बर्खास्तगी के बाद विशाल गर्ग ने कानूनी मोर्चा खोल दिया है और बेटर कंपनी में दोबारा सीईओ पद हासिल करने की कोशिश शुरू कर दी है। | Source: NDTVबर्खास्तगी के बाद विशाल गर्ग ने कानूनी मोर्चा खोल दिया है और बेटर कंपनी में दोबारा सीईओ पद हासिल करने की कोशिश शुरू कर दी है।Source : NDTV

दिसंबर 2021 में एक क्रूर ज़ूम कॉल के जरिए महज चार मिनट में अपने 900 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल कर दुनिया भर में सुर्खियां बटोरने वाले डिजिटल मॉर्गेज लेंडर Better Home & Finance के भारतीय मूल के सह-संस्थापक विशाल गर्ग को कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने सर्वसम्मति से सीईओ (CEO) पद से बर्खास्त कर दिया है। कंपनी बोर्ड ने उन पर भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाने, खराब स्वभाव और विश्वसनीयता खोने के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। इस फैसले के बाद कंपनी और उसके संस्थापक के बीच कॉर्पोरेट इतिहास की सबसे बड़ी कानूनी और प्रशासनिक जंग छिड़ गई है, जहां एक तरफ बोर्ड ने उनके सारे अधिकारों को छीन लिया है, तो वहीं विशाल गर्ग ने भी कंपनी पर दोबारा नियंत्रण हासिल करने के लिए कोर्ट का रुख कर लिया है।

टोकन सैलरी की पेशकश खारिज और बोर्ड के गंभीर आरोप

सीईओ पद से हटाए जाने के बाद विशाल गर्ग अपनी कुर्सी और कंपनी पर नियंत्रण बचाने के लिए किसी भी हद तक झुकने को तैयार हो गए थे। उन्होंने बोर्ड के सामने प्रस्ताव रखा कि वह कंपनी के मुनाफे में आने तक महज 1 डॉलर की टोकन सैलरी (सांकेतिक वेतन) पर काम करने को तैयार हैं, यानी वे मुफ्त में अपनी सेवाएं देने को राजी थे। हालांकि, Better Home & Finance के बोर्ड ने उनके इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए साफ कर दिया कि वे गर्ग को किसी भी कीमत पर शीर्ष पद पर बनाए रखने के पक्ष में नहीं हैं। बोर्ड ने आधिकारिक बयान जारी कर विशाल गर्ग के फैसले लेने की क्षमता, उनके उग्र स्वभाव और उनकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए। इसके अलावा, बोर्ड ने उन पर साल 2022 से अब तक कंपनी को 1.5 बिलियन डॉलर (करीब 12,500 करोड़ रुपये) से अधिक का नेट लॉस देने और कंपनी के शेयर की कीमत में 90 फीसदी से ज्यादा की भारी गिरावट लाने का सीधा आरोप लगाया है। बोर्ड ने यह भी खुलासा किया कि गर्ग ने जानबूझकर कंपनी की तिमाही वित्तीय रिपोर्टिंग (Form 10-Q) को रोकने के लिए जरूरी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया था, ताकि वे बोर्ड पर दबाव बनाकर अपनी शर्तें मनवा सकें।

तख्तापलट का आरोप और $8 बिलियन से $300 मिलियन का पतन

इस पूरे विवाद के बीच बर्खास्त पूर्व सीईओ विशाल गर्ग ने खुद को एक बड़ी साजिश का शिकार बताया है और कहा है कि उनके साथ 'धोखा' हुआ है। गर्ग का आरोप है कि हाल ही में बोर्ड में शामिल हुए इनवेस्टर और हेज फंड मैनेजर डैनियल लुईस ने सोशल मीडिया पर कंपनी की रणनीति की तारीफ करके पहले उनका भरोसा जीता और फिर महज एक हफ्ते के भीतर ही बोर्ड के अन्य सदस्यों को भड़काकर उन्हें पद से हटवा दिया। गर्ग का दावा है कि वह कंपनी को सफलता के बिल्कुल करीब ले आए थे, लेकिन ठीक उसी वक्त उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। दरअसल, कोरोना महामारी के दौर में जब ब्याज दरें बेहद कम थीं, तब इस एआई-आधारित मॉर्गेज कंपनी की वैल्यूएशन 8 बिलियन डॉलर (करीब 66,000 करोड़ रुपये) के पार पहुंच गई थी, लेकिन ब्याज दरों में बढ़ोतरी और रिफाइनेंसिंग बिजनेस ठप होने के कारण आज कंपनी की मार्केट वैल्यू गिरकर महज 300 मिलियन डॉलर के आसपास सिमट गई है। इसी भारी गिरावट और लगातार हो रहे नुकसान को आधार बनाकर बोर्ड ने डैनियल लुईस को कंपनी का नया अंतरिम सीईओ नियुक्त कर दिया है।

मशहूर वकील एलेक्स स्पिरो की एंट्री और अदालती अखाड़ा

विशाल गर्ग ने बोर्ड के इस फैसले के आगे घुटने टेकने से साफ इनकार कर दिया है और कंपनी के स्वामित्व को वापस पाने के लिए अमेरिका के सबसे महंगे और हाई-प्रोफाइल वकीलों में शुमार एलेक्स स्पिरो को हायर किया है, जो एलन मस्क और जे-ज़ी जैसी दिग्गज हस्तियों के केस लड़ने के लिए जाने जाते हैं। गर्ग के कानूनी सलाहकारों ने बोर्ड को एक सख्त पत्र भेजकर दावा किया है कि गर्ग को कंपनी के बहुसंख्यक वोटिंग पावर (मेजॉरिटी शेयरहोल्डर्स) का पूरा समर्थन प्राप्त है। गर्ग ने बोर्ड के पांच मौजूदा डायरेक्टर्स से तुरंत इस्तीफे की मांग की है और चेतावनी दी है कि अगर बोर्ड ने स्वेच्छा से कंपनी का नियंत्रण उन्हें वापस नहीं सौंपा, तो वे जल्द ही एक विशेष शेयरधारक बैठक (Special Shareholder Meeting) बुलाकर पूरे बोर्ड का तख्तापलट कर देंगे। दूसरी तरफ, कंपनी के बोर्ड ने भी पीछे हटने से इनकार कर दिया है और उनके वकील इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या गर्ग के हालिया कदम अमेरिकी प्रतिभूति कानूनों (U.S. Securities Laws) का उल्लंघन हैं, जिसने इस पूरे मामले को न्यू यॉर्क के कॉर्पोरेट जगत के सबसे बड़े कानूनी ड्रामे में बदल दिया है।