पटना। बिहार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर मंदिर बनाने के प्रस्ताव को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। बिहार राज्य ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड ने एक बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्पित मंदिर बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस फैसले के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

बोर्ड के सदस्यों का कहना है कि यह प्रस्ताव प्रधानमंत्री मोदी द्वारा ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए किए गए कार्यों और उनके अनुसार मिले सम्मान के प्रतीक के रूप में लाया गया है। उनका मानना है कि समाज में ट्रांसजेंडर समुदाय की पहचान और अधिकारों को लेकर पिछले कुछ वर्षों में जो बदलाव आए हैं, उन्हें देखते हुए यह एक सम्मान स्वरूप पहल है।

जानकारी के अनुसार, फिलहाल यह केवल एक प्रस्ताव है, जिसे बोर्ड की बैठक में मंजूरी दी गई है। मंदिर का निर्माण कब शुरू होगा, कहां होगा और इसके लिए धन की व्यवस्था कैसे होगी, इसे लेकर अभी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। आने वाले समय में इन पहलुओं पर फैसला लिया जा सकता है।

इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कुछ लोगों ने इसे प्रधानमंत्री के प्रति सम्मान जताने की पहल बताया, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि जीवित व्यक्तियों के नाम पर मंदिर बनाए जाने को लेकर समाज में अलग-अलग राय हो सकती है। कई लोगों ने यह भी कहा कि सार्वजनिक संसाधनों और सामाजिक प्राथमिकताओं पर भी चर्चा होनी चाहिए।

राजनीतिक दलों की ओर से भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। कुछ नेताओं ने इसे बोर्ड का स्वतंत्र निर्णय बताया, जबकि विपक्ष के कुछ नेताओं ने इस फैसले पर सवाल उठाए। हालांकि, अब तक केंद्र सरकार या प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

गौरतलब है कि वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नाम पर मंदिर बनाए जाने की खबरों पर सार्वजनिक रूप से असहमति जताई थी। उन्होंने कहा था कि किसी जीवित व्यक्ति के नाम पर मंदिर बनाना भारतीय परंपरा के अनुरूप नहीं है और लोगों से ऐसे प्रयासों के बजाय समाज सेवा और स्वच्छता जैसे कार्यों में योगदान देने की अपील की थी।

फिलहाल बिहार ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड के इस फैसले ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस प्रस्ताव पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और सरकार या संबंधित संस्थाओं की ओर से क्या आधिकारिक निर्णय सामने आता है।