बिहार में एक बार फिर बड़ा IAS reshuffle देखने को मिला है, जिसने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। नीतीश कुमार की सरकार ने कई वरिष्ठ IAS अधिकारियों के तबादले किए हैं, जिनमें सबसे ज्यादा चर्चा बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) के अध्यक्ष आनंद किशोर को लेकर हो रही है। करीब एक दशक तक बोर्ड को संभालने वाले और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए जाने जाने वाले आनंद किशोर को अचानक इस पद से हटाए जाने के बाद कई तरह के सवाल उठने लगे हैं क्या यह सिर्फ routine transfer है या इसके पीछे कोई बड़ी प्रशासनिक रणनीति?आनंद किशोर

आनंद किशोर

BSEB में 10 साल का मजबूत कार्यकाल: “Reform Man” की पहचान

आनंद किशोर को बिहार बोर्ड की जिम्मेदारी उस समय दी गई थी जब संस्था पेपर लीक, देरी से रिजल्ट और नकल जैसी समस्याओं से जूझ रही थी। अपने लंबे कार्यकाल में उन्होंने बोर्ड की छवि बदलने की कोशिश की और परीक्षा प्रणाली को डिजिटल और तेज बनाने पर फोकस किया।

उनके नेतृत्व में बिहार बोर्ड ने देश में सबसे पहले इंटर और मैट्रिक रिजल्ट घोषित करने का रिकॉर्ड बनाया और कई बार पारदर्शी परीक्षा मॉडल के लिए चर्चा में रहा। इसी वजह से उन्हें प्रशासनिक गलियारों में “टर्नअराउंड अफसर” भी कहा जाने लगा।

अचानक हटाने के पीछे क्या वजह?

सरकारी आदेश में उनके हटाने का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है। हाल ही में हुए बड़े प्रशासनिक फेरबदल में उन्हें BSEB अध्यक्ष पद से हटाया गया है, जो एक व्यापक IAS reshuffle का हिस्सा माना जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, यह बदलाव प्रशासनिक रोटेशन और विभागीय पुनर्गठन का हिस्सा हो सकता है, जिसके तहत लंबे समय से एक ही पद पर तैनात अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली जा रही हैं। वहीं कुछ जानकार इसे सरकार की नई शिक्षा प्रशासनिक संरचना की तैयारी से भी जोड़कर देख रहे हैं।

आगे क्या? नया चेहरा कौन संभालेगा BSEB?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिहार बोर्ड की कमान किसे दी जाएगी। फिलहाल सरकार ने किसी नए अध्यक्ष का नाम घोषित नहीं किया है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में बोर्ड की कार्यशैली और परीक्षा प्रणाली में कुछ नए बदलाव देखने को मिल सकते हैं।