
उद्धव ठाकरे के बयान पर शिंदे गुट का पलटवार।Source : Chrome
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के बीजेपी पर दिए गए विवादित बयान के बाद अब शिंदे गुट ने भी तीखा पलटवार किया है। दरअसल, 28 जून को परभणी में एक कार्यक्रम के दौरान उद्धव ठाकरे ने बीजेपी को "बाबर जनता पार्टी" बताते हुए आरोप लगाया था कि जिस तरह बाबर ने मंदिरों को नुकसान पहुंचाया था, उसी तरह बीजेपी भी मंदिरों को नुकसान पहुंचाने का काम कर रही है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। अब इस पर जवाब देते हुए शिवसेना (शिंदे गुट) के सांसद नरेश म्हस्के ने ठाणे में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर UBT का नया अर्थ "उलेमा बचाव टोली" बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे की राजनीति अब हिंदुत्व से हटकर तुष्टिकरण की ओर बढ़ रही है। इसके साथ ही महाराष्ट्र की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है।
बीजेपी नेताओं ने भी जताई थी आपत्ति
उद्धव ठाकरे के बयान पर बीजेपी के कई नेताओं ने पहले भी कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। पार्टी के नेताओं का कहना था कि इस तरह की भाषा राजनीतिक मर्यादा के अनुरूप नहीं है।बीजेपी विधायक राम कदम ने कहा कि उद्धव ठाकरे को पहले अपने राजनीतिक गठबंधनों पर नजर डालनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ठाकरे उन दलों के साथ सत्ता में रहे, जिन्होंने राम मंदिर निर्माण का विरोध किया था और भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाए थे।राम कदम ने यह भी कहा कि उद्धव ठाकरे के शासनकाल में मंदिरों पर कई तरह की पाबंदियां लगाई गई थीं, जबकि अन्य गतिविधियों को अनुमति दी गई थी। उनके अनुसार, अब राजनीतिक परिस्थितियां बदलने के बाद उद्धव ठाकरे हिंदुत्व की बात कर रहे हैं।
संजय जायसवाल ने भी साधा निशाना
बीजेपी सांसद संजय जायसवाल ने भी उद्धव ठाकरे के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी टिप्पणियों को ज्यादा महत्व देने की जरूरत नहीं है। उनका कहना था कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में उद्धव ठाकरे का प्रभाव पहले जैसा नहीं रहा और उनके कई सहयोगी उनसे अलग हो चुके हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव और हताशा के कारण ही इस तरह के बयान दिए जा रहे हैं।
मनीषा कायंदे ने भी जताई असहमति
शिवसेना की विधान परिषद सदस्य मनीषा कायंदे ने भी उद्धव ठाकरे की टिप्पणी से असहमति जताई। उनका कहना था कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन सार्वजनिक मंचों से ऐसे शब्दों का इस्तेमाल उचित नहीं माना जा सकता।उधर, उद्धव ठाकरे के बयान और उस पर आए जवाबों के बाद महाराष्ट्र में सियासी बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच और भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।
