
लोकसभा में टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल 2026 पेश करतीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण।Source : Chrome
संसद के मानसून सत्र में विपक्ष के लगातार विरोध और नारेबाजी के बीच केंद्र सरकार ने एक अहम विधेयक लोकसभा से पारित करा लिया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 सदन में पेश किया, जिसे कुछ ही मिनटों में मंजूरी मिल गई। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य भारत को विदेशी निवेश और मैन्युफैक्चरिंग के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।
तीन मिनट में पारित हुआ विधेयक
मंगलवार को लोकसभा की कार्यवाही के दौरान विपक्ष राम मंदिर चढ़ावा विवाद और अन्य मुद्दों को लेकर लगातार हंगामा कर रहा था। इसी बीच दोपहर करीब 2:12 बजे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल पेश किया। शोर-शराबे के बीच सदन ने करीब 2:15 बजे इस विधेयक को पारित कर दिया। पूरे घटनाक्रम में बिल को मंजूरी मिलने में महज तीन मिनट का समय लगा।
क्या है सरकार का उद्देश्य?
सरकार का कहना है कि नए संशोधन का मकसद निवेशकों के लिए कर व्यवस्था को अधिक स्पष्ट और भरोसेमंद बनाना है। इसके जरिए विदेशी निवेश को बढ़ावा देने, घरेलू विनिर्माण को मजबूती देने और वैश्विक कंपनियों को भारत में कारोबार के लिए प्रोत्साहित करने की कोशिश की गई है।
फंड मैनेजरों और विदेशी निवेशकों को राहत
विधेयक में विदेशी फंड मैनेजरों के लिए भारत में काम करना आसान बनाने का प्रावधान किया गया है। साथ ही यह स्पष्ट किया गया है कि कुछ परिस्थितियों में विदेशी निवेश को भारत में स्थायी कारोबारी उपस्थिति नहीं माना जाएगा। इससे अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को कर संबंधी अनिश्चितताओं से राहत मिलने की उम्मीद है।
इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को मिलेगा फायदा
संशोधन के तहत उन विदेशी कंपनियों को भी आयकर राहत देने का प्रस्ताव है, जो भारत में अनुबंध आधारित विनिर्माण (कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग) के लिए मशीनरी, उपकरण या इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों की आपूर्ति करती हैं। यह राहत मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट, सर्वर, कंप्यूटर और उनसे जुड़े उपकरणों के निर्माण से जुड़ी कंपनियों को मिलेगी। प्रस्ताव के अनुसार यह कर लाभ वर्ष 2040-41 तक जारी रह सकता है।
वित्त मंत्रालय ने क्या कहा?
वित्त मंत्रालय के अनुसार इस संशोधन का उद्देश्य भारत को वैश्विक निवेश, विनिर्माण और व्यापार का भरोसेमंद केंद्र बनाना है। मंत्रालय का कहना है कि सरकार ऐसी नीतियां लागू कर रही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय निवेशक और कंपनियां भारत को लंबे समय के निवेश और कारोबार के लिए प्राथमिक विकल्प मानें।
विपक्ष के विरोध के बीच पास हुआ बिल
विधेयक ऐसे समय पारित हुआ जब विपक्ष विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रहा था। हालांकि हंगामे के बावजूद सरकार ने सदन की कार्यवाही आगे बढ़ाई और बिल को लोकसभा से मंजूरी दिला दी। अब इस विधेयक पर आगे की संसदीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे लागू किया जाएगा।
