Source : Prabhat Khabar

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पश्चिम बंगाल की राजनीति में सांप्रदायिक मुद्दों पर हाल के विवादों और चल रही बहस के बीच, इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के MLA नौशाद सिद्दीकी ने अपनी चुप्पी तोड़ी है और साफ़ जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि अगर कोई कानून तोड़ता है या कोई आपत्तिजनक बयान देता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन किसी एक व्यक्ति के कामों के आधार पर पूरे मुस्लिम समुदाय को ज़िम्मेदार ठहराना गलत है। नौशाद सिद्दीकी ने कहा कि उनकी पार्टी हमेशा संविधान, कानून और सामाजिक सद्भाव के साथ खड़ी रही है और किसी भी भड़काऊ या बांटने वाली बयानबाजी का समर्थन नहीं करती है। उन्होंने हाल के विवादित भाषण, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के जवाब और विधानसभा में एक बिल के खिलाफ वोट का भी ज़िक्र किया। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में इन मुद्दों पर राजनीतिक बयानबाजी तेज़ हो रही है और अलग-अलग पार्टियां एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रही हैं।

'एक व्यक्ति की गलती पर पूरे समुदाय को जिम्मेदार ठहराना गलत'

कोलकाता में मीडिया से बातचीत के दौरान नवशाद सिद्दीकी ने कहा कि किसी भी व्यक्ति द्वारा की गई गलती का विरोध करना और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करना हर नागरिक का अधिकार है। हालांकि उन्होंने सवाल उठाया कि किसी एक व्यक्ति के कृत्य के लिए पूरे मुस्लिम समुदाय से जवाब मांगना या उन्हें सामूहिक रूप से दोषी मानना ​​उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी सबसे बड़ी आपत्ति इसी सोच को लेकर है। नवशाद ने कहा कि यदि कोई गलत बयान देता है तो उसका समर्थन नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन पूरे समुदाय को उस घटना से जुड़ना सामाजिक सौहार्द के लिए हानिकारक है। उन्होंने यह भी कहा कि अपने छह सालों के राजनीतिक जीवन में उन्होंने कभी भी समाज को बांटने वाली भाषा का इस्तेमाल नहीं किया और न ही आईएसएफ ने ऐसे किसी व्यक्ति का समर्थन किया है।

ममता बनर्जी के बयान का स्वागत, विधानसभा में बिल के विरोध का भी किया जिक्र

नौशाद सिद्दीकी पश्चिम बंगाल के भांगर विधानसभा क्षेत्र से MLA हैं और इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के एक जाने-माने नेता हैं। वह फुरफुरा शरीफ के प्रभावशाली सिद्दीकी परिवार से हैं, जबकि उनके बड़े भाई अब्बास सिद्दीकी ने 2021 में ISF की स्थापना की थी। आलिया यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र, नौशाद राजनीतिक रूप से सक्रिय होने से पहले सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में शामिल थे। पिछले कुछ सालों में, उन्होंने मुसलमानों, दलितों और हाशिए पर पड़े समुदायों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। उनके हालिया बयान ने एक बार फिर उनका नाम पश्चिम बंगाल की राजनीति में सबसे आगे ला दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना ​​है कि राज्य में चल रही राजनीतिक और सामाजिक बहस के बीच उनका बयान महत्वपूर्ण है, और आने वाले दिनों में इस पर विभिन्न पार्टियों की प्रतिक्रियाएं आ सकती हैं।