रोजाना एक्सरसाइज शुरू करना मुश्किल नहीं होता, असली चुनौती इसे लंबे समय तक अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाए रखना है। शुरुआत के कुछ दिनों में उत्साह रहता है, लेकिन फिर व्यस्तता, थकान या मन न होने के कारण वर्कआउट छूटने लगता है। ऐसे में धीरे-धीरे पूरी फिटनेस दिनचर्या बिगड़ सकती है। फिटनेस को लगातार बनाए रखने के लिए चेन्नई के फिटनेस कोच राज गणपत ने कुछ आसान नियम बताए हैं, जिनकी मदद से एक्सरसाइज को रोजमर्रा की आदत में शामिल किया जा सकता है।
पहला नियम: मन न हो तब भी शुरुआत करें
हर दिन एक्सरसाइज करने का उत्साह एक जैसा नहीं रहता। कुछ दिनों में शरीर में ऊर्जा अधिक महसूस हो सकती है, जबकि कुछ दिनों में थकान या व्यस्तता के कारण वर्कआउट करने का मन बिल्कुल नहीं करता। ऐसे समय में पूरी तरह एक्सरसाइज छोड़ने के बजाय केवल शुरुआत करने पर ध्यान देना उपयोगी हो सकता है।
अगर लंबे समय तक वर्कआउट करने का समय या ऊर्जा नहीं है तो थोड़ी देर के लिए ही एक्सरसाइज शुरू करें। कई बार शुरुआत करने के बाद शरीर और दिमाग धीरे-धीरे सक्रिय महसूस करने लगते हैं और आप तय समय से ज्यादा कसरत कर पाते हैं। इसलिए हर दिन खुद से यह उम्मीद करना जरूरी नहीं कि आप पूरी क्षमता के साथ वर्कआउट करेंगे।
दूसरा नियम: कम से कम 10 मिनट शरीर को सक्रिय रखें
व्यस्त दिन में लंबा वर्कआउट करना संभव न हो तो भी शरीर को पूरी तरह निष्क्रिय न रहने दें। कम से कम 10 मिनट की गतिविधि को अपनी दिनचर्या में जगह दी जा सकती है। इसके लिए तेज गति से पैदल चलना, हल्की स्ट्रेचिंग या घर पर आसान एक्सरसाइज जैसे विकल्प अपनाए जा सकते हैं।
इसका उद्देश्य हर दिन एक जैसा लंबा वर्कआउट करना नहीं, बल्कि शरीर को नियमित रूप से सक्रिय रखना है। जिस दिन समय और ऊर्जा अधिक हो, उस दिन पूरा वर्कआउट किया जा सकता है। वहीं, व्यस्त या थकान वाले दिन छोटा सत्र भी आपकी नियमितता बनाए रखने में मदद कर सकता है।
तीसरा नियम: एक्सरसाइज को मूड के भरोसे न छोड़ें
फिटनेस रूटीन के टूटने की एक वजह यह भी हो सकती है कि हम एक्सरसाइज करने का फैसला अपने मूड पर छोड़ देते हैं। जब मन हुआ तो वर्कआउट कर लिया और जब मन नहीं हुआ तो टाल दिया। इस तरह एक्सरसाइज के लिए कोई निश्चित दिनचर्या नहीं बन पाती।
इसके बजाय पहले से तय करना बेहतर है कि दिन में किस समय और कितनी देर एक्सरसाइज करनी है। इसे रोज की जरूरी गतिविधि की तरह लिया जा सकता है। एक वर्कआउट पूरा होने के बाद अगले दिन के लिए भी अपनी एक्सरसाइज का समय तय किया जा सकता है। लगातार दोहराने से यह प्रक्रिया धीरे-धीरे नियमित दिनचर्या का हिस्सा बन सकती है।
चौथा नियम: अपनी छोटी कोशिश को भी महत्व दें
फिटनेस का आकलन केवल वजन कम होने या लंबे समय तक एक्सरसाइज करने से नहीं किया जाना चाहिए। किसी दिन अगर आपने सिर्फ 10 मिनट पैदल चलने के लिए निकाले हैं, तो उस प्रयास को भी महत्व देना जरूरी है।
छोटी उपलब्धियों को नजरअंदाज करने के बजाय उन्हें अपनी प्रगति का हिस्सा समझें। उदाहरण के लिए, यदि व्यस्त दिन में भी आपने कुछ मिनट शरीर को सक्रिय रखा, तो इसका मतलब है कि आपने अपनी फिटनेस दिनचर्या को पूरी तरह टूटने नहीं दिया। अपनी ऐसी छोटी कोशिशों को पहचानने से नियमितता बनाए रखने की प्रेरणा मिल सकती है।
पांचवां नियम: रूटीन टूटे तो अगले दिन फिर शुरू करें
फिटनेस में हर दिन एक जैसा प्रदर्शन करना जरूरी नहीं है। कभी वर्कआउट छूट सकता है, कभी समय कम मिल सकता है और कभी शरीर थका हुआ महसूस हो सकता है। ऐसे किसी एक दिन के कारण पूरी दिनचर्या को छोड़ देना जरूरी नहीं है।
यदि किसी दिन एक्सरसाइज नहीं हो पाई तो अगले दिन सामान्य रूटीन पर वापस लौटें। यह सोचने से बचें कि एक दिन छूटने के बाद पूरी मेहनत बेकार हो गई। फिटनेस को लंबे समय तक जारी रखने के लिए जरूरी है कि रुकावट के बाद दोबारा शुरुआत करने की आदत बनी रहे।
रोज दो घंटे की एक्सरसाइज जरूरी नहीं
फिटनेस के लिए हर दिन लंबे समय तक जिम में रहना ही एकमात्र तरीका नहीं है। आपकी दिनचर्या, समय और ऊर्जा के अनुसार एक्सरसाइज की अवधि अलग हो सकती है। जिस दिन पर्याप्त समय और ऊर्जा उपलब्ध हो, उस दिन अधिक वर्कआउट किया जा सकता है। वहीं व्यस्त दिन में थोड़ी देर पैदल चलना, स्ट्रेचिंग करना या हल्की कसरत करना भी नियमितता बनाए रखने का एक तरीका हो सकता है।
मुख्य बात यह है कि एक्सरसाइज को केवल उन दिनों तक सीमित न रखा जाए, जब आपके पास पर्याप्त समय हो। छोटी अवधि की गतिविधि को भी अपनी दिनचर्या में शामिल करने से एक्सरसाइज के साथ नियमित संबंध बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
फिटनेस में छोटी शुरुआत क्यों काम आ सकती है
जब कोई व्यक्ति शुरुआत में ही बहुत कठिन और लंबा वर्कआउट तय कर लेता है, तो व्यस्तता या थकान वाले दिनों में उसे पूरा करना मुश्किल हो सकता है। इसके विपरीत, छोटी गतिविधि को पूरा करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। इसी वजह से रोजाना कुछ मिनट की गतिविधि को भी रूटीन का हिस्सा बनाना व्यावहारिक तरीका हो सकता है।
समय मिलने पर इसी गतिविधि को बढ़ाया जा सकता है। इस तरह एक्सरसाइज को किसी एक बड़े लक्ष्य के बजाय रोज की छोटी आदत के रूप में अपनाने पर ध्यान रहता है।
एक्सरसाइज की आदत बनाने का आसान फॉर्मूला
यदि आपका वर्कआउट रूटीन बार-बार टूट जाता है, तो पांच बातों को याद रखा जा सकता है—मन न होने पर भी शुरुआत करें, कम से कम 10 मिनट शरीर को सक्रिय रखें, एक्सरसाइज का समय पहले से तय करें, छोटी कोशिशों को भी महत्व दें और रूटीन टूटने पर अगले दिन फिर शुरुआत करें।
इन नियमों का उद्देश्य हर दिन परफेक्ट वर्कआउट करना नहीं, बल्कि एक्सरसाइज को लगातार अपनी दिनचर्या में बनाए रखना है। धीरे-धीरे यही नियमितता फिटनेस रूटीन को अधिक टिकाऊ बनाने में मदद कर सकती है।
निष्कर्ष: परफेक्ट वर्कआउट से ज्यादा जरूरी है नियमित रहना
फिटनेस के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह नहीं कि हर दिन कितनी देर एक्सरसाइज की गई, बल्कि यह है कि गतिविधि को लंबे समय तक जारी रखा जा रहा है या नहीं। किसी दिन ज्यादा कसरत हो सकती है और किसी दिन केवल कुछ मिनट की गतिविधि। रूटीन में उतार-चढ़ाव सामान्य है। इसलिए जरूरत के अनुसार अपनी गति कम करें, लेकिन पूरी तरह रुकने के बाद दोबारा शुरुआत करना न छोड़ें।
