अयोध्या सीट से सपा उम्मीदवार पवन पांडेय। | Source: Chrome

अयोध्या सीट से सपा उम्मीदवार पवन पांडेय।Source : Chrome

समाजवादी पार्टी ने 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच अयोध्या सदर सीट से पवन पांडेय को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के इस फैसले के बाद पवन पांडेय एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। छात्र राजनीति से लेकर विधानसभा तक का उनका सफर कई उतार-चढ़ाव और चर्चित घटनाओं से भरा रहा है।

छात्र राजनीति से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

पवन पांडेय ने लखनऊ विश्वविद्यालय से पढ़ाई के दौरान छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। छात्रसंघ में जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी का दामन थामा और धीरे-धीरे संगठन में अपनी अलग पहचान बनाई। समय के साथ वे अखिलेश यादव के करीबी नेताओं में गिने जाने लगे।

2012 की जीत ने दिलाई बड़ी पहचान

साल 2012 के विधानसभा चुनाव में पवन पांडेय ने अयोध्या सीट से भाजपा के वरिष्ठ नेता लल्लू सिंह को हराकर बड़ी राजनीतिक सफलता हासिल की थी। जीत के बाद उन्हें अखिलेश यादव सरकार में राज्य मंत्री बनाया गया। हालांकि 2017 और 2022 के चुनावों में उन्हें भाजपा उम्मीदवार वेद प्रकाश गुप्ता के हाथों हार का सामना करना पड़ा।

जब शादी और चुनाव दोनों बने चर्चा का विषय

2012 के चुनाव के दौरान उनकी शादी भी सुर्खियों में रही। चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण शादी समारोह पर चुनाव आयोग की नजर रही और पूरे कार्यक्रम की निगरानी की गई। शादी के तुरंत बाद पवन पांडेय चुनाव प्रचार में लौट आए, जिसके चलते उनकी निजी और राजनीतिक जिंदगी एक साथ चर्चा में आ गई।

विवादों के बाद भी राजनीति में सक्रिय

राजनीतिक सफर के दौरान पवन पांडेय विवादों से भी जुड़े। वर्ष 2016 में एक मारपीट के मामले के बाद उन्हें समाजवादी पार्टी से बाहर कर दिया गया था। बाद में उनकी पार्टी में वापसी हुई और वे फिर सक्रिय राजनीति का हिस्सा बन गए। वर्तमान में वे पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में भी अपनी भूमिका निभा रहे हैं।

2027 चुनाव में फिर जताया भरोसा

समाजवादी पार्टी ने एक बार फिर अयोध्या सदर सीट से पवन पांडेय को उम्मीदवार बनाकर उन पर विश्वास जताया है। पार्टी को उम्मीद है कि क्षेत्र में उनकी पकड़, संगठन में सक्रियता और ब्राह्मण चेहरे के तौर पर उनकी पहचान आगामी विधानसभा चुनाव में सपा के लिए अहम साबित हो सकती है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि क्या वह 2012 जैसी जीत दोबारा हासिल कर पाते हैं।