दायरा पार किया। उनका कहना है कि इस तरह के फैसलों का सीधा असर व्यापार, महंगाई और रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है।
टैरिफ का मतलब होता है विदेशों से आयात होने वाले सामान पर लगाया जाने वाला अतिरिक्त शुल्क। जब किसी देश पर अधिक टैरिफ लगाया जाता है तो वहां से आने वाले उत्पाद महंगे हो जाते हैं। इसका असर कंपनियों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है।
भारत भी उन देशों में शामिल है जिन पर अतिरिक्त टैरिफ लागू किए जाने को लेकर विवाद बना हुआ है। यदि यह मामला अदालत में आगे बढ़ता है तो इसका असर अमेरिका और भारत के व्यापारिक संबंधों पर भी पड़ सकता है। हालांकि दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को लेकर बातचीत अलग स्तर पर जारी है।
मुकदमे में शामिल राज्यों का कहना है कि टैरिफ नीति से कई अमेरिकी कंपनियों की लागत बढ़ी है। उनका तर्क है कि आयातित कच्चा माल महंगा होने से उत्पादन लागत बढ़ जाती है, जिसका बोझ आखिरकार ग्राहकों को उठाना पड़ता है।
वहीं, ट्रंप और उनके समर्थकों का कहना है कि टैरिफ नीति का उद्देश्य अमेरिकी उद्योगों की रक्षा करना, घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना और व्यापार घाटा कम करना है। उनका मानना है कि सख्त व्यापार नीति से अमेरिका की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और स्थानीय रोजगार को फायदा मिलेगा।
अब इस मामले पर अदालत में सुनवाई होगी। यदि अदालत राज्यों की दलीलों को स्वीकार करती है, तो टैरिफ नीति पर बड़ा कानूनी असर पड़ सकता है। वहीं यदि अदालत ट्रंप प्रशासन के पक्ष में फैसला देती है, तो यह नीति आगे भी जारी रह सकती है।
फिलहाल इस मुकदमे ने अमेरिका की व्यापार नीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। दुनिया के कई देश, जिनमें भारत भी शामिल है, इस मामले के अगले घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं क्योंकि इसका असर वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी पड़ सकता है।
