erer | Source: ererनई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) को लेकर कांग्रेस और निर्वाचन आयोग के बीच जारी राजनीतिक टकराव के बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम के बयान ने चर्चा बढ़ा दी है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार एसआईआर के माध्यम से कथित ‘वोट चोरी’ का मुद्दा उठाते हुए निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार पर सवाल खड़े कर रहे हैं। इसी बीच चिदंबरम ने कहा है कि उन्हें ऐसा नहीं लगता कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की वजह से ही हालिया तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) को जीत मिली और द्रमुक (DMK) को हार का सामना करना पड़ा।

मतदाताओं के नाम हटाना गलत, लेकिन चुनाव परिणाम का अकेला कारण नहीं

चिदंबरम ने कहा कि निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया के दौरान जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, उन्हें मतदाता सूची में शामिल किया जाना चाहिए था। उन्होंने नाम हटाए जाने को गलत बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि केवल इसी वजह से चुनाव परिणाम बदल गया, ऐसा उन्हें प्रतीत नहीं होता। उनके अनुसार, यदि विपक्ष मतों में हेरफेर के अपने दावों को सामने रख रहा है तो उसे उन दावों को प्रमाणित भी करना होगा।

चिदंबरम ने कहा, “उन्होंने (निर्वाचन आयोग ने) मतदाताओं के नाम हटा दिए। यह गलत है। उन नामों को शामिल किया जाना चाहिए था। लेकिन मुझे ऐसा प्रतीत नहीं होता कि केवल इसी वजह से टीवीके जीती और द्रमुक हारी।”

इस बयान की अहमियत इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि एसआईआर को लेकर कांग्रेस के भीतर से ही अलग-अलग पहलुओं पर बयान सामने आ रहे हैं। राहुल गांधी इस मुद्दे को व्यापक राजनीतिक अभियान के रूप में उठा रहे हैं, जबकि चिदंबरम ने मतदाता सूची में हुई कथित गड़बड़ियों और चुनाव परिणाम के बीच सीधा संबंध मानने से सावधानी बरती है।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर अगली रणनीति क्या होगी?

एसआईआर को लेकर जारी विवाद के बीच चिदंबरम ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की आगे की रणनीति को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यदि ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं तो आगे की कार्रवाई का फैसला कांग्रेस कार्य समिति (CWC) और ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठकों में किया जाएगा।

उन्होंने संकेत दिया कि संभावित कदमों में उच्चतम न्यायालय का रुख करना अथवा संसद में मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने के लिए प्रस्ताव लाना शामिल हो सकता है। इस तरह एसआईआर का मुद्दा केवल मतदाता सूची तक सीमित नहीं रहकर निर्वाचन आयोग की भूमिका और उसके निर्णयों को लेकर राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है।

कांग्रेस की मांग- एसआईआर तत्काल रोका जाए

चिदंबरम ने राहुल गांधी द्वारा पहले उठाई गई मांगों को भी दोहराया। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे के साथ-साथ प्राथमिकी दर्ज करने और गिरफ्तारी की मांग का उल्लेख किया। उनके मुताबिक, पार्टी की ओर से दी गई समयसीमा समाप्त होने के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन किए गए। कराईकुडी समेत कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन भी आयोजित किए गए।

कांग्रेस नेता ने एसआईआर प्रक्रिया को तत्काल रोकने और मतदाता सूची से हटाए गए नामों को फिर शामिल करने की मांग रखी। उनके अनुसार, 20 राज्यों में मतदाता सूची से हटाए गए 13.3 करोड़ मतदाताओं के नाम शामिल किए जाने चाहिए।

नए सिरे से चुनाव कराने की मांग पर चिदंबरम का क्या कहना है?

चिदंबरम ने संपन्न हो चुके चुनावों को फिर से कराने की संभावना को खारिज किया। उन्होंने कहा कि संविधान पहले ही संपन्न हो चुके चुनावों के लिए दोबारा चुनाव कराने की अनुमति नहीं देता। इस तरह उनका जोर चुनाव दोबारा कराने के बजाय मतदाता सूची से हटाए गए नामों और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों पर रहा।

उनके बयान में एक तरफ मतदाता सूची से नाम हटाने को गलत बताया गया, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने यह मानने से इनकार किया कि यही अकेला कारण तमिलनाडु के चुनाव परिणाम के पीछे रहा। इस अंतर ने एसआईआर को लेकर चल रही बहस को और महत्वपूर्ण बना दिया है।

निर्वाचन आयोग के भीतर मतभेद की खबरों पर भी विवाद

एसआईआर को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच निर्वाचन आयोग के भीतर मतदाता सूची और एसआईआर से जुड़े कुछ फैसलों पर कथित मतभेद की खबरें भी सामने आई हैं। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि पिछले 10 महीनों के दौरान दो निर्वाचन आयुक्तों ने ऐसे मामलों में 14 बार आपत्तियां दर्ज कराई थीं।

हालांकि, निर्वाचन आयोग ने इस दावे के संदर्भ में कहा है कि आंतरिक विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और सुझाव सामने आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग के मुताबिक, उसके फैसले सर्वसम्मति से और स्थापित वैधानिक प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं।

राहुल गांधी लगातार उठा रहे हैं ‘वोट चोरी’ का मुद्दा

राहुल गांधी एसआईआर को लेकर लगातार निर्वाचन आयोग पर सवाल उठा रहे हैं और मतदाता सूची में नाम हटाए जाने को ‘वोट चोरी’ के अपने व्यापक आरोप से जोड़ रहे हैं। उन्होंने विभिन्न स्थानों पर मतदाता सूची में नामों के कथित तौर पर हटाए जाने के उदाहरण भी उठाए हैं। कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर संसद से लेकर सड़क तक राजनीतिक अभियान चलाने की बात कह रही है।

ऐसे समय में चिदंबरम का यह कहना कि मतदाता सूची से नाम हटाना गलत था, लेकिन इसे किसी चुनावी जीत या हार का अकेला कारण नहीं माना जा सकता, एसआईआर विवाद में एक अलग पहलू सामने रखता है। इससे बहस अब केवल नाम हटाए जाने के सवाल तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह भी सवाल बनता है कि मतदाता सूची में बदलाव का चुनावी परिणाम पर कितना प्रभाव पड़ा।

CWC और ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठकों पर टिकी अगली रणनीति

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस की आगे की रणनीति पर अंतिम फैसला पार्टी की कांग्रेस कार्य समिति और ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठकों में किए जाने की बात कही गई है। चिदंबरम के अनुसार, इसमें न्यायालय का रुख करने से लेकर संसद में हटाने का प्रस्ताव लाने तक के विकल्प पर विचार किया जा सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस और निर्वाचन आयोग के बीच एसआईआर को लेकर राजनीतिक और संवैधानिक बहस जारी है। कांग्रेस जहां मतदाता सूची में हटाए गए नामों को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं निर्वाचन आयोग अपने निर्णयों को स्थापित वैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया बता रहा है।