नई दिल्ली। भारत में सड़क सुरक्षा को नई तकनीक के साथ मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने नई गाड़ियों में व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) कम्युनिकेशन सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन का मसौदा (ड्राफ्ट नोटिफिकेशन) जारी किया गया है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो वर्ष 2028 से निर्धारित श्रेणी की सभी नई गाड़ियों में V2V सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं को कम करना, चालकों को समय रहते खतरे की जानकारी देना और देश में आधुनिक कनेक्टेड ट्रांसपोर्ट सिस्टम विकसित करना है।
क्या है V2V कम्युनिकेशन सिस्टम?
व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) कम्युनिकेशन एक ऐसी आधुनिक तकनीक है, जिसके माध्यम से सड़क पर चल रही गाड़ियां आपस में वायरलेस तरीके से महत्वपूर्ण जानकारी साझा कर सकेंगी। इसमें वाहन की गति, दिशा, लोकेशन और एक्सीलरेशन जैसी सूचनाएं लगातार एक-दूसरे तक पहुंचती रहेंगी। इस डेटा के आधार पर वाहन या उसमें मौजूद सुरक्षा प्रणाली संभावित खतरे की पहले से चेतावनी दे सकेगी।
इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि चालक उन खतरों की जानकारी भी समय रहते प्राप्त कर सकेगा, जो उसकी आंखों से दिखाई नहीं दे रहे होंगे। उदाहरण के लिए, कई वाहन आगे अचानक ब्रेक लगने, सड़क पर गलत दिशा से आती गाड़ी, इमरजेंसी वाहन के नजदीक आने या असुरक्षित लेन परिवर्तन जैसी स्थितियों की सूचना पहले ही मिल सकेगी।
पारंपरिक सुरक्षा तकनीक से कैसे अलग है V2V
वर्तमान में अधिकांश आधुनिक वाहन कैमरा, रडार और सेंसर आधारित सुरक्षा तकनीकों पर निर्भर रहते हैं। ये सिस्टम केवल वाहन की दृष्टि सीमा तक ही प्रभावी होते हैं। इसके विपरीत V2V कम्युनिकेशन वाहन की दृश्य सीमा से आगे की जानकारी भी उपलब्ध करा सकता है।
यही वजह है कि इस तकनीक को भविष्य की एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) तकनीक का महत्वपूर्ण पूरक माना जा रहा है। इससे सड़क पर चलने वाले वाहनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और दुर्घटनाओं की संभावना कम होने की उम्मीद है।
दो चरणों में लागू होगा नया नियम
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने L, M और N श्रेणी के वाहनों के लिए चरणबद्ध कार्यान्वयन योजना प्रस्तावित की है। इन श्रेणियों में दोपहिया वाहन, यात्री वाहन और वाणिज्यिक वाहन शामिल हैं।
प्रस्ताव के अनुसार 1 अक्टूबर 2027 से V2V कम्युनिकेशन सिस्टम से लैस वाहनों को AIS-230 मानक का पालन करना होगा।
इसके बाद 1 अक्टूबर 2028 से इन श्रेणियों में बनने वाले सभी नए वाहनों में AIS-230 के अनुरूप V2V कम्युनिकेशन सिस्टम अनिवार्य होगा।
मंत्रालय का कहना है कि चरणबद्ध व्यवस्था अपनाने से वाहन निर्माता कंपनियों और संबंधित पक्षों को नई तकनीक के अनुरूप तैयारी करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा।
क्या है AIS-230 मानक?
AIS-230 भारत में V2V कम्युनिकेशन सिस्टम के लिए तैयार किया गया नया तकनीकी मानक है। यह मानक वाहन में फैक्ट्री स्तर पर लगाए जाने वाले ऑन-बोर्ड यूनिट्स की तकनीकी, कार्यात्मक, पर्यावरणीय, प्रदर्शन और साइबर सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं को निर्धारित करता है।
यह प्रणाली 5.875 GHz से 5.925 GHz फ्रीक्वेंसी बैंड में Cellular Vehicle-to-Everything (C-V2X) तकनीक के माध्यम से कार्य करेगी।
दूरसंचार विभाग ने 10 जून 2026 को जारी G.S.R. 466(E) के तहत इस स्पेक्ट्रम के उपयोग को लाइसेंस आवश्यकता से छूट प्रदान कर दी है, जिससे इस तकनीक के व्यापक उपयोग का रास्ता साफ हुआ है।
AIS-230 में किन मानकों का पालन करना होगा
AIS-230 के तहत कई तकनीकी आवश्यकताएं निर्धारित की गई हैं। इनमें रेडियो प्रदर्शन और फ्रीक्वेंसी स्थिरता, रिसीवर संवेदनशीलता और चयन क्षमता, ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) आधारित पोजिशनिंग, विद्युत एवं पावर सप्लाई प्रदर्शन, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कम्पैटिबिलिटी, साइबर सुरक्षा तथा सड़क सुरक्षा संचार से जुड़े प्रदर्शन मानक शामिल हैं।
इन सभी मानकों का उद्देश्य V2V तकनीक को सुरक्षित, भरोसेमंद और प्रभावी बनाना है।
ड्राइवरों को मिलेंगे कई महत्वपूर्ण सुरक्षा अलर्ट
V2V सिस्टम के माध्यम से वाहनों में कई उन्नत सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इनमें इमरजेंसी ब्रेक अलर्ट, आगे संभावित टक्कर की चेतावनी, गलत दिशा में चल रहे वाहन की सूचना और इमरजेंसी वाहन के आने की चेतावनी जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।
इन अलर्ट के माध्यम से चालक समय रहते उचित निर्णय ले सकेगा, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
टास्क फोर्स की सिफारिशों पर आधारित है प्रस्ताव
मंत्रालय का यह प्रस्ताव इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम (ITS) पर गठित सरकारी टास्क फोर्स की सिफारिशों के आधार पर तैयार किया गया है। टास्क फोर्स ने पूरे देश में सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए 5.9 GHz ITS/V2X फ्रीक्वेंसी रेंज को अपनाने की सिफारिश की थी।
इसके बाद 7 मई 2026 को आयोजित सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स-टेक्निकल स्टैंडिंग कमेटी की 56वीं बैठक में AIS-230 मानक पर विचार किया गया और इसे देशभर में लागू करने के लिए तकनीकी आधार के रूप में प्रस्तावित किया गया।
30 दिनों तक मांगे जाएंगे सुझाव
मंत्रालय द्वारा जारी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को सार्वजनिक सुझाव और आपत्तियों के लिए जारी किया गया है। संबंधित पक्ष अगले 30 दिनों के भीतर अपने सुझाव और टिप्पणियां भेज सकेंगे। प्राप्त सुझावों की समीक्षा के बाद केंद्र सरकार अंतिम अधिसूचना जारी करेगी।
सड़क सुरक्षा में बड़ा बदलाव ला सकती है यह तकनीक
यदि प्रस्तावित नियम लागू होता है, तो यह भारत में कनेक्टेड वाहनों की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण नियामकीय कदमों में से एक माना जाएगा। इससे न केवल सड़क सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी, बल्कि भविष्य के इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम, स्मार्ट मोबिलिटी और वाहनों के बीच रियल-टाइम संचार आधारित तकनीकों को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने और ड्राइवरों की सुरक्षा बढ़ाने में यह तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
