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भारत में सरसों का तेल रसोई का अहम हिस्सा माना जाता है और इसका इस्तेमाल सब्जी, अचार से लेकर कई पारंपरिक व्यंजनों तक में किया जाता है। इसे दिल की सेहत के लिए भी फायदेमंद माना जाता है, लेकिन अमेरिका में यही सरसों का तेल खाने के लिए प्रतिबंधित है। वहां बाजार में बिकने वाली सरसों के तेल की बोतलों पर "For External Use Only" यानी केवल बाहरी इस्तेमाल के लिए लिखा होता है। ऐसे में सवाल उठता है कि जिस तेल का भारत में वर्षों से सेवन किया जा रहा है, उसे अमेरिका में खाद्य तेल के रूप में मंजूरी क्यों नहीं मिली। इसके पीछे वैज्ञानिक शोध, नियामकीय नियम और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं प्रमुख वजह मानी जाती हैं।
एरुसिक एसिड बना प्रतिबंध की सबसे बड़ी वजह
US में सरसों के तेल पर बैन लगने की सबसे बड़ी वजह इसमें इरुसिक एसिड का होना है। US फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के मुताबिक, आम सरसों के तेल में यह फैटी एसिड काफ़ी ज़्यादा होता है। 1970 के दशक में चूहों पर की गई कुछ स्टडीज़ में दावा किया गया था कि ज़्यादा मात्रा में इरुसिक एसिड लेने से दिल की मांसपेशियों में फैट जमा हो सकता है, जिसे मायोकार्डियल लिपिडोसिस कहते हैं। इस शुरुआती रिसर्च के आधार पर, US और कुछ दूसरे पश्चिमी देशों ने सरसों के तेल को खाने के तेल के तौर पर मंज़ूरी नहीं दी। हालांकि, कई मॉडर्न साइंटिस्ट और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि वे स्टडीज़ सिर्फ़ जानवरों पर आधारित थीं और दी जाने वाली मात्रा आम इंसानी खाने की चीज़ों से बहुत ज़्यादा थी, इसलिए उनके नतीजों को सीधे इंसानों पर लागू नहीं किया जा सकता।
सरसों के तेल पर बैन, फिर भी अमेरिका में हार्ट डिजीज क्यों ज्यादा?
दिलचस्प बात यह है कि सरसों के तेल पर बैन होने के बावजूद, दुनिया में सबसे ज़्यादा दिल की बीमारियाँ US में होती हैं। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) की 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, हर साल लगभग 9.33 लाख लोग दिल की बीमारियों से मरते हैं, जबकि लगभग 8.05 लाख लोग हार्ट अटैक से पीड़ित होते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसका मुख्य कारण सरसों के तेल का इस्तेमाल नहीं, बल्कि वहाँ की मॉडर्न लाइफस्टाइल है। प्रोसेस्ड फूड, ट्रांस फैट, रिफाइंड शुगर, हाई कैलोरी फूड, मोटापा, स्मोकिंग और फिजिकल एक्टिविटी की कमी US में बढ़ती दिल की बीमारियों के मुख्य कारण माने जाते हैं। इससे यह साफ है कि दिल की बीमारियों के लिए किसी एक तेल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
क्या भारत में सरसों का तेल सुरक्षित है? जानिए विशेषज्ञों की राय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सरसों के तेल में मोनोअनसैचुरेटेड (MUFA) और पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड (PUFA) का अच्छा संतुलन होता है, जो अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाने और खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने में मदद कर सकता है। इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड, एंटीऑक्सिडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण भी होते हैं। कई शोधों से पता चलता है कि सीमित मात्रा में शुद्ध, कोल्ड-प्रेस्ड या कच्चा गनी सरसों का तेल हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है। भारत में इसका सुरक्षित उपयोग वर्षों से किया जा रहा है, जबकि अमेरिका में इरुसिक एसिड पर नियामक नीति अभी भी लागू है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वस्थ जीवन शैली, संतुलित आहार और किसी भी तेल की सीमित मात्रा ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है।
