erere | Source: ererदिल्ली के सरकारी स्कूलों में प्रधानाचार्य और उप-प्रधानाचार्य के सैकड़ों पद खाली होने का मामला सामने आया है। हाल ही में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की ओर से जारी भर्ती अधिसूचना के अनुसार, दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय (DoE) के अधीन संचालित सरकारी स्कूलों में प्रधानाचार्य और उप-प्रधानाचार्य के कुल 828 पद रिक्त हैं। इनमें प्रधानाचार्य के 124 और उप-प्रधानाचार्य के 704 पद शामिल हैं। इन पदों को सीधी भर्ती के माध्यम से भरा जाना है।

828 पद खाली, UPSC ने जारी किया भर्ती सर्कुलर

दिल्ली के सरकारी स्कूलों में रिक्त पदों को भरने के लिए UPSC की ओर से भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है। शिक्षा निदेशालय के सर्कुलर के मुताबिक, प्रधानाचार्य और उप-प्रधानाचार्य के कुल 828 पदों पर सीधी भर्ती की जानी है।

इन पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया 25 जुलाई 2026 से शुरू हुई थी। इच्छुक उम्मीदवारों के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख 14 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। भर्ती से संबंधित विस्तृत जानकारी UPSC की आधिकारिक अधिसूचना में उपलब्ध है।

प्रधानाचार्य के 124 पदों पर होगी सीधी भर्ती

दिल्ली सरकार के सरकारी स्कूलों में प्रधानाचार्य के कुल 950 पद स्वीकृत हैं। इनमें से आधे यानी 475 पद सीधी भर्ती के लिए निर्धारित हैं, जबकि शेष 50 प्रतिशत पद पदोन्नति के माध्यम से भरे जाने हैं।

UPSC की भर्ती अधिसूचना में सीधी भर्ती वाले हिस्से में प्रधानाचार्य के 124 पद रिक्त बताए गए हैं। इन पदों को भर्ती प्रक्रिया के जरिए भरा जाएगा। इससे सरकारी स्कूलों में प्रशासनिक और शैक्षणिक नेतृत्व को मजबूत करने की उम्मीद है।

उप-प्रधानाचार्य के 704 पद भी खाली

प्रधानाचार्य के अलावा दिल्ली के सरकारी स्कूलों में उप-प्रधानाचार्य के पदों पर भी बड़ी संख्या में रिक्तियां हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उप-प्रधानाचार्य के कुल 1,670 पद स्वीकृत हैं।

इनमें से 50 प्रतिशत यानी 835 पद सीधी भर्ती के लिए निर्धारित किए गए हैं। UPSC की ओर से जारी भर्ती अधिसूचना के मुताबिक, सीधी भर्ती वाले कोटे में उप-प्रधानाचार्य के 704 पद फिलहाल खाली हैं।

पदोन्नति वाले पदों का काम भी अस्थायी व्यवस्था से

उप-प्रधानाचार्य के पदों की स्थिति में एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। पदोन्नति कोटे के करीब 400 पदों का काम फिलहाल तदर्थ यानी एडहॉक उप-प्रधानाचार्यों के जरिए संभाला जा रहा है।

इससे स्पष्ट होता है कि सरकारी स्कूलों में वरिष्ठ प्रशासनिक पदों को भरने के लिए सीधी भर्ती के साथ-साथ पदोन्नति प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण है। फिलहाल UPSC के माध्यम से सीधी भर्ती वाले पदों को भरने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

दिल्ली में करीब 1,090 सरकारी स्कूल

दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय के अधीन करीब 1,090 सरकारी स्कूल संचालित होते हैं। इन स्कूलों में प्रधानाचार्य और उप-प्रधानाचार्य जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर बड़ी संख्या में रिक्तियां होने से स्कूलों के प्रशासनिक संचालन और शैक्षणिक प्रबंधन पर असर पड़ने की संभावना को लेकर सवाल उठते हैं।

प्रधानाचार्य और उप-प्रधानाचार्य स्कूलों के प्रशासनिक संचालन, शिक्षकों के समन्वय और शैक्षणिक गतिविधियों के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में इन पदों को भरने की प्रक्रिया दिल्ली के सरकारी स्कूलों की व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

आवेदन की अंतिम तारीख 14 अगस्त

UPSC की ओर से जारी भर्ती प्रक्रिया के तहत आवेदन करने की अंतिम तारीख 14 अगस्त 2026 है। आवेदन प्रक्रिया 25 जुलाई से शुरू हो चुकी है। संबंधित पदों की पात्रता, चयन प्रक्रिया और अन्य शर्तों की विस्तृत जानकारी UPSC की आधिकारिक भर्ती अधिसूचना में दी गई है।

उम्मीदवारों को आवेदन से पहले आधिकारिक अधिसूचना में दिए गए नियमों और पात्रता संबंधी शर्तों को ध्यान से देखने की जरूरत होगी।

स्कूल प्रशासन में रिक्तियों का क्या असर?

दिल्ली सरकार के अधीन करीब 1,090 सरकारी स्कूल संचालित होने के बीच प्रधानाचार्य और उप-प्रधानाचार्य के 828 पदों का खाली होना स्कूल प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण विषय है। प्रधानाचार्य और उप-प्रधानाचार्य स्कूलों में प्रशासनिक निर्णय लेने और शैक्षणिक गतिविधियों को व्यवस्थित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

इन पदों पर नियमित नियुक्तियां होने से स्कूलों में नेतृत्व संबंधी जिम्मेदारियों का स्पष्ट वितरण हो सकता है। हालांकि, भर्ती प्रक्रिया पूरी होने और नियुक्तियां होने के बाद ही इसका वास्तविक प्रभाव सामने आएगा।

UPSC भर्ती से पद भरने की प्रक्रिया आगे बढ़ी

दिल्ली सरकार के सरकारी स्कूलों में खाली पड़े प्रधानाचार्य और उप-प्रधानाचार्य के पदों को भरने के लिए UPSC की भर्ती प्रक्रिया अब महत्वपूर्ण चरण में है। 124 प्रधानाचार्य और 704 उप-प्रधानाचार्य पदों पर सीधी भर्ती के लिए आवेदन मांगे गए हैं।

इस भर्ती प्रक्रिया से उन स्वीकृत पदों को भरने का रास्ता खुला है, जो फिलहाल रिक्त हैं। वहीं, पदोन्नति कोटे के पदों की स्थिति भी स्कूल प्रशासन में एक अलग महत्वपूर्ण पहलू बनी हुई है।