काठमांडू/नुवाकोट। नेपाल में हाल के दिनों में आई विनाशकारी बाढ़ ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है। तेज बहाव के साथ आया पानी अपने साथ मिट्टी, बड़े-बड़े पत्थर और मलबा लेकर आगे बढ़ा, जिससे कई मकान और अन्य ढांचे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। इसी बीच नुवाकोट जिले का करीब 35 से 40 साल पुराना एक मकान चर्चा का केंद्र बन गया है। बाढ़ की तेज धारा के बीच आसपास की कई संरचनाएं प्रभावित हुईं, लेकिन यह मकान काफी हद तक मजबूती के साथ खड़ा रहा।
बाढ़ के बीच मकान की मजबूती ने चौंकाया
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में इस मकान को बाढ़ के तेज बहाव के बीच खड़ा देखा गया। इसके बाद लोग यह जानने में दिलचस्पी लेने लगे कि आखिर इतनी भीषण बाढ़ के बावजूद यह घर कैसे बच गया। मकान के मालिक प्रकाश प्याकुरेल ने बताया कि यह घर करीब 35 से 40 साल पुराना है और इसे बनाते समय मजबूती का खास ध्यान रखा गया था।
प्रकाश प्याकुरेल के मुताबिक, जिस समय यह मकान बनाया गया था, उस दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले सीमेंट और लोहे की छड़ों की गुणवत्ता अच्छी थी। उन्होंने कहा कि घर के निर्माण में काफी पैसा खर्च किया गया था। चूंकि मकान नदी के किनारे बनाया गया था, इसलिए इसके नीचे भी मजबूत लोहे की छड़ें डलवाई गई थीं।
बाढ़ आने की सूचना मिलते ही घर पहुंचे प्रकाश
प्रकाश प्याकुरेल ने बताया कि जिस समय बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ रहा था, उस समय वह अपनी दुकान पर थे। जैसे ही उन्हें बाढ़ आने की सूचना मिली, वह तुरंत अपने घर की ओर दौड़े। उस समय घर में उनके परिवार के पांच लोगों के अलावा एक पड़ोसी भी मौजूद था। इस तरह कुल छह लोग बाढ़ के बीच मकान में फंस गए थे।
हालात बिगड़ने के बाद सभी लोग मकान की चौथी मंजिल पर चले गए। लेकिन पानी लगातार बढ़ता रहा और चौथी मंजिल तक भी पहुंचने लगा। इसके बाद परिवार के सभी लोग मकान के सबसे ऊपरी हिस्से में चले गए और वहीं रहकर पानी कम होने का इंतजार करने लगे।
डेढ़ से दो घंटे तक मौत के साये में रहा परिवार
प्रकाश ने बताया कि करीब डेढ़ से दो घंटे बाद जब बाढ़ का पानी कुछ कम हुआ, तब पाइप की मदद से परिवार के लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। उस समय की स्थिति को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा लग रहा था कि यह उनकी जिंदगी का आखिरी समय है।
प्रकाश के मुताबिक, उस भयावह स्थिति में उन्हें अपने बेटे की सबसे ज्यादा चिंता हो रही थी। उनका बेटा उस समय स्कूल गया हुआ था। तेज बाढ़ के बीच घर में फंसे परिवार के लिए यह समय बेहद डरावना था और उन्हें अपनी जिंदगी खत्म होने का डर सताने लगा था।
‘घर के नीचे भी मजबूत राड डलवाए थे’
प्रकाश प्याकुरेल ने अपने घर के निर्माण के बारे में बताते हुए कहा, “यह पुराना घर है, करीब 35-40 साल पुराना होगा। उस टाइम सीमेंट और राड की क्वालिटी काफी अच्छी थी। इस घर को बनाने में काफी खर्चा किया था। यह घर रीवर साइट पर बनाया गया था। इसलिए इसके नीचे भी मजबूत राड डलवाए थे।”
उन्होंने कहा कि घर वास्तव में काफी मजबूत बनाया गया था। नदी के किनारे होने के कारण निर्माण के समय नींव और नीचे के हिस्से को मजबूत रखने पर विशेष ध्यान दिया गया था। यही वजह है कि बाढ़ के दौरान तेज पानी और मलबे के दबाव के बावजूद मकान काफी हद तक खड़ा रहा।
मकान में बना था गोदाम, सामान को हुआ भारी नुकसान
यह मकान केवल रहने के लिए ही इस्तेमाल नहीं किया जाता था। प्रकाश ने बताया कि इसी मकान में उनकी दुकान का सामान रखने के लिए गोदाम भी था। बाढ़ के कारण गोदाम में रखा सामान प्रभावित हुआ और उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ा।
उन्होंने कहा कि बाढ़ में उनका काफी नुकसान हुआ है और अब वह इस नुकसान से उबरने की कोशिश कर रहे हैं। यानी मकान का ढांचा भले ही काफी हद तक सुरक्षित रहा, लेकिन बाढ़ ने उनके कारोबार और सामान को नुकसान पहुंचाया है।
आखिर कैसे बच गया 40 साल पुराना मकान?
बाढ़ के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब आसपास कई इमारतें और ढांचे बाढ़ के तेज बहाव की चपेट में आ गए, तो यह मकान कैसे बचा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसकी मजबूती के पीछे इसके निर्माण की गुणवत्ता और संरचना महत्वपूर्ण कारण हो सकते हैं।
इंजीनियरिंग के नजरिए से मजबूत आरसीसी ढांचा किसी भवन को तेज पानी और मलबे से उत्पन्न दबाव का सामना करने में मदद कर सकता है। आरसीसी यानी प्रबलित सीमेंट कंक्रीट संरचना में कंक्रीट के साथ स्टील का इस्तेमाल किया जाता है। भवन के स्तंभ, बीम और नींव यदि मजबूत तरीके से जुड़े हों, तो संरचना पर पड़ने वाले दबाव को संभालने की क्षमता बेहतर हो सकती है।
मकान की जगह और पानी के बहाव ने भी निभाई भूमिका
इस मकान के बचने में इसकी स्थिति भी महत्वपूर्ण रही हो सकती है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, बाढ़ की सबसे तेज धारा सीधे मकान के बीच से नहीं टकराई, बल्कि पानी का एक हिस्सा उसके आसपास से होकर निकल गया। इससे मकान पर सीधे पड़ने वाला दबाव कम रहा होगा।
मकान की कॉम्पैक्ट बनावट और मजबूत ढांचा भी उसके टिके रहने में सहायक रहे होंगे। हालांकि किसी खास भवन के बाढ़ में सुरक्षित रहने के कारणों का अंतिम निष्कर्ष विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।
तबाही के बीच मजबूती की मिसाल बना घर
नेपाल की विनाशकारी बाढ़ ने नुवाकोट समेत कई इलाकों में लोगों और संपत्तियों को प्रभावित किया है। इसी बीच प्रकाश प्याकुरेल का करीब 35 से 40 साल पुराना मकान अपनी मजबूती के कारण लोगों का ध्यान खींच रहा है। मकान मालिक के अनुसार, निर्माण के समय अच्छी गुणवत्ता वाले सीमेंट और लोहे की छड़ों का इस्तेमाल किया गया था और नदी के किनारे होने के कारण नीचे भी मजबूत लोहे की छड़ें डलवाई गई थीं।
प्रकाश और उनके परिवार के लिए यह मकान बाढ़ के उस भयावह दौर में सबसे बड़ा सहारा बना। जब पानी बढ़कर चौथी मंजिल तक पहुंच गया, तब परिवार को सबसे ऊपरी हिस्से में जाकर शरण लेनी पड़ी। करीब डेढ़ से दो घंटे बाद पानी कम होने पर पाइप की मदद से सभी छह लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
