गर्मी बढ़ते ही सबसे पहले असर पेट पर दिखने लगता है। कभी गैस, कभी कब्ज, कभी अपच तो कभी पेट दर्द और दस्त जैसी समस्याएं लोगों को परेशान करने लगती हैं। ऐसे मौसम में लोग ठंडक पाने के लिए कई तरह के ड्रिंक्स पीते हैं, लेकिन भारतीय घरों और आयुर्वेद में एक ऐसा देसी फल सालों से भरोसे का हिस्सा रहा है, जिसे पेट का प्राकृतिक रक्षक माना जाता है बेल।

ग्रामीण इलाकों में आज भी जब किसी का पेट खराब होता है या लू लगने का डर होता है, तो सबसे पहले बेल का शरबत याद किया जाता है। यही वजह है कि गर्मियों में सड़क किनारे से लेकर घरों तक बेल का इस्तेमाल खूब बढ़ जाता है।

क्यों खास माना जाता है बेल?

आयुर्वेद में बेल को पाचन तंत्र के लिए बेहद फायदेमंद माना गया है। माना जाता है कि यह पेट को ठंडक देने के साथ पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करता है। बेल में फाइबर की मात्रा अच्छी होती है, जो कब्ज और पेट फूलने जैसी दिक्कतों में राहत पहुंचा सकती है।

पके बेल का सेवन जहां पेट को साफ रखने और शरीर को ठंडा रखने में मददगार माना जाता है, वहीं कच्चा बेल दस्त और पेट खराब होने की समस्या में उपयोग किया जाता रहा है। कई लोग इसका पाउडर बनाकर भी इस्तेमाल करते हैं।

गैस, अपच और एसिडिटी में कैसे मदद करता है?

गर्मी के मौसम में बाहर का खाना, कम पानी पीना और अनियमित खानपान पेट की दिक्कतें बढ़ा देता है। ऐसे में बेल का सेवन पेट को शांत रखने में मदद कर सकता है। माना जाता है कि यह आंतों को मजबूत करने और पाचन को संतुलित रखने में सहायक होता है।

इसी वजह से बाजार में बेल कैंडी और बेल मुरब्बा भी काफी पसंद किए जाते हैं। बेल कैंडी छोटे-छोटे मीठे टुकड़ों के रूप में तैयार की जाती है, जिन्हें लोग सफर या गर्मी के दिनों में खाते हैं। वहीं बेल मुरब्बा पारंपरिक तरीके से बनाया जाता है और इसे पेट के लिए हल्का और फायदेमंद माना जाता है।

शरीर को अंदर से ठंडा रखने में भी मददगार

बेल सिर्फ पेट तक सीमित नहीं है। गर्मियों में शरीर में पानी की कमी और थकान भी बड़ी समस्या बन जाती है। बेल में विटामिन A, B और C के साथ आयरन और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देने और कमजोरी कम करने में मदद कर सकते हैं।

गांवों में लोग लू से बचने के लिए दोपहर में बेल का शरबत पीना पसंद करते हैं। माना जाता है कि यह शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है और गर्मी के असर को कम कर सकता है।

बेल का शरबत क्यों है इतना लोकप्रिय?

गर्मियों में बेल का शरबत सबसे ज्यादा पिया जाता है। बेल का शरबत बनाने के लिए सबसे पहले पके हुए बेल को तोड़कर उसका गूदा निकाल लें। अब इसमें 3-4 गिलास पानी मिलाकर अच्छी तरह मसलें और छलनी से छान लें। फिर स्वादानुसार गुड़ या शहद मिलाएं। चाहें तो काला नमक और भुना जीरा भी डाल सकते हैं। इसके बाद बर्फ मिलाकर ठंडा ठंडा सर्व करें। गर्मियों में यह शरबत पेट को राहत देने और शरीर को ठंडक पहुंचाने में मददगार माना जाता है।

आयुर्वेद विशेषज्ञों के मुताबिक सुबह या दोपहर के समय बेल का सेवन ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। हालांकि जरूरत से ज्यादा सेवन से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि अधिक मात्रा कुछ लोगों में कब्ज की समस्या बढ़ा सकती है।

किन लोगों को बरतनी चाहिए सावधानी?

अगर किसी को पहले से डायबिटीज, पेट से जुड़ी गंभीर बीमारी या कोई पुरानी स्वास्थ्य समस्या है, तो बेल को नियमित डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर माना जाता है। साथ ही बाजार में मिलने वाले अत्यधिक मीठे बेल ड्रिंक्स से भी सावधानी बरतनी चाहिए।

देसी फल, जिस पर आज भी कायम है भरोसा

महंगे हेल्थ ड्रिंक्स और सप्लीमेंट्स के दौर में भी बेल आज लोगों के लिए एक भरोसेमंद देसी विकल्प बना हुआ है। यही कारण है कि हर गर्मी में यह फल फिर से लोगों की थाली और रसोई में अपनी जगह बना लेता है। पेट को आराम देने से लेकर शरीर को ठंडक पहुंचाने तक, बेल को आज भी भारतीय परंपरा में गर्मियों का खास साथी माना जाता है।