पटना। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के परीक्षा नियंत्रक और 2014 बैच के आईएएस अधिकारी राजेश कुमार सिंह को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर निलंबित कर दिया गया है। सोमवार को आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान दिए गए उनके एक बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। इसके बाद मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में आया और उन्होंने सामान्य प्रशासन विभाग को तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद परीक्षा नियंत्रक के निलंबन की कार्रवाई की गई।
TRE-4 की जानकारी देने के लिए बुलाई गई थी प्रेस वार्ता
बीपीएससी के परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह ने सोमवार को अपने कार्यालय में प्रेस वार्ता आयोजित की थी। इस प्रेस वार्ता का उद्देश्य शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-4 से जुड़ी जानकारी मीडिया के सामने रखना था। उन्होंने परीक्षा से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी दी और पत्रकारों के सवालों का जवाब भी दिया।
प्रेस वार्ता के अंत में मीडिया की ओर से पूछे गए एक सवाल के जवाब में राजेश कुमार सिंह ने ‘हाथी चले बाजार, कुत्ते भौंके हजार’ कहावत का उल्लेख किया। उनका यह बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित होने लगा और इसे लेकर विवाद खड़ा हो गया।
बयान वायरल होते ही सरकार ने लिया संज्ञान
राजेश कुमार सिंह का बयान सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला बिहार सरकार तक पहुंचा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के संज्ञान में जब संबंधित वीडियो पहुंचा तो उन्होंने मामले को गंभीरता से लिया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने सामान्य प्रशासन विभाग को परीक्षा नियंत्रक के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद राजेश कुमार सिंह को बीपीएससी परीक्षा नियंत्रक के पद से निलंबित कर दिया गया। सरकार की इस कार्रवाई के बाद यह मामला बिहार की प्रशासनिक और राजनीतिक गतिविधियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
किस संदर्भ में कही गई थी ‘हाथी-कुत्ता’ वाली कहावत?
प्रेस वार्ता के दौरान राजेश कुमार सिंह बीपीएससी को लेकर फैलाई जा रही कथित भ्रांतियों पर जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा था कि आयोग के संबंध में भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं और पहले भी अदालत में लगाए गए सभी आरोप निराधार साबित हुए हैं।
उन्होंने यह भी कहा था कि ऐसे लोगों के खिलाफ अदालत में शिकायत करना आयोग का काम नहीं है। इसी संदर्भ में उन्होंने ‘हाथी चले बाजार, कुत्ते भौंके हजार’ वाली कहावत का उल्लेख किया। उनके इस कथन के बाद टीआरई-4 में एकल परीक्षा की मांग कर रहे आंदोलनकारी शिक्षक अभ्यर्थियों में नाराजगी देखने को मिली।
सोशल मीडिया पर विवाद बढ़ने के बाद दी सफाई
बयान वायरल होने के बाद राजेश कुमार सिंह ने अपनी ओर से सफाई भी पेश की। उन्होंने वीडियो बयान जारी कर अपने कथन पर खेद जताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने यह कहावत एक खास संदर्भ में कही थी और उनका उद्देश्य किसी को चोट पहुंचाना नहीं था।
राजेश कुमार सिंह ने यह भी कहा कि यदि उनके बयान से किसी को ठेस पहुंची है तो वह इसके लिए माफी मांगते हैं। हालांकि, उनकी ओर से सफाई और खेद जताए जाने के बावजूद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर उनके निलंबन की कार्रवाई की गई।
शिक्षक अभ्यर्थियों की मांगों के बीच आया बयान
यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब TRE-4 को लेकर शिक्षक अभ्यर्थियों के बीच कई मुद्दों पर चर्चा और आंदोलन चल रहा है। एकल परीक्षा की मांग कर रहे आंदोलनकारी शिक्षक अभ्यर्थियों ने परीक्षा नियंत्रक के बयान पर नाराजगी जताई।
बीपीएससी की ओर से TRE-4 परीक्षा से संबंधित जानकारी देने के लिए बुलाई गई प्रेस वार्ता में परीक्षा नियंत्रक ने अभ्यर्थियों से जुड़े सवालों का जवाब दिया था। इसी दौरान कही गई कहावत बाद में विवाद का केंद्र बन गई।
कौन हैं IAS राजेश कुमार सिंह?
राजेश कुमार सिंह 2014 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने यूपीएससी की वर्ष 2014 की परीक्षा पास करने के बाद बिहार कैडर में सेवा देने का निर्णय लिया था। प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्होंने बिहार के विभिन्न पदों पर जिम्मेदारी संभाली।
राजेश कुमार सिंह ने 20 अक्टूबर 2024 तक बिहार लोक सेवा आयोग में अतिरिक्त सचिव के पद पर काम किया। इसके बाद उन्हें बीपीएससी का परीक्षा नियंत्रक बनाया गया। परीक्षा नियंत्रक के रूप में वह आयोग की परीक्षाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे थे।
तेज-तर्रार अधिकारी के रूप में रही पहचान
राजेश कुमार सिंह की गिनती बिहार के तेज-तर्रार अधिकारियों में की जाती है। बीपीएससी में अतिरिक्त सचिव के रूप में कार्य करने के बाद उन्हें परीक्षा नियंत्रक की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस पद पर रहते हुए वह आयोग की परीक्षाओं और उनसे जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे।
अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश के बाद उनका निलंबन प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। कार्रवाई की वजह सोमवार की प्रेस वार्ता में दिया गया वह बयान है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद बढ़ी कार्रवाई की चर्चा
बयान के वायरल होने के बाद मुख्यमंत्री स्तर से सीधे संज्ञान लिए जाने और सामान्य प्रशासन विभाग को कार्रवाई का निर्देश दिए जाने से मामले की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। राजेश कुमार सिंह की ओर से स्पष्टीकरण और माफी मांगे जाने के बावजूद निलंबन की कार्रवाई की गई।
इस पूरे घटनाक्रम ने बीपीएससी की प्रेस वार्ता, TRE-4 परीक्षा और परीक्षा नियंत्रक के बयान को एक साथ चर्चा में ला दिया है। अब राजेश कुमार सिंह के निलंबन के बाद आयोग की प्रशासनिक व्यवस्था में आगे क्या बदलाव होंगे, इस पर भी नजर रहेगी।
