erer | Source: erereनई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे ने पिछले सप्ताह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान किया। उनके इस फैसले के बाद क्रिकेट जगत की कई बड़ी हस्तियों ने उनके योगदान को याद किया। इसी क्रम में भारत के पूर्व कप्तान और महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने रहाणे की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि रहाणे को उनके योगदान के अनुरूप वह सम्मान और श्रेय कभी नहीं मिला, जिसके वे वास्तविक हकदार थे। साथ ही उन्होंने भारतीय क्रिकेट की एक ऐसी सच्चाई भी सामने रखी, जिस पर अक्सर चर्चा होती रही है।

रहाणे का अंतरराष्ट्रीय करियर रहा शानदार

38 वर्षीय अजिंक्य रहाणे ने वर्ष 2011 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था। अपने करियर के दौरान उन्होंने भारत के लिए 85 टेस्ट, 90 एकदिवसीय और 20 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले।

टेस्ट क्रिकेट में रहाणे ने 38.46 की औसत से 5,077 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से 12 शतक और 26 अर्धशतक निकले। भारतीय टेस्ट क्रिकेट में उनका नाम उन खिलाड़ियों में शामिल रहेगा जिन्होंने विदेशी परिस्थितियों में कई महत्वपूर्ण पारियां खेलीं।

2021 की ऐतिहासिक ऑस्ट्रेलिया जीत बनी सबसे बड़ी उपलब्धि

अजिंक्य रहाणे के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में 2021 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में भारत की ऐतिहासिक जीत को माना जाता है।

नियमित कप्तान विराट कोहली के पितृत्व अवकाश पर लौटने के बाद रहाणे ने टीम की कमान संभाली। उस समय भारतीय टीम कई चुनौतियों से जूझ रही थी, लेकिन उनकी कप्तानी में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 2-1 से हराकर ऐतिहासिक श्रृंखला अपने नाम की।

गावस्कर ने राहुल द्रविड़ से की तुलना

सुनील गावस्कर ने मिड-डे के लिए अपने कॉलम में लिखा कि बतौर कप्तान अजिंक्य रहाणे का रिकॉर्ड बेहद प्रभावशाली रहा है।

उन्होंने लिखा कि रहाणे ने छह टेस्ट मैचों में कप्तानी की, जिनमें से चार मुकाबलों में भारत ने जीत दर्ज की जबकि दो मैच ड्रॉ रहे। उनके नेतृत्व में टीम को एक भी हार का सामना नहीं करना पड़ा।

गावस्कर ने कहा कि राहुल द्रविड़ के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था। द्रविड़ ने कप्तान के रूप में कई महत्वपूर्ण जीत दिलाईं, लेकिन उन्हें भी उनके योगदान के अनुरूप पूरा श्रेय नहीं मिला। उनके अनुसार, रहाणे के साथ भी यही स्थिति देखने को मिली।

भारतीय क्रिकेट की कड़वी सच्चाई बताई

सुनील गावस्कर ने भारतीय क्रिकेट की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जब टीम जीतती है तो अधिकतर प्रशंसा व्यक्तिगत प्रदर्शन करने वाले बल्लेबाजों या गेंदबाजों को मिलती है।

उन्होंने कहा कि इसके विपरीत जब टीम हारती है तो सबसे पहले कप्तान और मुख्य कोच को जिम्मेदार ठहराया जाता है। उनके अनुसार, यही कारण है कि कई सफल कप्तानों को भी उनके नेतृत्व के अनुरूप सम्मान नहीं मिल पाता।

36 रन पर ऑलआउट होने के बाद संभाली टीम

2020-21 के ऑस्ट्रेलिया दौरे का पहला टेस्ट मैच एडिलेड में खेला गया था, जहां भारतीय टीम दूसरी पारी में केवल 36 रन पर सिमट गई थी। यह भारतीय टेस्ट इतिहास के सबसे निराशाजनक प्रदर्शनों में से एक माना जाता है।

इसके बाद विराट कोहली स्वदेश लौट गए और कप्तानी की जिम्मेदारी अजिंक्य रहाणे के हाथों में आई। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने टीम का मनोबल बनाए रखा और शानदार नेतृत्व का परिचय दिया।

मेलबर्न में जड़ा यादगार शतक

श्रृंखला के दूसरे टेस्ट में मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर अजिंक्य रहाणे ने ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाजी आक्रमण का मजबूती से सामना किया।

उन्होंने 223 गेंदों में 112 रन की शानदार शतकीय पारी खेली, जिसने भारत की वापसी की मजबूत नींव रखी। इस पारी को उनके टेस्ट करियर की सबसे महत्वपूर्ण पारियों में गिना जाता है।

चोटिल खिलाड़ियों के बावजूद दिलाई ऐतिहासिक जीत

श्रृंखला के दौरान भारत को जसप्रीत बुमराह, रवींद्र जडेजा सहित कई प्रमुख खिलाड़ियों की चोटों का सामना करना पड़ा।

इसके बावजूद अजिंक्य रहाणे की कप्तानी में भारतीय टीम ने ब्रिस्बेन के द गाबा मैदान पर ऑस्ट्रेलिया को हराकर इतिहास रच दिया। यह पहली बार था जब भारत ने उस मैदान पर टेस्ट मैच जीता और साथ ही श्रृंखला भी अपने नाम की।

'डूबते जहाज को किनारे लगाया'

सुनील गावस्कर ने अपने लेख में लिखा कि एडिलेड की हार के बाद अजिंक्य रहाणे और तत्कालीन मुख्य कोच रवि शास्त्री ने मिलकर टीम को संभाला।

उन्होंने कहा कि रहाणे ने ऐसे समय टीम की कमान संभाली जब परिस्थितियां बेहद कठिन थीं। उनके नेतृत्व में भारतीय टीम ने न केवल वापसी की बल्कि ऑस्ट्रेलिया के मजबूत किले द गाबा को भी फतह किया। गावस्कर ने कहा कि श्रृंखला के अंतिम टेस्ट में कई वरिष्ठ खिलाड़ियों की अनुपस्थिति के बावजूद भारत ने टेस्ट क्रिकेट की सबसे यादगार जीतों में से एक दर्ज की।

सम्मान के साथ खत्म हुआ अंतरराष्ट्रीय सफर

सुनील गावस्कर ने कहा कि अजिंक्य रहाणे सिर ऊंचा करके अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से विदा ले रहे हैं। उन्होंने हमेशा निस्वार्थ भाव से भारतीय टीम के लिए खेला और देश को कई यादगार जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उनके अनुसार, क्रिकेट प्रेमी रहाणे के योगदान को लंबे समय तक याद रखेंगे।