शरद पवार और एकनाथ शिंदे के संभावित गठबंधन से जुड़ी सांकेतिक तस्वीर। | Source: Chrome

शरद पवार और एकनाथ शिंदे के संभावित गठबंधन से जुड़ी सांकेतिक तस्वीर।Source : Chrome

महाराष्ट्र की सियासत में बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है। सूत्रों के मुताबिक, शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के बीच गठबंधन को लेकर सहमति बन गई है। बताया जा रहा है कि शरद पवार का गुट सीधे महायुति या एनडीए में विलय नहीं करेगा, बल्कि शिंदे गुट के साथ मिलकर चुनावी रणनीति पर काम करेगा।

शिंदे गुट के साथ चुनावी तालमेल की तैयारी

सूत्रों के अनुसार, एनसीपी (एसपी) और शिवसेना (शिंदे) के बीच गठबंधन का खाका तैयार किया गया है। इस व्यवस्था के तहत शरद पवार का दल अपनी अलग पहचान बनाए रखेगा, जबकि चुनावों में शिंदे गुट के साथ मिलकर महायुति का हिस्सा बनेगा। इससे महाविकास अघाड़ी (एमवीए) को बड़ा झटका माना जा रहा है।

जयंत पाटील की बैठकों से तेज हुई चर्चाएं

हाल के दिनों में एनसीपी (एसपी) नेता जयंत पाटील की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात के बाद राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गई हैं। इसके अलावा जितेंद्र आव्हाड की शिंदे से मुलाकात को भी संभावित गठबंधन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

एनसीपी के दोनों गुटों का विलय क्यों नहीं हुआ?

शुरुआत में भाजपा की ओर से शरद पवार और अजित पवार के गुटों को फिर से एकजुट करने का सुझाव दिया गया था। हालांकि दोनों पक्ष इस प्रस्ताव पर सहमत नहीं हुए। एक ओर अजित पवार गुट नेतृत्व और संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर तैयार नहीं था, वहीं शरद पवार गुट का मानना था कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के लिए यह व्यवस्था स्वीकार करना आसान नहीं होगा। इसी कारण दोनों गुटों के विलय का रास्ता नहीं बन सका।

गठबंधन के लिए तय किया गया नया फॉर्मूला

सूत्रों के मुताबिक, सीट बंटवारे को लेकर भविष्य में किसी तरह का विवाद न हो, इसके लिए नया फॉर्मूला तैयार किया गया है। इसके तहत शरद पवार गुट और शिंदे गुट आपसी सहमति से सीटों का बंटवारा करेंगे और अपने-अपने मजबूत क्षेत्रों में उम्मीदवार उतारेंगे। दोनों दल अलग संगठन बनाए रखते हुए चुनाव में सहयोग करेंगे।

परिसीमन बिल को लेकर भी चर्चा

सूत्रों का दावा है कि गठबंधन की बातचीत के दौरान परिसीमन विधेयक को समर्थन देने का मुद्दा भी सामने आया। हालांकि इस पर किसी भी दल की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना

यदि यह गठबंधन औपचारिक रूप लेता है, तो महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इससे महाविकास अघाड़ी की रणनीति प्रभावित हो सकती है, जबकि महायुति को आगामी चुनावों में अतिरिक्त राजनीतिक मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है।