पांच दशक से ज्यादा लंबे राजनीतिक सफर, संगठन में मजबूत पकड़ और संसद से लेकर सड़क तक विपक्ष की आवाज़ बुलंद करने वाले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक बार फिर राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेकर अपने संसदीय सफर का नया अध्याय शुरू कर दिया। कर्नाटक से लगातार दूसरी बार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए खरगे ने सोमवार को संसद भवन में राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली। इस मौके पर सत्ता और विपक्ष के कई बड़े नेता मौजूद रहे। फिलहाल राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी निभा रहे खरगे का यह शपथ ग्रहण केवल एक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि कांग्रेस की संसदीय राजनीति और विपक्षी रणनीति के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है।राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेते कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे | फोटो: ANI

राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेते कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे | फोटो: ANI

राज्यसभा में फिर मजबूत हुई विपक्ष की आवाज, बड़े नेताओं की मौजूदगी में ली शपथ

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने अपने चैंबर में सदस्यता की शपथ दिलाई। इस दौरान सदन के नेता जेपी नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। यह लगातार दूसरा मौका है जब खरगे कर्नाटक से राज्यसभा पहुंचे हैं। वर्ष 2020 में पहली बार उच्च सदन के सदस्य बनने के बाद उन्हें विपक्ष का नेता चुना गया था और आज भी वह उसी भूमिका में सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने का काम कर रहे हैं। संसद के भीतर उनके अनुभव और शांत लेकिन प्रभावी शैली को विपक्ष की सबसे बड़ी ताकत माना जाता है।

विधानसभा से संसद तक... 53 साल का राजनीतिक सफर

83 वर्षीय मल्लिकार्जुन खरगे भारतीय राजनीति के उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने जमीनी स्तर से अपनी पहचान बनाई। उनका जन्म 21 जुलाई 1942 को कर्नाटक में हुआ था। छात्र राजनीति और सामाजिक आंदोलनों से सक्रिय राजनीति में आए खरगे ने मजदूरों, दलितों और समाज के कमजोर वर्गों की आवाज़ उठाकर अपनी अलग पहचान बनाई। वर्ष 1972 में उन्होंने पहली बार कर्नाटक विधानसभा का चुनाव जीता और उसके बाद लगातार नौ बार विधायक चुने गए। यह अपने आप में एक बड़ी राजनीतिक उपलब्धि मानी जाती है। कर्नाटक सरकार में उन्होंने गृह, परिवहन, राजस्व, ग्रामीण विकास समेत कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 1999 से 2004 तक वे कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे। राज्य की राजनीति में उनका कद लगातार बढ़ता गया और उन्हें कांग्रेस का सबसे भरोसेमंद चेहरा माना जाने लगा।

रेल मंत्री से लेकर कांग्रेस अध्यक्ष तक का सफर

साल 2009 में मल्लिकार्जुन खरगे राष्ट्रीय राजनीति में पहुंचे और कर्नाटक के गुलबर्गा लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए। इसके बाद उन्होंने केंद्र की मनमोहन सिंह सरकार में रेल मंत्री और बाद में श्रम एवं रोजगार मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वर्ष 2014 में कांग्रेस सत्ता से बाहर हुई तो खरगे को लोकसभा में पार्टी का नेता बनाया गया। विपक्ष में रहते हुए उन्होंने कई बड़े राष्ट्रीय मुद्दों पर कांग्रेस की आवाज़ को मजबूती से रखा। वर्ष 2020 में वे पहली बार राज्यसभा पहुंचे और बाद में राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष बने। इसके दो साल बाद, अक्टूबर 2022 में कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में जीत हासिल कर उन्होंने पार्टी के 98वें राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में कमान संभाली। गांधी परिवार के बाहर पूर्णकालिक अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने संगठन को मजबूत करने और विपक्षी दलों को एकजुट करने की दिशा में लगातार काम किया।

नई पारी से कांग्रेस को नई उम्मीद

लगातार दूसरी बार राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद मल्लिकार्जुन खरगे की जिम्मेदारियां और बढ़ गई हैं। एक तरफ उनके कंधों पर कांग्रेस संगठन की कमान है, तो दूसरी ओर राज्यसभा में विपक्ष के नेता के रूप में सरकार को घेरने की अहम भूमिका भी। आगामी संसद सत्रों में महंगाई, बेरोजगारी, सामाजिक न्याय, किसानों के मुद्दे, संविधान और संघीय ढांचे से जुड़े सवालों पर विपक्ष की रणनीति तैयार करने में खरगे की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लंबे राजनीतिक अनुभव, संगठन पर मजबूत पकड़ और संसदीय परंपराओं की गहरी समझ के कारण कांग्रेस को उम्मीद है कि उनकी नई संसदीय पारी पार्टी को राष्ट्रीय राजनीति में और मजबूती देगी। यही वजह है कि उनका शपथ ग्रहण केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि कांग्रेस की भविष्य की राजनीतिक रणनीति का भी अहम संकेत माना जा रहा है।