प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के भाषण में ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान को लेकर बिहार की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। जन शक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने पीएम मोदी के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि कौन दिमागी तौर पर नक्सली है या कौन पागल है, यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही बताएंगे। उन्होंने तंज कसते हुए यह भी कहा कि ऐसे लोग भारतीय जनता पार्टी में भी हो सकते हैं।

तेज प्रताप यादव ने यह बयान 15 अगस्त को पटना में अपनी पार्टी के कार्यालय में तिरंगा फहराने के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान दिया। इस मौके पर उन्होंने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं और आजादी की लड़ाई में बलिदान देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों को याद किया।

इसके बाद जब पत्रकारों ने उनसे प्रधानमंत्री मोदी के लाल किले से दिए गए भाषण को लेकर सवाल पूछा तो तेज प्रताप ने सीधे पीएम मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री खुद बताएंगे कि आखिर कौन दिमागी तौर पर नक्सली है और किसे पहचानने की जरूरत है। उनका कहना था कि पीएम मोदी इस बारे में ज्यादा जानते होंगे।

तेज प्रताप ने आगे तंज करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को पूरे देश और बिहार में घूमकर देखना चाहिए कि किसकी सोच कैसी है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों को नक्सली या पागल बताया जा रहा है, हो सकता है उनमें से कुछ लोग बीजेपी में ही मौजूद हों। उनके इस बयान के बाद बिहार में राजनीतिक चर्चा और तेज हो गई है।


दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से देश को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने नक्सलवाद का जिक्र करते हुए कहा कि हथियार उठाने वाले नक्सलियों की चुनौती काफी हद तक खत्म हो चुकी है। लेकिन उन्होंने दावा किया कि ‘दिमागी नक्सल’ अभी भी मौजूद हैं और ऐसी सोच रखने वाले लोग मौके की तलाश में रहते हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे लोगों की पहचान करना और उन्हें अलग-थलग करना जरूरी है। उन्होंने युवाओं को देश के विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की भी बात कही। प्रधानमंत्री का यह बयान सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं ने इस पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

तेज प्रताप यादव का बयान भी इसी राजनीतिक बहस का हिस्सा माना जा रहा है। उन्होंने पीएम मोदी के इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि आखिर इसकी पहचान कौन करेगा और इसके लिए क्या आधार होगा।


तेज प्रताप यादव इन दिनों अपनी पार्टी जन शक्ति जनता दल के जरिए बिहार की राजनीति में सक्रिय हैं। स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सामाजिक न्याय, जनता के अधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर भी अपनी बात रखी।

ऐसे में प्रधानमंत्री के बयान पर उनका पलटवार बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ बीजेपी और केंद्र सरकार नक्सलवाद की विचारधारा को लेकर चिंता जता रही है, वहीं विपक्षी नेता सवाल उठा रहे हैं कि ‘दिमागी नक्सल’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किन लोगों के लिए किया जा रहा है।

फिलहाल तेज प्रताप के बयान पर बीजेपी की ओर से प्रतिक्रिया का इंतजार है। लेकिन इतना जरूर है कि स्वतंत्रता दिवस के भाषण से शुरू हुई ‘दिमागी नक्सल’ की बहस अब राजनीतिक बयानबाजी में बदलती दिखाई दे रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बिहार में और बयान सामने आ सकते हैं।