कर्नाटक। जिंदगी में बड़े काम करने के लिए हमेशा बड़ी दौलत या ऊंची पढ़ाई की जरूरत नहीं होती। अगर इरादे मजबूत हों और समाज के लिए कुछ करने का जज्बा हो, तो एक साधारण इंसान भी लाखों लोगों के लिए मिसाल बन सकता है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है कर्नाटक के हरेकला हजब्बा की, जिन्हें समाज के लिए उनके योगदान के कारण भारत सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया।

हरेकला हजब्बा का जीवन बेहद साधारण रहा। उन्होंने वर्षों तक सड़क किनारे संतरे बेचकर अपने परिवार का पालन-पोषण किया। सीमित आमदनी होने के बावजूद उनके मन में हमेशा एक सपना था कि उनके गांव के बच्चे पढ़-लिखकर बेहतर भविष्य बना सकें। यही सपना धीरे-धीरे उनके जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य बन गया।

कहा जाता है कि एक दिन कुछ विदेशी पर्यटकों ने उनसे अंग्रेजी में संतरे का दाम पूछा। हजब्बा अंग्रेजी नहीं जानते थे, इसलिए वह जवाब नहीं दे पाए। इस छोटी-सी घटना ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया। उन्हें एहसास हुआ कि शिक्षा की कमी इंसान के आत्मविश्वास को कितना प्रभावित कर सकती है। उसी दिन उन्होंने तय किया कि उनके गांव के बच्चों को शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए।

इसके बाद उन्होंने अपनी कमाई का एक-एक रुपया बचाना शुरू किया। कई सालों की मेहनत और बचत के बाद उन्होंने अपने गांव में स्कूल बनवाने का संकल्प पूरा किया। शुरुआत आसान नहीं थी। पैसों की कमी थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। गांव के लोगों और प्रशासन का सहयोग मिला और आखिरकार स्कूल की शुरुआत हो गई।

आज उस स्कूल में सैकड़ों बच्चे पढ़ाई कर चुके हैं। जिन बच्चों को कभी शिक्षा का अवसर नहीं मिलता था, वे अब पढ़-लिखकर अपने सपनों को पूरा कर रहे हैं। हरेकला हजब्बा का मानना है कि किसी भी समाज को बदलने का सबसे मजबूत माध्यम शिक्षा है।

उनकी निस्वार्थ सेवा और समाज के लिए किए गए इस काम को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2020 में उन्हें पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया। यह सम्मान सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद समाज में बदलाव लाने का सपना देखते हैं।

आज हरेकला हजब्बा देशभर के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उनका जीवन यह सिखाता है कि इंसान की पहचान उसकी संपत्ति से नहीं, बल्कि उसके अच्छे कामों से होती है। एक फल बेचने वाला व्यक्ति भी अगर ठान ले, तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बदल सकता है।

हरेकला हजब्बा की कहानी हमें यह संदेश देती है कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़ा बदलाव ला सकते हैं। अगर हर व्यक्ति अपने समाज के लिए थोड़ा-सा योगदान दे, तो देश की तस्वीर बदल सकती है। यही कारण है कि उनकी यात्रा फल बेचने वाले एक साधारण इंसान से पद्मश्री सम्मान तक आज लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।