धनबाद की राजनीति में इन दिनों 'मजदूर मसीहा' की उपाधि को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। नगर निगम चुनाव के दौरान शुरू हुई सिंह मेंशन और भाजपा सांसद ढुल्लू महतो के बीच की राजनीतिक खींचतान अब खुली बयानबाजी में बदल चुकी है। एक ओर धनबाद मेयर संजीव सिंह मजदूरों के अधिकारों और उनके शोषण के खिलाफ संघर्ष की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सांसद ढुल्लू महतो धनबाद के इतिहास के कई दिवंगत नेताओं को असली मजदूर हितैषी बताते हुए अलग दावा पेश कर रहे हैं। इस विवाद में झरिया विधायक रागिनी सिंह की एंट्री के बाद सियासी माहौल और भी गरमा गया है।
मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ने का दावा
धनबाद मेयर संजीव सिंह ने कहा कि उन्हें किसी के बयान से फर्क नहीं पड़ता और जनता ही तय करेगी कि मजदूरों का असली हितैषी कौन है। उन्होंने कहा कि निगम चुनाव के दौरान उन्होंने कोयलांचल की आउटसोर्सिंग कंपनियों में मजदूरों के शोषण का मुद्दा उठाया था और आज भी उस लड़ाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। संजीव सिंह ने दावा किया कि बाघमारा से लेकर झरिया तक मजदूरों के अधिकारों की आवाज उठाई जाएगी और समय आने पर जनता सब कुछ देखेगी।
ढुल्लू महतो ने गिनाए दूसरे मजदूर नेता
वहीं सांसद ढुल्लू महतो ने 'मजदूर मसीहा' के सवाल पर कहा कि धनबाद में मजदूरों के लिए संघर्ष करने वाले असली नेता दिवंगत बी.पी. सिन्हा, ए.के. राय और समरेश सिंह थे। उन्होंने कहा कि जनता भली-भांति जानती है कि किसने मजदूरों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया और किसने नहीं।
सांसद ने धनबाद में कथित माफियागिरी और गुंडागर्दी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जनता ने एक गरीब परिवार के बेटे को सांसद बनाकर जिम्मेदारी दी है और वह क्षेत्र में शांति, विकास और कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शहर में बन रहे कई बड़े प्रोजेक्ट्स में माफिया तत्वों की भूमिका रही है और इस व्यवस्था को खत्म करना उनकी प्राथमिकता है।
रागिनी सिंह ने किया पलटवार
सांसद के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए झरिया विधायक रागिनी सिंह ने कहा कि खुद को मजदूरों का हितैषी बताने वालों को पहले यह बताना चाहिए कि उन्होंने मजदूरों के जीवन में सुधार के लिए क्या ठोस काम किए हैं। उन्होंने कहा कि मजदूरों के मुद्दों को केवल मंचों और मीडिया तक सीमित रखने से समाधान नहीं होगा, बल्कि संसद और विधानसभा में उनकी आवाज उठानी होगी।
रागिनी सिंह ने दावा किया कि वह लगातार मजदूरों और आम लोगों के मुद्दों को सदन में उठाती रही हैं। उन्होंने कहा कि धनबाद में अपराध के खिलाफ लगातार कार्रवाई हो रही है और कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
सियासी बहस बनी चर्चा का विषय
रागिनी सिंह ने अपने पति और धनबाद मेयर संजीव सिंह का बचाव करते हुए कहा कि वह लोगों के सुख-दुख में हमेशा साथ खड़े रहते हैं और जनता के बीच सक्रिय रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि स्वर्गीय सूर्यदेव सिंह की जनसेवा की परंपरा को आगे बढ़ाने का काम संजीव सिंह कर रहे हैं।
फिलहाल 'मजदूर मसीहा' की उपाधि को लेकर शुरू हुई यह सियासी जंग धनबाद की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है। दोनों पक्ष अपने-अपने दावों के साथ जनता के बीच हैं और आने वाले समय में इस बहस का राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है।
