हरियाणा में चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) के बाद वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट जारी कर दिया है। इस प्रक्रिया के दौरान करीब 34 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। आयोग का कहना है कि यह कदम मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए उठाया गया है।


चुनाव आयोग के अनुसार, मतदाता सूची की समीक्षा के दौरान ऐसे नाम हटाए गए हैं जो दोहराए गए थे, जिनके धारक अब जीवित नहीं हैं, दूसरे स्थान पर स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके हैं या अन्य कारणों से पात्र नहीं पाए गए। आयोग का कहना है कि यह एक नियमित और कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य केवल पात्र मतदाताओं के नाम सूची में बनाए रखना है।


ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद अब नागरिकों को अपने नाम की जांच करने का अवसर मिलेगा। यदि किसी व्यक्ति का नाम गलती से हट गया है या सूची में कोई त्रुटि है, तो वह निर्धारित समय सीमा के भीतर दावा या आपत्ति दर्ज करा सकता है। इसके बाद चुनाव आयोग सभी दावों और आपत्तियों की जांच करेगा और फिर अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।


चुनाव आयोग ने लोगों से अपील की है कि वे जल्द से जल्द अपने नाम की जांच करें। आयोग ने कहा कि यदि किसी योग्य मतदाता का नाम सूची में नहीं है, तो उसे घबराने की जरूरत नहीं है। तय प्रक्रिया के तहत आवेदन देकर नाम दोबारा जुड़वाया जा सकता है।


इस बीच विपक्षी दलों ने इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलती से सूची से बाहर न हो। वहीं, सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था है और वह नियमों के अनुसार ही काम कर रहा है।


राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची का सही होना बेहद जरूरी है। यदि सूची में त्रुटियां रह जाती हैं, तो इसका असर मतदान प्रक्रिया पर पड़ सकता है। इसलिए मतदाताओं को अपने नाम की जांच समय रहते कर लेनी चाहिए।


विशेषज्ञों का कहना है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का उद्देश्य किसी भी व्यक्ति का मतदान अधिकार छीनना नहीं, बल्कि मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना है। इसी कारण ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद दावा और आपत्ति दर्ज कराने की व्यवस्था भी रखी जाती है।


फिलहाल चुनाव आयोग की ओर से जारी ड्राफ्ट सूची सार्वजनिक कर दी गई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि दावा और आपत्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम मतदाता सूची में कितना बदलाव होता है। यदि आपका नाम मतदाता सूची में नहीं दिख रहा है, तो समय रहते संबंधित निर्वाचन कार्यालय या चुनाव आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से आवेदन कर

ना जरूरी होगा।