कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहली बार मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को सीधे निशाने पर लिया है। ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया मंच फेसबुक और एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि शुभेंदु अधिकारी ने सरकारी कार्यालय में बैठकर उन्हें धमकी दी। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री ने यह तक कहा कि वह सुनिश्चित करेंगे कि ममता बनर्जी अपने घर से बाहर न निकल सकें।
‘क्या यही वह भारत है जिसकी कल्पना संविधान में की गई थी?’
ममता बनर्जी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में इस कथित बयान को लेकर राष्ट्रपति, भारत के मुख्य न्यायाधीश और देश की जनता से सवाल किया। उन्होंने कहा कि क्या यही वह भारत है जिसकी कल्पना संविधान में की गई है? ममता बनर्जी ने कहा कि एक मौजूदा मुख्यमंत्री, जिसने उसी संविधान को बनाए रखने की शपथ ली है, खुले तौर पर मुख्य विपक्षी पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की चेयरपर्सन की स्वतंत्रता को रोकने की धमकी दे रहा है।
ममता बनर्जी ने इस घटनाक्रम को भारतीय राजनीति में एक नए निचले स्तर के रूप में बताया। उन्होंने कहा कि शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें खुले तौर पर धमकी दी है और कहा है कि वह सुनिश्चित करेंगे कि वह अपने घर से बाहर भी न निकल सकें।
‘क्या इसका मतलब हाउस अरेस्ट है या राजनीतिक उत्पीड़न?’
ममता बनर्जी ने कथित बयान के अर्थ पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि जब कहा जाता है कि किसी व्यक्ति को घर से बाहर नहीं निकलने दिया जाएगा, तो इसका वास्तविक मतलब क्या है? क्या इसका अर्थ हाउस अरेस्ट है, धमकी है या राजनीतिक उत्पीड़न?
उन्होंने सवाल किया कि संवैधानिक लोकतंत्र में किसी व्यक्ति को यह अधिकार किसने दिया कि वह तय करे कि कौन स्वतंत्र रूप से घूम सकता है और कौन नहीं। ममता बनर्जी ने कहा कि उन्हें शायद उन लोगों के साथ भ्रमित किया जा रहा है जो तानाशाही के आगे झुकने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह एक बड़ी गलतफहमी है।
ममता बोलीं- ‘उनका घमंड जोरदार है, बेचैनी उससे भी ज्यादा’
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने अपने पोस्ट में शुभेंदु अधिकारी पर तीखा राजनीतिक हमला भी किया। ममता बनर्जी ने कहा कि उनका घमंड जोरदार है और उनकी बेचैनी उससे भी ज्यादा जोरदार है। उन्होंने आगे दावा किया कि उनके दिन अब गिनती के रह गए हैं।
ममता बनर्जी की ओर से यह बयान पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद सामने आया है। विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से बाहर होने के बाद ममता बनर्जी लगातार राज्य की नई सरकार और भाजपा पर राजनीतिक हमला करती रही हैं।
ममता बनर्जी ने कहा- ‘मैं राजनीतिक संन्यास नहीं लूंगी’
ममता बनर्जी ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह राजनीति से संन्यास लेने वाली नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह तब तक नहीं रुकेंगी, जब तक भारतीय जनता पार्टी को राजनीतिक रूप से हाशिये पर नहीं धकेल देतीं।
फेसबुक पर साझा किए गए अपने संदेश में ममता बनर्जी ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के महज चार महीने के भीतर ही लोगों ने भाजपा का असली चेहरा देख लिया है। उनका यह बयान राज्य में नई सरकार के गठन के बाद जारी राजनीतिक टकराव को दर्शाता है।
जनगणना और एनआरसी को लेकर भी ममता का हमला
ममता बनर्जी ने जनगणना की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जनगणना की कवायद राष्ट्रीय नागरिक पंजी यानी एनआरसी लागू करने की एक और ‘पिछले दरवाजे से की गई कोशिश’ है। उन्होंने दावा किया कि इसे राजनीतिक दलों से सलाह किए बिना लागू किया गया।
ममता बनर्जी ने लोगों से जनगणना के फॉर्म पर हस्ताक्षर करने और अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से पहले सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि इसके कारण लोगों की निजी बचत तक खत्म हो सकती है।
लक्ष्मी भंडार और अन्नपूर्णा भंडार पर भी साधा निशाना
पूर्व मुख्यमंत्री ने महिलाओं से जुड़ी योजनाओं को लेकर भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि उनकी सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से लक्ष्मी भंडार योजना शुरू की थी।
उन्होंने दावा किया कि भाजपा अन्नपूर्णा भंडार के तहत पैसा देने में धर्म और जाति को आधार बना रही है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा ने चुनाव से पहले सभी महिलाओं को अन्नपूर्णा योजना का पैसा देने का वादा किया था, लेकिन अब वह अपने वादे से पीछे हट रही है और महिलाओं को धोखा दे रही है।
बंगाल की राजनीति में बढ़ सकता है टकराव
ममता बनर्जी के ताजा बयान से पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने के संकेत मिलते हैं। एक ओर ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पर व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं उन्होंने केंद्र और राज्य की नीतियों से जुड़े कई मुद्दों पर भी भाजपा को घेरा है।
ममता बनर्जी के आरोपों में मुख्य रूप से कथित धमकी, संवैधानिक अधिकार, राजनीतिक स्वतंत्रता, जनगणना और महिलाओं से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया संदेशों के जरिए इन मुद्दों को सार्वजनिक बहस के केंद्र में लाने की कोशिश की है।
अब ममता के आरोपों पर राजनीतिक प्रतिक्रिया पर नजर
ममता बनर्जी के इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और भाजपा की ओर से प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए अपने आरोप और सवाल सार्वजनिक किए हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों से जोड़ते हुए सवाल उठाया है।
ममता बनर्जी ने अपने राजनीतिक रुख को भी स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह पीछे हटने वाली नहीं हैं। उन्होंने भाजपा के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखने की बात कही है और राजनीतिक संन्यास की संभावना से इनकार किया है।
