Copper-T लगी होने के बावजूद प्रेग्नेंसी होने के संभावित जोखिम और डॉक्टर की सलाह। | Source: Chrome

Copper-T लगी होने के बावजूद प्रेग्नेंसी होने के संभावित जोखिम और डॉक्टर की सलाह।Source : Chrome

कॉपर-टी को अनचाही प्रेग्नेंसी रोकने के सबसे प्रभावी और लंबे समय तक काम करने वाले गर्भनिरोधक विकल्पों में गिना जाता है। इसकी प्रभावशीलता 99 फीसदी से ज्यादा बताई जाती है, लेकिन बहुत कम मामलों में इसके बावजूद गर्भधारण हो सकता है। ऐसी स्थिति सामने आने पर महिला को बिना घबराए तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए, क्योंकि कुछ जटिलताओं का जोखिम सामान्य प्रेग्नेंसी की तुलना में बढ़ सकता है।मदरहुड हॉस्पिटल, सेक्टर-48, नोएडा की कंसल्टेंट प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. पवाना एच.एन. के मुताबिक, कॉपर-टी पूरी तरह फेल-प्रूफ नहीं है। अगर डिवाइस अपनी निर्धारित जगह से खिसक जाए या शरीर से बाहर निकल जाए तो गर्भधारण की संभावना बन सकती है। हालांकि, ऐसा बेहद कम मामलों में होता है।

कॉपर-टी लगी होने के बावजूद प्रेग्नेंसी हो जाए तो क्या खतरा है?

डॉक्टर के अनुसार, कॉपर-टी के रहते प्रेग्नेंसी होना दुर्लभ है, लेकिन इसे सामान्य स्थिति मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। ऐसी प्रेग्नेंसी में डॉक्टर कुछ संभावित जटिलताओं की जांच करते हैं।इनमें गर्भपात, गर्भाशय में संक्रमण और समय से पहले डिलीवरी का जोखिम शामिल हो सकता है। इसलिए प्रेग्नेंसी कंफर्म होते ही मेडिकल जांच और आगे की निगरानी जरूरी हो जाती है।

सबसे पहले क्यों की जाती है एक्टोपिक प्रेग्नेंसी की जांच?

कॉपर-टी लगे होने के बावजूद प्रेग्नेंसी टेस्ट पॉजिटिव आने पर डॉक्टरों की एक अहम चिंता एक्टोपिक प्रेग्नेंसी को लेकर होती है। इसमें भ्रूण गर्भाशय के बजाय आमतौर पर फैलोपियन ट्यूब में विकसित होने लगता है।यह गंभीर स्थिति हो सकती है और समय पर इलाज जरूरी होता है। इसलिए ऐसी प्रेग्नेंसी में डॉक्टर अल्ट्रासाउंड और अन्य जरूरी जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि गर्भ गर्भाशय के अंदर है या नहीं।

क्या प्रेग्नेंसी होने पर कॉपर-टी निकालनी पड़ती है?

कॉपर-टी लगे होने के बावजूद गर्भधारण होने पर इसे निकालने का फैसला हर महिला के लिए एक जैसा नहीं होता। यह डिवाइस की स्थिति, गर्भ की स्थिति और प्रेग्नेंसी के शुरुआती चरण समेत कई बातों पर निर्भर करता है।डॉ. पवाना के मुताबिक, अगर कॉपर-टी की स्ट्रिंग दिखाई दे रही हो और डॉक्टर उसे सुरक्षित तरीके से निकाल सकते हों, तो शुरुआती गर्भावस्था में इसे हटाने की सलाह दी जा सकती है। इससे कुछ संभावित जटिलताओं का खतरा कम किया जा सकता है।हालांकि, कॉपर-टी को खुद से निकालने की कोशिश बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। इसे हटाने या गर्भावस्था को जारी रखने से जुड़ा फैसला स्त्री रोग विशेषज्ञ की सलाह से ही किया जाना चाहिए।

क्या बच्चे पर भी पड़ सकता है असर?

कॉपर-टी के बावजूद गर्भधारण होने का मतलब यह नहीं है कि प्रेग्नेंसी निश्चित रूप से खराब होगी। डॉक्टर के अनुसार, कई मामलों में ऐसी गर्भावस्था सामान्य रूप से भी आगे बढ़ सकती है।अगर शुरुआती स्तर पर आवश्यक जांच हो जाए, उपयुक्त स्थिति में कॉपर-टी सुरक्षित तरीके से निकाल दी जाए और पूरी गर्भावस्था के दौरान नियमित मेडिकल निगरानी रखी जाए, तो मां और बच्चे की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सकती है।

इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

अगर कॉपर-टी लगी हुई है और प्रेग्नेंसी का शक है, तो प्रेग्नेंसी टेस्ट के साथ जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। खासकर इन लक्षणों में तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।पेट या पेल्विक हिस्से में तेज या लगातार दर्द,योनि से ब्लीडिंग,चक्कर आना,बेहोशी कंधे में अचानक दर्द,बुखार,लगातार कमजोरी या असहज महसूस होना।ये लक्षण एक्टोपिक प्रेग्नेंसी या दूसरी गंभीर जटिलताओं से जुड़े हो सकते हैं।

घबराने के बजाय समय पर जांच जरूरी

कॉपर-टी के बावजूद गर्भधारण बहुत कम मामलों में होता है, लेकिन प्रेग्नेंसी कंफर्म होने के बाद इसे सामान्य स्थिति समझकर टालना ठीक नहीं है। खासकर एक्टोपिक प्रेग्नेंसी जैसे जोखिम को समय रहते पता लगाना जरूरी है।ऐसी स्थिति में महिला को खुद से कोई दवा लेने या कॉपर-टी निकालने के बजाय तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। समय पर जांच और उचित मेडिकल निगरानी से संभावित जटिलताओं को पहचानने और सही उपचार देने में मदद मिल सकती है।