erer | Source: ererनई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत की विदेश नीति को लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की ओर से दिए गए बयान पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। नई दिल्ली में राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी की टिप्पणियों को छोटी सोच वाली, अभद्र, निंदनीय और अकल्पनीय बताया। उन्होंने कहा कि अपने लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने विपक्ष के किसी भी नेता का ऐसा व्यवहार नहीं देखा है।

‘ऐसा व्यवहार स्वस्थ लोकतंत्र के लिए गंभीर संकेत’

राजनाथ सिंह ने कहा कि राहुल गांधी के मन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति निराशा हो सकती है, लेकिन इस तरह की अभद्र बातें स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में भाषा और व्यवहार की एक मर्यादा होती है। रक्षा मंत्री ने राहुल गांधी के बयान को स्वस्थ लोकतंत्र के लिए गंभीर संकेत बताया।

राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश और विदेश में भारत का मान बढ़ाया है और ‘विकसित भारत’ का रास्ता तैयार किया है। ऐसे में प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं माना जा सकता।

12 वर्षों के कार्यकाल का किया जिक्र

रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 वर्षों तक पूरी लगन से काम करते हुए एक भी छुट्टी नहीं ली। राजनाथ सिंह ने कहा कि ऐसे प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह की अभद्र बातें हर भारतीय को दुख पहुंचाती हैं।

उन्होंने कांग्रेस पार्टी से भी सवाल किया कि ऐसी भाषा और व्यवहार के बाद क्या वह देश के महान नेताओं की राजनीतिक विरासत पर दावा कर सकती है। राजनाथ सिंह ने लाल-बाल-पाल, गांधी, पटेल और नेहरू, सुभाष बाबू, राजेंद्र बाबू और शास्त्री जी से लेकर पी.वी. नरसिम्हा राव और प्रणब मुखर्जी तक के नामों का उल्लेख किया।

‘भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को भी ठेस’

राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की टिप्पणियों से केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ही अपमान नहीं हुआ, बल्कि भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को भी ठेस पहुंची है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता के पद की गरिमा को भी प्रभावित किया है।

रक्षा मंत्री ने कहा, “मैं सोच भी नहीं सकता कि गांधी उपनाम वाला कोई व्यक्ति इतनी शर्मनाक बात कह सकता है।” उनके इस बयान के बाद राहुल गांधी की टिप्पणियों को लेकर राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है।

सुधांशु त्रिवेदी ने भी राहुल गांधी को घेरा

बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने भी राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संसद सत्र के दौरान सड़क से लेकर सदन के अंदर तक पूरी तरह बाधा डालने के बाद सत्र के ठीक बाद कांग्रेस के आधिकारिक मंच पर राहुल गांधी ने जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया, वह असभ्य, अशोभनीय और निंदनीय है।

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि ऐसा लगता है कि हताशा में राहुल गांधी मर्यादा की सारी सीमाएं पार कर रहे हैं। उन्होंने संसद सत्र की घटनाओं और उसके बाद कांग्रेस के मंच पर प्रधानमंत्री के खिलाफ इस्तेमाल किए गए शब्दों को भी इसी राजनीतिक संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया।

कांग्रेस और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर उठाए सवाल

सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि संसद सत्र के दौरान हुई घटनाओं और उसके बाद राहुल गांधी की ओर से प्रधानमंत्री के खिलाफ इस्तेमाल किए गए शब्द यह दिखाते हैं कि कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी देश के लोकतंत्र तथा स्वस्थ लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चुनौती बनकर उभरे हैं।

उन्होंने कहा कि संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक दलों की गतिविधियां लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करती हैं। ऐसे में राजनीतिक नेताओं से सार्वजनिक आचरण और भाषा में मर्यादा की अपेक्षा की जाती है।

राहुल गांधी के बयान के बाद बढ़ा राजनीतिक टकराव

राहुल गांधी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत की विदेश नीति को लेकर की गई टिप्पणियों के बाद बीजेपी नेताओं की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जहां राहुल गांधी की भाषा और व्यवहार पर सवाल उठाए, वहीं सुधांशु त्रिवेदी ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए इसे लोकतांत्रिक मर्यादा से जोड़ा।

इस राजनीतिक विवाद में राहुल गांधी की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी विदेश नीति को लेकर की गई टिप्पणियां केंद्र में हैं। दूसरी ओर, बीजेपी नेताओं का कहना है कि इस तरह की भाषा प्रधानमंत्री के साथ-साथ भारत की प्रतिष्ठा और लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को प्रभावित करती है।

राजनीतिक विरासत का भी उठा मुद्दा

राजनाथ सिंह ने अपने बयान में कांग्रेस की राजनीतिक विरासत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कांग्रेस से जुड़े कई प्रमुख नेताओं का नाम लेते हुए सवाल उठाया कि मौजूदा राजनीतिक भाषा और व्यवहार के बाद पार्टी उन नेताओं की विरासत पर किस प्रकार दावा कर सकती है।

रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री के प्रति राजनीतिक असहमति या निराशा अपनी जगह हो सकती है, लेकिन उनके अनुसार सार्वजनिक जीवन में ऐसी अभद्र टिप्पणियों को स्वीकार नहीं किया जा सकता।