नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दीपके ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर नया अभियान शुरू किया है। उन्होंने महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में स्थित अपने पैतृक गांव संतुक पिंपरी से ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान की शुरुआत की। दीपके ने सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि इसका सबसे अधिक असर गरीब और वंचित परिवारों के विद्यार्थियों पर पड़ रहा है।
स्कूल पहुंचते ही दीपके ने देखीं बुनियादी सुविधाएं
स्वतंत्रता दिवस पर अपने पैतृक गांव पहुंचे अभिजीत दीपके ने ध्वजारोहण समारोह में हिस्सा लिया। इसके बाद वह जिला परिषद के एक स्कूल में पहुंचे और वहां विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं का जायजा लिया। दीपके ने दावा किया कि स्कूल के शौचालयों में पानी की व्यवस्था नहीं थी।
उन्होंने स्कूल की स्थिति का उल्लेख करते हुए खिड़कियां टूटे होने और विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त बेंच नहीं होने का भी दावा किया। दीपके ने कहा कि जब सरकारी स्कूलों में बच्चों को जरूरी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं होंगी, तो शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर कैसे सुनिश्चित किए जा सकते हैं।
‘स्कूलों की सुविधाओं की पूरी लिस्ट तैयार करेंगे’
अभिजीत दीपके ने संवाददाताओं से कहा, ''भारत को आजाद हुए 80 साल हो गए हैं और अगर सरकारी स्कूलों में पानी जैसी बुनियादी सुविधा भी नहीं है, तो देश का विकास कैसे होगा?'' उन्होंने कहा कि CJP ने सरकारी स्कूलों में उपलब्ध सुविधाओं का रिकॉर्ड तैयार करने के लिए एक सूची बनाई है।
उन्होंने बताया, ''हमने एक लिस्ट तैयार की है, जिसमें यह दर्ज किया जा सकेगा कि स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं। हम महाराष्ट्र और देशभर के स्कूलों से आंकड़े जुटाएंगे और उनका संकलन करेंगे।'' दीपके के मुताबिक अभियान के अगले चरण में महाराष्ट्र के अलग-अलग तालुकों के सरकारी स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया जाएगा।
टूटे स्कूल और बुनियादी सुविधाओं की कमी का लगाया आरोप
दीपके ने अपने गांव के स्कूल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पर्याप्त बेंच उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या के मुकाबले केवल चार बेंच हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि निजी स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त बेंच उपलब्ध हो सकती हैं तो सरकारी स्कूलों में ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं हो सकती।
उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके स्कूल पहुंचने से ठीक पहले शौचालयों की सफाई की गई थी। इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल की टूटी खिड़कियों को ऐसे बैनर से ढका गया है, जिस पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का चित्र अंकित है।
सरकारी स्कूलों को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप
CJP संयोजक ने केंद्र सरकार की शिक्षा नीति और बजट को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने शिक्षा के बजट में कटौती की है और निजी स्कूलों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी स्कूलों को बंद किया जा रहा है।
दीपके ने दावा किया, ''पिछले दस वर्षों में भारत में 94,000 से अधिक सरकारी स्कूल बंद किए गए हैं। जब अधिक स्कूल खोलने की जरूरत है, तब स्कूल बंद करके देश को कैसे मजबूत बनाया जा सकता है?'' हालांकि ये आंकड़े अभिजीत दीपके द्वारा किए गए दावे के रूप में सामने आए हैं।
‘समान अवसर के बिना विकास की बात अधूरी’
अभिजीत दीपके ने कहा कि सरकारी स्कूलों में पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिलने से विद्यार्थियों को समान अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक सभी बच्चों को समान अवसर नहीं मिलेगा, तब तक देश के विकसित होने की बात पूरी तरह सार्थक नहीं होगी।
उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा बनाए जा रहे वीडियो का भी जिक्र किया। दीपके ने कहा कि कई विद्यार्थी वीडियो बनाकर यह बता रहे हैं कि उनके स्कूल तक पहुंचने के लिए अच्छी सड़कें तक उपलब्ध नहीं हैं। उनके मुताबिक, ये स्थितियां सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी की ओर इशारा करती हैं।
निजी स्कूलों की फीस पर भी उठाई आवाज
अभिजीत दीपके ने सरकारी स्कूलों के साथ-साथ निजी स्कूलों की फीस को लेकर भी अपनी मांग रखी। उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों की फीस सीमित की जानी चाहिए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा का रास्ता कठिन न हो।
उन्होंने कहा, ''लोग फीस के रूप में एक से डेढ़ लाख रुपये तक दे रहे हैं। गरीब बच्चों को शिक्षा कैसे मिलेगी? इसलिए निजी स्कूलों की फीस सीमित की जानी चाहिए।'' दीपके के अनुसार, शिक्षा तक पहुंच को आर्थिक स्थिति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
सरकारी अस्पतालों के लिए भी अभियान चलाने की तैयारी
CJP संयोजक ने कहा कि उनकी पार्टी सरकारी स्कूलों के बाद सरकारी अस्पतालों में खराब स्वास्थ्य सुविधाओं के मुद्दे पर भी इसी तरह का अभियान चलाएगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर सरकार से जवाब मांगने की जरूरत है।
दीपके ने यह भी कहा कि देश की राजनीतिक दिशा केवल शहरों में रहने वाले लोग तय नहीं करेंगे। उनके अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को भी राजनीतिक प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
राजनीतिक दलों को भी घेरा
इससे पहले अभिजीत दीपके ने छत्रपति संभाजीनगर में सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं और शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं करने को लेकर राजनीतिक दलों की आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि शिक्षा को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में लाने और सरकारों से जवाब मांगने की जरूरत है।
उन्होंने ग्रामीण स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान की घोषणा की थी। इसके साथ ही अभिभावकों से स्कूलों में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं का लेखा-जोखा तैयार करने और सरपंचों से स्कूलों की स्थिति सुधारने की जिम्मेदारी उठाने की अपील की थी।
‘नई संसद बनी, गांवों में नए स्कूल क्यों नहीं?’
अभिजीत दीपके ने विकास की प्राथमिकताओं को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, ''हमने नई संसद और नया प्रधानमंत्री आवास बना लिया, लेकिन गांवों में नए स्कूल क्यों नहीं बना पाए? क्या हम किसानों और मजदूरों के बच्चों को देश का भविष्य नहीं मानते?''
उनके इस बयान के साथ उनका अभियान सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को सार्वजनिक चर्चा का विषय बनाने पर केंद्रित दिखाई देता है। ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत महाराष्ट्र और देश के अन्य हिस्सों से स्कूलों की सुविधाओं से जुड़े आंकड़े जुटाने की बात कही गई है।
अब देशभर के स्कूलों का आंकड़ा जुटाने की तैयारी
अभिजीत दीपके ने कहा कि अभियान के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि सरकारी स्कूलों में पानी, शौचालय, खिड़कियां, बेंच और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं। इसके लिए तैयार की गई सूची में स्कूलों की स्थिति का रिकॉर्ड दर्ज किया जाएगा।
स्वतंत्रता दिवस पर हिंगोली के संतुक पिंपरी से शुरू हुआ यह अभियान सरकारी स्कूलों की स्थिति और विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर CJP के रुख को सामने लाता है। दीपके ने स्पष्ट किया है कि अभियान का अगला चरण महाराष्ट्र के अन्य तालुकों तक ले जाया जाएगा और इसके बाद महाराष्ट्र तथा देशभर से आंकड़े जुटाने का प्रयास किया जाएगा।
