पटना। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद पी चिदंबरम की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘दिमागी नक्सल’ वाली टिप्पणी पर की गई प्रतिक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। चिदंबरम ने प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर कटाक्ष करते हुए खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताए जाने पर गर्व जताया था। उनके इस बयान पर भाजपा के वरिष्ठ नेता और सांसद रविशंकर प्रसाद ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने चिदंबरम की टिप्पणी को शर्मनाक, घटिया, भद्दा, आपत्तिजनक और बेहद गैर-जिम्मेदाराना करार देते हुए इसकी कड़ी आलोचना की।
चिदंबरम के बयान पर रविशंकर प्रसाद का तीखा पलटवार
रविशंकर प्रसाद ने रविवार को बिहार स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान पी चिदंबरम के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से अपने ऐतिहासिक संबोधन में वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का स्पष्ट रोडमैप देश के सामने रखा। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में युवाओं, किसानों और समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया।
भाजपा सांसद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में माओवाद और नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की कार्रवाई और इससे मिली सफलता का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने यह बात कही थी कि देश में नक्सलवाद के प्रभाव को समाप्त करने में बड़ी सफलता मिली है, लेकिन इसके बावजूद कुछ लोगों के भीतर मानसिक रूप से नक्सली सोच मौजूद है।
‘पूर्व गृह मंत्री होकर भी बयान का संदर्भ नहीं समझे?’
रविशंकर प्रसाद ने चिदंबरम की प्रतिक्रिया को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि पी चिदंबरम देश के पूर्व गृह मंत्री हैं, वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता भी हैं। ऐसे में उनसे अपेक्षा की जाती है कि वह प्रधानमंत्री के बयान के संदर्भ और उसके उद्देश्य को समझें।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की टिप्पणी के बाद चिदंबरम का यह कहना कि ‘मोदी जी, मैं भी दिमागी रूप से नक्सली हूं’ बेहद आपत्तिजनक है। रविशंकर प्रसाद ने इसे गैर-जिम्मेदाराना बयान बताते हुए कहा कि इस तरह की टिप्पणी को उचित नहीं ठहराया जा सकता।
नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई का भी किया जिक्र
प्रेस वार्ता के दौरान रविशंकर प्रसाद ने नरेंद्र मोदी सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में माओवाद और नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता हासिल की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण उन क्षेत्रों में भी बदलाव आया है, जहां लंबे समय तक नक्सलवाद का प्रभाव रहा।
रविशंकर प्रसाद ने विशेष रूप से बस्तर का उल्लेख करते हुए कहा कि आज वहां तिरंगा शान से लहरा रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का प्रभारी रहते हुए वह स्वयं उन इलाकों का दौरा कर चुके हैं और वहां हुए बदलाव को करीब से देखा है।
प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त के संबोधन में क्या कहा था?
यह पूरा विवाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 15 अगस्त के लाल किले से दिए गए संबोधन के बाद शुरू हुआ। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में देश के विकास, युवाओं, किसानों और समाज के विभिन्न वर्गों के साथ-साथ माओवाद और नक्सलवाद के मुद्दे पर भी बात की थी। उन्होंने कहा था कि नक्सलवाद के खिलाफ देश को बड़ी सफलता मिली है, लेकिन कुछ लोग अभी भी मानसिक रूप से नक्सली सोच रखते हैं।
प्रधानमंत्री ने ऐसे लोगों को लेकर नागरिकों को आगाह किया था। उन्होंने कहा था कि इस तरह की सोच रखने वाले लोगों ने व्यवस्था में अपनी पैठ बना ली है और वे नीतियों को प्रभावित करके समाज के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से ऐसे लोगों की पहचान करने और उन्हें अलग-थलग करने का आग्रह किया था।
चिदंबरम ने कैसे दिया जवाब?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस टिप्पणी के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने रविवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सली’ होने पर गर्व है। चिदंबरम की यह टिप्पणी प्रधानमंत्री के उस बयान के एक दिन बाद सामने आई, जिसमें उन्होंने देश को ‘दिमागी नक्सलियों’ से सावधान रहने की बात कही थी।
चिदंबरम के बयान को लेकर भाजपा ने तीखी आपत्ति जताई। रविशंकर प्रसाद ने इसी प्रतिक्रिया को आधार बनाकर कांग्रेस नेता पर निशाना साधा और कहा कि चिदंबरम जैसे वरिष्ठ नेता को प्रधानमंत्री के बयान की पृष्ठभूमि और संदर्भ को समझना चाहिए था।
‘दिमागी नक्सल’ शब्द पर बढ़ी राजनीतिक बहस
प्रधानमंत्री के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान के बाद इस शब्द को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्षी नेताओं की ओर से प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि भाजपा नेता इसे नक्सलवाद और उसकी विचारधारा के खिलाफ चेतावनी के रूप में देख रहे हैं। इसी क्रम में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू भी ‘दिमागी नक्सल’ शब्द की व्याख्या कर चुके हैं।
वहीं, चिदंबरम की टिप्पणी ने इस राजनीतिक बहस को और तीखा कर दिया है। एक तरफ कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया दी, तो दूसरी तरफ भाजपा ने इसे गंभीर और गैर-जिम्मेदाराना बयान बताया है।
बस्तर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों का भी आया उल्लेख
रविशंकर प्रसाद ने अपने बयान में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हुए बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की नीति के कारण माओवाद तथा नक्सलवाद के खिलाफ अभियान को मजबूती मिली है। उन्होंने बस्तर सहित उन क्षेत्रों का उल्लेख किया, जहां कभी नक्सलवाद का प्रभाव रहा था।
उन्होंने अपने छत्तीसगढ़ प्रभारी रहने के दौरान किए गए दौरों का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने इन इलाकों में बदलाव को स्वयं देखा है। भाजपा सांसद का कहना था कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में सरकार की नीतियों के परिणाम दिखाई दे रहे हैं।
एक बयान से फिर आमने-सामने भाजपा और कांग्रेस
पी चिदंबरम की टिप्पणी और रविशंकर प्रसाद की प्रतिक्रिया ने भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी को एक बार फिर तेज कर दिया है। चिदंबरम ने प्रधानमंत्री की ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी को लेकर व्यंग्य किया, जबकि रविशंकर प्रसाद ने इसे प्रधानमंत्री के बयान की गंभीरता को समझने में विफलता बताया।
मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि दोनों पक्षों की ओर से ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर बिल्कुल अलग राजनीतिक व्याख्या सामने आ रही है। भाजपा इसे नक्सलवाद की मानसिकता के संदर्भ में प्रधानमंत्री की चेतावनी बता रही है, जबकि चिदंबरम ने इसी शब्द का इस्तेमाल प्रधानमंत्री पर कटाक्ष के तौर पर किया।
