पटना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह। | Source: Social media

पटना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह।Source : Social media

आजकल बिहार की राजनीति में एक मुलाकात सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी हुई है। कभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाने वाले आरसीपी सिंह एक बार फिर उनसे मिलने पहुंचे हैं। इस मुलाकात की तस्वीर सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। वजह यह है कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों नेताओं के रिश्तों में काफी दूरी आ गई थी और आरसीपी सिंह ने जेडीयू छोड़कर अपनी अलग राजनीतिक राह चुन ली थी।

ऐसे में लंबे समय बाद दोनों नेताओं की मुलाकात को सिर्फ एक सामान्य शिष्टाचार भेंट नहीं माना जा रहा है। कई राजनीतिक जानकार इसे बिहार की बदलती सियासत से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि इस मुलाकात को लेकर किसी भी पक्ष की ओर से कोई राजनीतिक संकेत नहीं दिया गया है, लेकिन आरसीपी सिंह का नीतीश कुमार को हमारे नेता नीतीश बाबू कहना चर्चा को और तेज कर गया है। अब हर किसी के मन में यही सवाल है कि क्या दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से चली आ रही नाराज़गी खत्म होने लगी है या फिर यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक थी। बिहार की राजनीति में इस मुलाकात के कई मायने निकाले जा रहे हैं और आने वाले दिनों में इस पर सबकी नजर बनी रहेगी।

क्या हुई मुलाकात?

शनिवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री और जेडीयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह पटना स्थित मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सरकारी आवास पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच कुछ देर तक बातचीत हुई। मुलाकात खत्म होने के बाद आरसीपी सिंह ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर नीतीश कुमार के साथ तस्वीर साझा की। तस्वीर के साथ उन्होंने लिखा, हमारे नेता आदरणीय नीतीश बाबू से आत्मीय मुलाकात हुई।आरसीपी सिंह की इस पोस्ट ने बिहार की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी। खास बात यह रही कि लंबे समय से दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक दूरी बनी हुई थी, ऐसे में इस मुलाकात और हमारे नेता जैसे शब्दों के इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग तरह के राजनीतिक मायने निकाले जाने लगे। हालांकि, इस मुलाकात को लेकर न तो नीतीश कुमार की ओर से और न ही जेडीयू की तरफ से कोई आधिकारिक राजनीतिक बयान आया है। इसके बावजूद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि क्या यह मुलाकात सिर्फ शिष्टाचार भेंट थी या फिर दोनों नेताओं के रिश्तों में फिर से नजदीकियां बढ़ने के संकेत हैं।

रिश्तों में क्यों आई थी दूरी?

आरसीपी सिंह को कभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सबसे करीबी सहयोगी माना जाता था। उन्होंने लंबे समय तक जनता दल में अहम जिम्मेदारियां निभाईं। वह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे और केंद्र सरकार में इस्पात मंत्री भी बने। संगठन और सरकार, दोनों में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती थी।लेकिन समय के साथ दोनों नेताओं के बीच मतभेद बढ़ने लगे। साल 2022 में जेडीयू ने आरसीपी सिंह पर पार्टी को नुकसान पहुंचाने और बीजेपी के ज्यादा करीब होने के आरोप लगाए। इसके बाद उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। जेडीयू छोड़ने के बाद आरसीपी सिंह ने अपनी अलग राजनीतिक पार्टी बनाई और कई मौकों पर नीतीश कुमार की नीतियों और फैसलों की खुलकर आलोचना भी की। यही वजह थी कि दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक दूरी लगातार बढ़ती चली गई।

क्या पिघल रही है रिश्तों की बर्फ?

अब लंबे समय बाद हुई इस मुलाकात ने बिहार की राजनीति में नई अटकलों को जन्म दे दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के बीच पुराने सहयोगियों के बीच संवाद फिर से शुरू होना कोई सामान्य बात नहीं मानी जा रही। हालांकि, अभी तक न तो जेडीयू और न ही आरसीपी सिंह की ओर से यह संकेत दिया गया है कि उनकी पार्टी में वापसी या किसी नए राजनीतिक समीकरण पर बातचीत हुई है।फिर भी, आरसीपी सिंह का सोशल मीडिया पर नीतीश कुमार को हमारे नेता आदरणीय नीतीश बाबू कहना चर्चा का बड़ा कारण बन गया है। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या दोनों नेताओं के बीच वर्षों से चली आ रही नाराज़गी अब धीरे-धीरे खत्म हो रही है या यह सिर्फ एक शिष्टाचार मुलाकात थी। फिलहाल इसका स्पष्ट जवाब तो नहीं मिला है, लेकिन इस एक मुलाकात ने बिहार की राजनीति में नई चर्चाओं को जरूर हवा दे दी है।

समर्थकों में बढ़ी उत्सुकता

आरसीपी सिंह की पोस्ट के बाद उनके समर्थकों और जेडीयू कार्यकर्ताओं के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। कई लोग इसे पुराने राजनीतिक रिश्तों में नरमी का संकेत मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे केवल एक शिष्टाचार मुलाकात बता रहे हैं। आने वाले दिनों में दोनों नेताओं की ओर से होने वाले बयानों पर सभी की नजर रहेगी।