मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और इज़राइल–अमेरिका के संयुक्त हमलों के बीच एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है। जिन दिनों ईरान पर बड़े सैन्य हमले हो रहे थे, उन्हीं दिनों एक गुप्त राजनीतिक प्लान पर भी चर्चा चल रही थी एक ऐसा प्लान जिसमें ईरान की सत्ता किसी कट्टरपंथी नेता के हाथ में सौंपने की संभावना तक जोड़ी गई। दावा यह भी है कि इस नाम को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की विशेष दिलचस्पी थी।
इज़राइल के हमले में जिस कट्टरपंथी नेता का नाम चर्चा में आया, उसे लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में रिपोर्टें आईं कि अमेरिका और इज़राइल ने ईरान में संभावित सत्ता परिवर्तन की रणनीति पर विचार किया था। यह वही समय था जब हवाई हमलों में ईरान की टॉप सैन्य और राजनीतिक लेयर को भारी नुकसान पहुँचा और देश में नेतृत्व का संकट गहराया।
इसी सत्ता-शून्य स्थिति में एक नाम सामने आया पूर्व ईरानी राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद। कुछ अमेरिकी रणनीतिकारों और इज़राइली हलकों में यह धारणा थी कि अहमदीनेजाद जैसे नेता को ट्रांज़िशनल पावर सेंटर बनाया जा सकता है। वजह यह कि वे कट्टर रुख के बावजूद सिस्टम को भीतर से जानते हैं, और सत्ता परिवर्तन के दौर में कंट्रोल्ड हार्डलाइनर की भूमिका निभा सकते थे।
यही वह बिंदु है जहाँ ट्रंप का नाम जुड़ता है। अमेरिकी मीडिया में छपे दावों के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप और उनके कुछ सलाहकार इस विचार पर चर्चा कर चुके थे कि ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व पर हुए हमलों के बाद सत्ता को किस दिशा में मोड़ा जा सकता है और इस चर्चा में अहमदीनेजाद का नाम सामने आया।
हालाँकि यह योजना कभी औपचारिक रूप नहीं ले सकी, न ही सार्वजनिक स्वीकार्यता मिली। लेकिन इज़राइल द्वारा हालिया हमले में अहमदीनेजाद का नाम निशाने या योजना के तौर पर सामने आना इस पूरे मामले को फिर से सुर्खियों में ले आया है। विश्लेषक मानते हैं कि यदि यह प्लान सच था, तो यह मध्य-पूर्व की राजनीति में एक बड़े भूचाल जैसा कदम होता।क्षेत्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे किसी भी सत्ता परिवर्तन अभियान से ईरान न सिर्फ और अस्थिर होता, बल्कि पूरा मध्य-पूर्व हिंसा और टकराव के नए चक्र में फँस सकता था।
