
प्रताप सरनाईक Source : Chrome
महाराष्ट्र में टैक्सी, ऑटो-रिक्शा और अन्य व्यावसायिक यात्री वाहनों के चालकों के लिए मराठी भाषा को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि 16 अगस्त के बाद ऐसे चालकों पर कार्रवाई शुरू होगी जो मराठी में सामान्य बातचीत करने में सक्षम नहीं होंगे। सरकार का कहना है कि यह कोई नया नियम नहीं है, बल्कि पहले से लागू प्रावधानों को अब सख्ती से लागू किया जाएगा। इस फैसले के बाद जहां मराठी भाषा को बढ़ावा देने की बात हो रही है, वहीं दूसरे राज्यों से आए हजारों चालकों में चिंता भी बढ़ गई है।
मराठी जानना होगा जरूरी
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के अनुसार, राज्य में व्यावसायिक वाहन चलाने वाले ड्राइवरों को यात्रियों से मराठी में सामान्य संवाद करने में सक्षम होना चाहिए। इसी के तहत सभी आरटीओ को चालकों के दस्तावेजों के साथ उनकी भाषा संबंधी बुनियादी जानकारी की भी जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
16 अगस्त से शुरू होगी सख्ती
सरकार ने चालकों को मराठी सीखने के लिए समय दिया है। 16 अगस्त के बाद नियमों का पालन नहीं करने वालों पर चरणबद्ध कार्रवाई की जाएगी। लगातार उल्लंघन की स्थिति में लाइसेंस और परमिट पर भी असर पड़ सकता है।
1989 से लागू है प्रावधान
सरकार का कहना है कि स्थानीय भाषा का बुनियादी ज्ञान रखने की शर्त वर्ष 1989 से ही लागू है। अब इसमें आवश्यक संशोधन कर इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है।
मराठी सीखने का मिलेगा मौका
चालकों के लिए आरटीओ कार्यालयों में प्रशिक्षण शिविर लगाए जाएंगे। भाषा विशेषज्ञों की मदद से 'बेसिक फंक्शनल मराठी' का कोर्स तैयार किया गया है। प्रशिक्षण पूरा करने वालों को प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा।
प्रवासी चालकों की बढ़ी चिंता
दूसरे राज्यों से आए टैक्सी, ऑटो और ऐप-आधारित कैब चालकों का कहना है कि नई सख्ती से उनके रोजगार पर असर पड़ सकता है। वहीं चालक संगठनों ने सरकार से पर्याप्त समय और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की मांग की है।
यात्रियों को क्या होगा फायदा?
सरकार का मानना है कि चालक अगर मराठी में सामान्य बातचीत कर सकेंगे तो स्थानीय यात्रियों को गंतव्य, किराया और अन्य जरूरी जानकारी साझा करने में आसानी होगी। इससे सार्वजनिक परिवहन सेवाओं की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।
इन वाहनों पर लागू होगा नियम
यह नियम ऑटो, टैक्सी, ऐप-आधारित कैब, बाइक टैक्सी और अन्य सभी व्यावसायिक यात्री वाहनों के चालकों पर लागू होगा। इसकी निगरानी राज्य
भर के आरटीओ कार्यालय करेंगे।
