‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) की गतिविधियों की जांच और सुप्रीम कोर्ट की मौखिक टिप्पणियों के कथित दुरुपयोग को लेकर दाखिल याचिका पर कोर्ट ने केंद्र सरकार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, बार काउंसिल ऑफ इंडिया और CBI को नोटिस जारी किया है।
SC Notice: CJP के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, केंद्र और CBI को नोटिसSource : Abp news.com
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान जजों और वकीलों की मौखिक टिप्पणियों को संदर्भ से अलग कर सोशल मीडिया पर पेश किए जाने के खिलाफ दाखिल याचिका पर अहम कदम उठाया है। याचिका में विशेष रूप से चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्य कांत की एक टिप्पणी को आधार बनाकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)’ नाम से शुरू किए गए अभियान का जिक्र किया गया है। याचिकाकर्ता ने CJP की गतिविधियों की जांच के साथ-साथ फर्जी वकीलों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की है।
CJI की टिप्पणी को सोशल मीडिया पर इस्तेमाल करने का आरोप
राजा चौधरी नाम के वकील ने यह याचिका 26 मई को दाखिल की थी। याचिकाकर्ता ने 15 मई 2026 को हुई सुनवाई के दौरान CJI सूर्य कांत की टिप्पणी में ‘कॉकरोच’ शब्द के इस्तेमाल का जिक्र किया है।
याचिका में दावा किया गया कि इस टिप्पणी को सुनवाई के वास्तविक संदर्भ से अलग करके सोशल मीडिया पर पेश किया गया और बाद में इसका इस्तेमाल राजनीतिक तथा व्यावसायिक कारणों से किया गया।
‘टिप्पणियों को काट-छांटकर पेश करना गलत’
याचिकाकर्ता ने कहा कि जजों और वकीलों की मौखिक टिप्पणियों को सोशल मीडिया पर काट-छांटकर पेश करना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, किसी टिप्पणी को उसके वास्तविक संदर्भ से अलग करके अभियान या राजनीतिक ब्रांडिंग के लिए इस्तेमाल करने वाले लोगों की गतिविधियों की जांच होनी चाहिए।
याचिका दाखिल किए जाने के समय तक CJP की ओर से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और उपद्रव जैसी घटनाएं नहीं हुई थीं। याचिकाकर्ता ने कहा कि CJI की टिप्पणी को आधार बनाकर रातों-रात एक अभियान शुरू किया जाना संदिग्ध प्रतीत होता है।
फर्जी वकीलों का मुद्दा भी उठा
गुरुवार, 11 अगस्त को यह मामला पहली बार सुनवाई के लिए आया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने सबसे पहले फर्जी वकीलों का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट उत्तर प्रदेश में ऐसे वकीलों की जांच करवा रहा है।
याचिकाकर्ता ने कहा कि इस तरह की जांच पूरे देश में होनी चाहिए। उनके मुताबिक, नकली डिग्री के जरिए कानूनी पेशे में प्रवेश करने वाले लोगों की पहचान कर उन्हें पेशे से बाहर करना जरूरी है।
‘युवाओं को कॉकरोच कहा गया’ का दावा
याचिकाकर्ता ने इसके बाद मई में सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी का हवाला दिया। उनके मुताबिक, टिप्पणी को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से पेश किया गया और यह दावा किया गया कि देश के युवाओं को ‘कॉकरोच’ कहा गया है।
इसके बाद सोशल मीडिया पर मीम और वायरल कंटेंट बनाए गए और एक अभियान शुरू किया गया। याचिकाकर्ता ने इसे कथित तौर पर व्यावसायिक इस्तेमाल और राजनीतिक ब्रांडिंग से जोड़ते हुए इसकी जांच की मांग की।
SC ने इन संस्थानों को भेजा नोटिस
कुछ देर चली सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, बार काउंसिल ऑफ इंडिया और CBI को नोटिस जारी किया।
चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026को तय की है। उसी दिन कोर्ट की सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग को रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया पर पेश किए जाने के खिलाफ दाखिल एक अन्य याचिका पर भी सुनवाई होनी है।
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि दोनों मामलों की सुनवाई साथ में की जाएगी।
