
बिहार में RE-NEET फर्जीवाड़े की जांच कर रही SIT, आरोपियों और अभ्यर्थियों से पूछताछ की तैयारी।Source : Social media
देशभर में मेडिकल प्रवेश परीक्षा RE-NEET में सामने आए फर्जीवाड़े के मामले ने अभ्यर्थियों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। परीक्षा की निष्पक्षता पर उठे सवालों के बीच बिहार में जांच अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने पूरे मामले की तह तक जाने के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जिसने जांच की रफ्तार तेज कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि अब सिर्फ गिरफ्तार सॉल्वर गैंग ही नहीं, बल्कि इस पूरे नेटवर्क से जुड़े हर व्यक्ति की भूमिका की जांच की जाएगी।जांच एजेंसी के अनुसार, जरूरत पड़ने पर गिरफ्तार आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी। वहीं, जिन अभ्यर्थियों के नाम जांच के दौरान सामने आए हैं, उनसे भी पूछताछ की जाएगी। अगर कोई छात्र नोटिस मिलने के बाद भी जांच में शामिल नहीं होता है, तो SIT की टीम उसके घर जाकर भी पूछताछ कर सकती है। अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य परीक्षा में हुई गड़बड़ियों की सच्चाई सामने लाना और पूरे फर्जीवाड़े के नेटवर्क का पर्दाफाश करना है।
12 सदस्यीय SIT करेगी पूरे मामले की जांच
आर्थिक अपराध इकाई (EOU) के एडीजी के निर्देश पर इस मामले की जांच के लिए 12 सदस्यीय SIT बनाई गई है। इस टीम का नेतृत्व डीआईजी स्तर के अधिकारी करेंगे। टीम में एक डीआईजी, एक एसपी, पांच डीएसपी और पांच इंस्पेक्टर शामिल हैं। जांच एजेंसी का उद्देश्य पूरे फर्जीवाड़े के नेटवर्क का पता लगाना और इसमें शामिल सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना है।
रिमांड पर लेकर होगी आरोपियों से पूछताछ
जांच एजेंसी गिरफ्तार किए गए सॉल्वरों और अन्य आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर सकती है। इसके अलावा बायोमेट्रिक सिस्टम में कथित गड़बड़ी करने वाले कर्मचारियों से भी विस्तृत पूछताछ होगी। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि परीक्षा केंद्रों पर पहचान सत्यापन प्रक्रिया में सेंध कैसे लगी और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे। जांच अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह से जुड़े बाकी लोगों की भी पहचान कर जल्द कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
छात्रों तक पहुंचेगी SIT
जानकारी के अनुसार, SIT परीक्षा से जुड़े मूल अभ्यर्थियों की पहचान के लिए उनके रोल नंबर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को भेजेगी। पता मिलने के बाद संबंधित छात्रों को पूछताछ के लिए नोटिस भेजा जाएगा। यदि नोटिस मिलने के बावजूद कोई अभ्यर्थी जांच में शामिल नहीं होता है, तो SIT की टीम उसके घर जाकर पूछताछ करेगी। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि परीक्षा में किसी छात्र की जगह दूसरे व्यक्ति ने परीक्षा दी थी या नहीं।
लखीसराय में पकड़े गए थे 9 सॉल्वर
21 जून को लखीसराय जिले के तीन परीक्षा केंद्रों से फर्जीवाड़ा करते हुए नौ सॉल्वर गिरफ्तार किए गए थे। इसके अलावा एक मूल अभ्यर्थी को भी हिरासत में लिया गया था। जांच के दौरान बायोमेट्रिक सिस्टम से छेड़छाड़ के आरोप में 18 लोगों की गिरफ्तारी हुई, जबकि दो अन्य सहयोगियों को भी पकड़ा गया। इस मामले में तीन अलग-अलग थानों में एफआईआर दर्ज की गई थी, जिन्हें अब EOU ने अपने कब्जे में लेकर SIT के हवाले कर दिया है।
संगठित नेटवर्क की जांच में जुटी एजेंसी
प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई गई है कि RE-NEET में फर्जीवाड़ा किसी संगठित गिरोह के जरिए किया गया। जांच एजेंसी अब इस नेटवर्क के तार बिहार के अन्य जिलों और दूसरे राज्यों तक जुड़े होने की संभावना की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
