erer | Source: ereNEET UG 2026 का परिणाम जारी होने के बाद अब लाखों छात्र-छात्राओं की नजर मेडिकल कॉलेज में दाखिले पर है। इस वर्ष देशभर के 823 मेडिकल कॉलेजों में कुल 1,36,939 एमबीबीएस सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा। हालांकि केवल अच्छा स्कोर या बेहतर रैंक हासिल करना ही मेडिकल सीट की गारंटी नहीं है। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) की काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान यदि उम्मीदवार ने कोई छोटी-सी गलती कर दी, तो उसकी पसंदीदा मेडिकल सीट हाथ से निकल सकती है।

अगस्त में शुरू हो सकती है NEET UG Counselling 2026

मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) द्वारा NEET UG 2026 काउंसलिंग प्रक्रिया अगस्त महीने में शुरू किए जाने की संभावना है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा जारी री-NEET UG परिणाम के आधार पर सरकारी, निजी और डीम्ड मेडिकल कॉलेजों में स्नातक मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जाएगा। ऐसे में उम्मीदवारों के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया को पूरी गंभीरता से समझना बेहद जरूरी है।

केवल अच्छा स्कोर पर्याप्त नहीं

विशेषज्ञों के अनुसार, NEET में अच्छा स्कोर प्राप्त करने के बाद भी सीधे मेडिकल कॉलेज में प्रवेश नहीं मिलता। सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के निर्देशों के अनुसार कोई भी मेडिकल कॉलेज किसी छात्र को सीधे प्रवेश नहीं दे सकता। सभी उम्मीदवारों को निर्धारित काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग लेना और उसके सभी नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है।

क्या होती है NEET UG काउंसलिंग प्रक्रिया?

मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए उम्मीदवारों को सबसे पहले MCC की आधिकारिक वेबसाइट mcc.nic.in पर ऑनलाइन पंजीकरण करना होता है। इसके बाद निर्धारित शुल्क और सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करना होता है। फिर उम्मीदवार अपनी पसंद के मेडिकल कॉलेज और पाठ्यक्रम का चयन करते हैं, जिसे चॉइस फिलिंग और चॉइस लॉकिंग कहा जाता है। इसके आधार पर सीट आवंटन किया जाता है। सीट मिलने के बाद उम्मीदवार को संबंधित कॉलेज में समय पर रिपोर्टिंग कर दस्तावेजों का सत्यापन कराना होता है। इसके बाद प्रवेश शुल्क जमा कर सीट सुनिश्चित की जाती है। यदि उम्मीदवार सीट से संतुष्ट नहीं होता, तो उसे अगले चरण में अपग्रेडेशन का विकल्प भी मिलता है।

12वीं के अंकों का भी रखा जाता है ध्यान

काउंसलिंग के दौरान केवल NEET स्कोर ही नहीं, बल्कि 12वीं कक्षा में प्राप्त अंकों की भी जांच की जाती है। सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान में कम से कम 50 प्रतिशत अंक, जबकि एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 40 प्रतिशत अंक होना आवश्यक है।

काउंसलिंग के लिए रखें ये जरूरी दस्तावेज

काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों को NEET 2026 का एडमिट कार्ड, स्कोरकार्ड या रैंक लेटर, 10वीं और 12वीं की अंकसूची, आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट या मतदाता पहचान पत्र जैसे फोटो पहचान पत्र, चार पासपोर्ट आकार के फोटो, लागू होने पर जाति प्रमाण पत्र, दिव्यांगता प्रमाण पत्र तथा एनआरआई उम्मीदवारों के लिए आवश्यक दस्तावेज और स्पॉन्सरशिप शपथ पत्र सहित अन्य जरूरी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने होंगे।

ये 7 गलतियां आपकी मेडिकल सीट छीन सकती हैं

1. केवल पसंदीदा कॉलेज चुनना

कई छात्र केवल प्रतिष्ठित या शीर्ष मेडिकल कॉलेजों को ही विकल्प में भरते हैं। इससे सीट मिलने की संभावना कम हो सकती है। उम्मीदवारों को अपनी रैंक और सीट मिलने की संभावना के अनुसार संतुलित विकल्प भरने चाहिए।

2. चॉइस लॉक करना भूल जाना

चॉइस फिलिंग के बाद निर्धारित समय के भीतर चॉइस लॉक करना बेहद जरूरी है। समय सीमा समाप्त होने पर पोर्टल पर सेव की गई चॉइस ही अंतिम मानी जाती है। अंतिम समय में सर्वर की समस्या से बचने के लिए पहले ही चॉइस लॉक कर देना बेहतर माना जाता है।

3. कॉलेज की फीस और बॉन्ड की जानकारी न लेना

कई उम्मीदवार प्रवेश से पहले कॉलेज की वार्षिक फीस, हॉस्टल शुल्क, सिक्योरिटी डिपॉजिट, बॉन्ड अवधि, बॉन्ड पेनाल्टी और स्टाइपेंड जैसी जानकारियों पर ध्यान नहीं देते। बाद में यही जानकारी उनके लिए परेशानी का कारण बन सकती है।

4. गलत श्रेणी का दावा करना

जल्दबाजी में कई अभ्यर्थी ईडब्ल्यूएस, एससी, एसटी, ओबीसी या दिव्यांग श्रेणी का दावा कर देते हैं, जबकि उनके पास वैध प्रमाण पत्र नहीं होता। दस्तावेज सत्यापन के दौरान ऐसी स्थिति में श्रेणी बदल सकती है या दावा निरस्त भी हो सकता है।

5. नाम और दस्तावेजों में त्रुटि

NEET स्कोरकार्ड, आधार कार्ड, 10वीं और 12वीं की अंकसूची सहित अन्य दस्तावेजों में नाम, जन्मतिथि, लिंग या अन्य विवरण अलग-अलग होने पर दस्तावेज सत्यापन के दौरान समस्या आ सकती है। इसलिए आवेदन से पहले सभी विवरणों का मिलान अवश्य करें।

6. रिपोर्टिंग में देरी

सीट आवंटित होने के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित मेडिकल कॉलेज में रिपोर्ट करना अनिवार्य होता है। समय पर रिपोर्टिंग नहीं करने पर सीट रद्द हो सकती है और आगे की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।

7. सीट लेकर बीच में छोड़ देना

यदि उम्मीदवार को सीट मिलने के बाद वह प्रवेश नहीं लेता या बाद में सीट छोड़ देता है, तो उसे सिक्योरिटी डिपॉजिट जब्त होने या अन्य दंड का सामना करना पड़ सकता है। Mop-up राउंड के बाद सीट छोड़ने पर अतिरिक्त कार्रवाई भी संभव है। इसलिए MCC के नियमों को ध्यान से पढ़ना आवश्यक है।

दो साल तक लग सकता है प्रवेश पर प्रतिबंध

काउंसलिंग के दौरान सीट ब्लॉक करके प्रवेश नहीं लेने वाले उम्मीदवारों के खिलाफ कई राज्यों ने सख्त नियम लागू किए हैं। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और अब महाराष्ट्र में भी ऐसे मामलों में सिक्योरिटी डिपॉजिट जब्त करने, जुर्माना लगाने या प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है।

महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में नियमों में संशोधन करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि कोई उम्मीदवार अंतिम चरण में आवंटित सीट पर रिपोर्ट नहीं करता या प्रवेश नहीं लेता, जिससे सीट खाली रह जाती है, तो उसे अगले दो वर्षों तक मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में भाग लेने के लिए अयोग्य घोषित किया जाएगा। यह नियम उम्मीदवार के NEET स्कोर या रैंक से प्रभावित नहीं होगा।