पीएम मोदी को सेशेल्स का सर्वोच्च सम्मान। | Source: Instagram: @Firstpost

पीएम मोदी को सेशेल्स का सर्वोच्च सम्मान।Source : Instagram: @Firstpost

विक्टोरिया (सेशेल्स): हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका को एक नई मजबूती देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन दिवसीय सेशेल्स यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुई। यह दौरा केवल दो देशों के बीच औपचारिक कूटनीतिक मुलाकात भर नहीं रहा, बल्कि भारत और सेशेल्स के बीच 50 वर्षों से चले आ रहे भरोसे, सहयोग और मित्रता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला अवसर बना। सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के विशेष निमंत्रण पर पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी का वहां जिस गर्मजोशी, सम्मान और आत्मीयता के साथ स्वागत किया गया, उसने दोनों देशों के गहरे रिश्तों को दुनिया के सामने एक बार फिर मजबूती से प्रस्तुत किया। इस यात्रा के दौरान रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक विकास, क्षमता निर्माण और सांस्कृतिक संबंधों को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति और मजबूत होती दिखाई दे रही है।

राजकीय सम्मान के साथ भव्य स्वागत, गार्ड ऑफ ऑनर से बढ़ी दोस्ती की गरिमा

सेशेल्स की राजधानी विक्टोरिया स्थित राजभवन (स्टेट हाउस) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पारंपरिक सैन्य सम्मान के साथ भव्य स्वागत किया गया। राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी की मौजूदगी में सेशेल्स के सैन्य दस्ते ने प्रधानमंत्री मोदी को औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया। यह सम्मान दोनों देशों के बीच गहरे विश्वास और मजबूत द्विपक्षीय संबंधों का प्रतीक माना गया। इससे पहले जब प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स पहुंचे, तब राष्ट्रपति हर्मिनी स्वयं हवाई अड्डे पर उनकी अगवानी करने पहुंचे। किसी राष्ट्राध्यक्ष का प्रोटोकॉल से आगे बढ़कर इस प्रकार स्वागत करना दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत विश्वास और दोनों देशों की मजबूत साझेदारी को दर्शाता है। पूरे दौरे के दौरान सेशेल्स सरकार ने भारतीय प्रधानमंत्री के सम्मान में कई विशेष कार्यक्रम आयोजित किए, जिनमें दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने भी भाग लिया।

सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित हुए पीएम मोदी, रक्षा और विकास के क्षेत्र में कई बड़ी घोषणाएं

इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण और भावुक क्षण तब आया जब सेशेल्स सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान ब्लू होराइजन का संरक्षक (गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन) से सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने, समुद्री पारिस्थितिकी की रक्षा तथा सतत विकास के क्षेत्र में उनके वैश्विक नेतृत्व और योगदान के लिए प्रदान किया गया। सम्मान ग्रहण करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इसे केवल व्यक्तिगत उपलब्धि न बताते हुए उन सभी लोगों और देशों को समर्पित किया जो जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौती से संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए पृथ्वी और महासागरों की रक्षा करना पूरी मानवता की साझा जिम्मेदारी है और यह सम्मान उसी सामूहिक प्रयास का प्रतीक है।

रक्षा सहयोग के क्षेत्र में भी भारत ने सेशेल्स को कई महत्वपूर्ण सौगातें दीं। प्रधानमंत्री मोदी ने महासागर दृष्टि और भारत की क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास (सागर) नीति के तहत सेशेल्स को पीएस लेस्पवार नामक भारत में निर्मित तेज गश्ती पोत सौंपा। क्रियोल भाषा में लेस्पवार का अर्थ आशा होता है। यह आधुनिक गश्ती पोत समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ने, तस्करी और समुद्री अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में सेशेल्स को बड़ी मदद देगा। इसके अलावा भारत ने छह आधुनिक एम्बुलेंस, दस उपयोगी वाहन और पाँच लेजर-निर्देशित नौकाएं भी सेशेल्स को भेंट कीं। इतना ही नहीं, भारत ने सामाजिक आवास, कौशल विकास, बुनियादी ढांचे और व्यावसायिक प्रशिक्षण जैसी विकास परियोजनाओं के लिए 175 मिलियन अमेरिकी डॉलर (17.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर) के विशेष आर्थिक सहायता पैकेज की भी घोषणा की, जिसे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

संसद में ऐतिहासिक संबोधन और हिंद महासागर में साझा विकास का संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस यात्रा के दौरान सेशेल्स की राष्ट्रीय विधानसभा को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री भी बने। अपने ऐतिहासिक संबोधन में उन्होंने भारत और सेशेल्स को हिंद महासागर की लहरों से जुड़े दो ऐसे देशों की संज्ञा दी, जिनके रिश्तों की नींव केवल कूटनीति नहीं बल्कि विश्वास, सहयोग और साझा विकास पर टिकी है। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति का आधार किसी भी प्रकार का विस्तारवाद नहीं, बल्कि विकासवाद, साझेदारी और परस्पर सम्मान है। उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र के सभी देशों की सुरक्षा, स्थिरता और आर्थिक समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध है तथा भविष्य में भी हर कठिन परिस्थिति में अपने मित्र देशों के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में जलवायु परिवर्तन, समुद्री अर्थव्यवस्था, समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग, डिजिटलीकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य और क्षमता निर्माण जैसे विषयों पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत और सेशेल्स आने वाले वर्षों में इन सभी क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे ताकि दोनों देशों के नागरिकों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिल सके।

कूटनीति से आगे बढ़कर प्रकृति, संस्कृति और विश्वास का संदेश

राजनीतिक और रणनीतिक बैठकों के अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने सेशेल्स के राष्ट्रीय वनस्पति उद्यान का भी दौरा किया। यहां उन्होंने राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के साथ पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इसके साथ ही उन्होंने सेशेल्स के विश्वप्रसिद्ध विशालकाय कछुओं को अपने हाथों से भोजन भी खिलाया। यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक यात्रा का हिस्सा नहीं था, बल्कि प्रकृति संरक्षण, जैव विविधता और पर्यावरण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का प्रतीक भी माना गया।

प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा सेशेल्स के 50वें राष्ट्रीय दिवस (स्वर्ण जयंती समारोह) के अवसर पर हुई, जिसमें उन्हें मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। इसे भारत और सेशेल्स के संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, आर्थिक सहायता, पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक साझेदारी और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित यह दौरा भारत की सागर नीति को नई ऊर्जा देने वाला साबित हुआ। विश्लेषकों का मानना है कि इस यात्रा ने न केवल भारत और सेशेल्स के संबंधों को और मजबूत किया है, बल्कि पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भूमिका को एक विश्वसनीय, जिम्मेदार और दीर्घकालिक साझेदार के रूप में भी स्थापित किया है। आने वाले समय में इस यात्रा के दौरान हुए समझौते और घोषणाएं दोनों देशों के रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।