19 साल NEET अभ्यर्थी की मौत

19 वर्षीय NEET अभ्यर्थी ने की आत्महत्या

तमिलनाडु के कोयंबटूर में NEET परीक्षा की तैयारी कर रही 19 वर्षीय आत्महत्या छात्रा अनुनकीर्तन (Anunkirthan) की आत्महत्या ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। डॉक्टर बनने का सपना देखने वाली इस छात्रा की मौत ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं के बढ़ते दबाव, छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। बताया जा रहा है कि अनुनकीर्तन (Anunkirthan) पिछले कई वर्षों से मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए मेहनत कर रही थीं और इस बार भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद के साथ तैयारी में जुटी थीं। लेकिन परीक्षा से जुड़ी अनिश्चितताओं और लगातार बढ़ते तनाव ने उन्हें मानसिक रूप से काफी प्रभावित किया। घटना के बाद तमिलनाडु में राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। विपक्षी DMK ने इसे बेहद दुखद बताते हुए NEET के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। वहीं, छात्र संगठनों और शिक्षा विशेषज्ञों ने भी इस घटना को छात्रों पर बढ़ते परीक्षा दबाव का गंभीर उदाहरण बताते हुए मानसिक स्वास्थ्य सहायता व्यवस्था को मजबूत करने की मांग उठाई है।

NEET की तैयारी के बीच उठाया खौफनाक कदम

पुलिस के मुताबिक, मृतक छात्रा अनुनकीर्तन पिछले कुछ वर्षों से मेडिकल कॉलेज में दाखिला पाने का सपना देख रही थी और इसके लिए लगातार NEET परीक्षा की तैयारी कर रही थी। वह पहले भी दो बार परीक्षा दे चुकी थी और इस साल एक बार फिर बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद के साथ तैयारी में जुटी थी। शुरुआती जांच में सामने आया है कि हाल के घटनाक्रम और परीक्षा से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण वह काफी तनाव में थी। परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ के आधार पर पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि आखिर किन परिस्थितियों ने उसे इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर किया। हालांकि मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है, इसलिए जांच एजेंसियां सभी संभावित पहलुओं पर ध्यान दे रही हैं।

छात्रा की मौत के बाद भड़का विरोध

घटना की खबर सामने आते ही कोयंबटूर और राज्य के अन्य हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। कई छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक दलों ने इस घटना पर दुख जताते हुए NEET परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मेडिकल प्रवेश की यह परीक्षा छात्रों के बीच अत्यधिक प्रतिस्पर्धा पैदा करती है, जिससे कई युवा मानसिक दबाव और असफलता के डर से जूझते हैं। DMK ने भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए राज्यभर में आंदोलन चलाने की घोषणा की है। पार्टी नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार को छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस व्यवस्था पर पुनर्विचार करना चाहिए।

NEET को लेकर तमिलनाडु की पुरानी नाराजगी

तमिलनाडु उन राज्यों में शामिल है जो शुरुआत से ही NEET परीक्षा का विरोध करते रहे हैं। राज्य सरकार और कई शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह परीक्षा ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों के लिए समान अवसर सुनिश्चित नहीं कर पाती। उनका तर्क है कि महंगे कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों को परीक्षा में बढ़त मिलती है, जबकि सरकारी स्कूलों और सीमित संसाधनों वाले परिवारों के बच्चों को नुकसान उठाना पड़ता है। यही वजह है कि राज्य सरकार कई बार NEET से छूट की मांग उठा चुकी है और विधानसभा में इस संबंध में विधेयक भी पारित कर चुकी है, लेकिन अब तक उसे मंजूरी नहीं मिल सकी है।