erere | Source: erereनई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के अंतिम दिन भारतीय खिलाड़ियों से पदकों की उम्मीद थी, लेकिन समापन दिवस भारत के लिए निराशाजनक साबित हुआ। पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करने वाली भारतीय टीम आखिरी दिन एक भी पदक अपने नाम नहीं कर सकी। सबसे बड़ी उम्मीद जूडो की महिला 78 किलोग्राम स्पर्धा में इशरूप नारंग से थी, लेकिन कांस्य पदक मुकाबले में उन्हें कनाडा की कोराली गोडबाउट के खिलाफ बेहद करीबी मुकाबले में 'यूको' के आधार पर हार का सामना करना पड़ा। इस हार के साथ भारत अंतिम दिन पदक तालिका में अपना खाता खोलने से चूक गया।

कांस्य पदक मुकाबले में बेहद करीब पहुंचकर भी चूक गईं इशरूप नारंग

महिला 78 किलोग्राम वर्ग में भारतीय जूडो खिलाड़ी इशरूप नारंग ने पूरे अभियान के दौरान शानदार संघर्ष किया। उन्होंने रेपेशॉज मुकाबले में कैमरून की जॉर्जिका वेस्ली जेंगुए मौने को हराकर कांस्य पदक की उम्मीद कायम रखी थी। इससे पहले राउंड ऑफ 16 में उन्होंने स्कॉटलैंड की निकोल वुड को गोल्डन स्कोर में हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई थी। हालांकि कांस्य पदक मुकाबले में कनाडा की कोराली गोडबाउट के खिलाफ वह निर्णायक क्षणों में बढ़त नहीं बना सकीं और 'यूको' के अंतर से मुकाबला हार गईं। इस तरह वह बहुत कम अंतर से पदक जीतने से वंचित रह गईं।

पुरुष जूडो में भी नहीं चला भारतीय खिलाड़ियों का दम

कॉमनवेल्थ गेम्स के अंतिम दिन पुरुष 100 किलोग्राम वर्ग में भारत के अवतार सिंह और यश घांघस से भी अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन दोनों खिलाड़ी शुरुआती दौर से आगे नहीं बढ़ सके। अवतार सिंह को राउंड ऑफ 16 में साइप्रस के एरिस्टोस माइकल ने 'इप्पोन' से हराकर प्रतियोगिता से बाहर कर दिया। वहीं यश घांघस का अभियान वेल्स के जोशुआ व्हाइटहाउस के खिलाफ राउंड ऑफ 16 में हार के साथ समाप्त हो गया।

साइक्लिंग में भी नहीं मिली सफलता

भारतीय साइक्लिंग टीम को भी अंतिम दिन निराशा हाथ लगी। पुरुषों की 40 किलोमीटर प्वाइंट्स रेस के क्वालीफाइंग दौर में हर्षवीर सिंह सेखों और दिनेश कुमार उम्मीद के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सके। दोनों भारतीय साइक्लिस्ट क्वालीफाइंग चरण से आगे नहीं बढ़ पाए और प्रतियोगिता से बाहर हो गए। इसके साथ ही अंतिम दिन साइक्लिंग से भी भारत को कोई पदक नहीं मिल सका।

शनिवार भारत के लिए रहा था स्वर्णिम दिन

हालांकि अंतिम दिन भारत को पदक नहीं मिला, लेकिन इससे पहले शनिवार भारतीय दल के लिए बेहद यादगार साबित हुआ था। भारतीय मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल सात स्वर्ण और तीन रजत पदक अपने नाम किए थे। इसी दमदार प्रदर्शन के कारण भारत दसवें दिन के अंत तक पदक तालिका में 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य सहित कुल 39 पदकों के साथ चौथे स्थान पर पहुंच गया था। पदक तालिका में ऑस्ट्रेलिया 61 स्वर्ण पदकों के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि इंग्लैंड दूसरे और कनाडा तीसरे स्थान पर मौजूद थे।

भारतीय मुक्केबाजों ने रिंग में दिखाया दम

भारतीय मुक्केबाजों ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का मान बढ़ाया। मौजूदा विश्व चैंपियन जैसमीन लंबोरिया ने 57 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। प्रीति पवार ने 54 किलोग्राम, साक्षी चौधरी ने 51 किलोग्राम, अरूंधति चौधरी ने 70 किलोग्राम और प्रिया घंघास ने 60 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक अपने नाम किए। वहीं ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन को 75 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

पुरुष मुक्केबाजों ने भी बढ़ाया भारत का गौरव

पुरुष वर्ग में सचिन सिवाच ने 60 किलोग्राम और अंकुश ने 70 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारत की उपलब्धियों में अहम योगदान दिया। इसके अलावा 55 किलोग्राम वर्ग में जादूमणि सिंह तथा 90 प्लस किलोग्राम वर्ग में नरेंद्र बेरवाल ने रजत पदक हासिल किया। इससे पहले भारत ने गोल्ड कोस्ट 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में मुक्केबाजी में तीन स्वर्ण सहित कुल सात पदक जीते थे, जबकि इस बार भारतीय मुक्केबाजों ने उससे भी बेहतर प्रदर्शन किया।

जूडो में भारत ने रचा नया इतिहास

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जूडो भारत के लिए ऐतिहासिक स्पर्धा साबित हुई। महिलाओं के 63 किलोग्राम से कम भार वर्ग में उन्नति शर्मा ने कांस्य पदक जीतकर भारत के रिकॉर्ड चौथे पदक में योगदान दिया। इस अभियान की शुरुआत हर्ष सिंह और अस्मिता डे ने की थी, जिन्होंने क्रमशः पुरुष 60 किलोग्राम और महिला 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर राष्ट्रमंडल खेलों की जूडो प्रतियोगिता में भारत को पहला स्वर्ण दिलाया। वहीं यामिनी मौर्य ने महिला 57 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर इस ऐतिहासिक अभियान को और मजबूत बनाया।