कार का खुला हुआ एयरबैग | Source: Live Hindustanकार का खुला हुआ एयरबैगSource : Live Hindustan

महाराष्ट्र के ठाणे जिले से एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक खड़ी कार में अचानक एयरबैग खुलने से 25 वर्षीय कार डीलर की मौत हो गई। मृतक की पहचान मोहित सोनी के रूप में हुई है। हैरानी की बात यह है कि जिस समय हादसा हुआ, उस वक्त कार कहीं चल नहीं रही थी, बल्कि पार्किंग में खड़ी थी। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, यह करीब 15 साल पुरानी कार थी और अचानक उसका सेफ्टी सिस्टम सक्रिय हो गया, जिससे एयरबैग तेज रफ्तार से खुला और मोहित गंभीर रूप से घायल हो गए। अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उनकी मौत हो गई। यह घटना बुधवार को ठाणे के काशिमीरा इलाके में हुई, जबकि पुलिस ने शनिवार को मामले की जानकारी सार्वजनिक की।

खड़ी कार में कैसे हुआ हादसा? पुलिस जांच में जुटी

पुलिस के अनुसार, मोहित सोनी कार के अंदर बैठे हुए थे, तभी अचानक एयरबैग खुल गया। एयरबैग इतनी तेज गति से बाहर निकला कि उसके जोरदार झटके से उन्हें गंभीर चोटें आईं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि चोट शरीर के किस हिस्से में लगी, लेकिन गंभीर रक्तस्राव के कारण उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

घटना के समय कार पार्किंग में खड़ी थी। एयरबैग खुलने की तेज आवाज सुनकर आसपास मौजूद लोग मौके पर पहुंचे और मोहित को तुरंत कार से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

ठाणे पुलिस ने मामले में एक्सीडेंटल डेथ का मामला दर्ज कर लिया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि कार लगभग 15 साल पुरानी थी, लेकिन उसके पास सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार वैध फिटनेस सर्टिफिकेट मौजूद था। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बिना किसी टक्कर के एयरबैग आखिर कैसे सक्रिय हो गया। इसके लिए ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों की भी मदद ली जा रही है।

एयरबैग कैसे करता है काम और क्यों हो सकता है खतरनाक?

एयरबैग कार का एक महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरण है, जिसे दुर्घटना के समय चालक और यात्रियों की जान बचाने के लिए बनाया जाता है। यह सिलिकॉन कोटिंग वाले विशेष कपड़े से बना एक थैला होता है, जो टक्कर की स्थिति में कुछ मिलीसेकंड के भीतर खुल जाता है और सिर व छाती को स्टीयरिंग, डैशबोर्ड या अन्य हिस्सों से टकराने से बचाता है।

कार में लगे क्रैश सेंसर किसी भी तेज झटके या टक्कर को महसूस करते ही एयरबैग कंट्रोल यूनिट को सिग्नल भेजते हैं। इसके बाद एयरबैग सिस्टम के अंदर मौजूद इन्फ्लेटर सक्रिय हो जाता है। इसमें मौजूद रासायनिक पदार्थ (सोडियम एजाइड) इलेक्ट्रिक स्पार्क के संपर्क में आते ही तेजी से नाइट्रोजन गैस बनाते हैं। यही गैस महज 20 से 30 मिलीसेकंड में एयरबैग को पूरी तरह फुला देती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, एयरबैग लगभग 200 से 300 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से खुल सकता है। यही वजह है कि यदि व्यक्ति ने सीट बेल्ट नहीं पहनी हो या वह स्टीयरिंग के बहुत करीब बैठा हो, तो एयरबैग का झटका ही गंभीर चोट या मौत का कारण बन सकता है। इसलिए एयरबैग को हमेशा सीट बेल्ट के साथ इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।

एयरबैग से सुरक्षित रहने के लिए किन बातों का रखें ध्यान?

ऑटोमोबाइल सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, एयरबैग तभी प्रभावी ढंग से सुरक्षा देता है जब चालक और यात्री सही तरीके से बैठे हों। ग्लोबल ऑटोमोटिव सेफ्टी गाइडलाइन के अनुसार, ड्राइवर की छाती और स्टीयरिंग व्हील के बीच कम से कम 10 इंच की दूरी होनी चाहिए। सीट को इस तरह एडजस्ट करना चाहिए कि पैडल तक आराम से पहुंचा जा सके, लेकिन शरीर स्टीयरिंग के बहुत करीब न हो।

अगर कार में एडजस्टेबल स्टीयरिंग हो, तो उसे थोड़ा नीचे की ओर झुकाकर रखना बेहतर माना जाता है, ताकि एयरबैग खुलने पर उसका प्रभाव सीधे चेहरे के बजाय छाती पर पड़े।

विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि आगे की सीट पर बैठने वाले लोग कभी भी डैशबोर्ड पर पैर रखकर सफर न करें। यदि ऐसी स्थिति में एयरबैग खुल जाए, तो पैरों, कूल्हों और रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लग सकती है।

फिलहाल ठाणे पुलिस इस पूरे मामले की हर पहलू से जांच कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बिना किसी टक्कर के एयरबैग सक्रिय होने के पीछे तकनीकी खराबी थी, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में कोई गड़बड़ी थी या फिर कोई अन्य कारण। जांच पूरी होने के बाद ही इस असामान्य हादसे की असली वजह सामने आ सकेगी।