अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई दानराशि में कथित गड़बड़ी का मामला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। लंबे समय से सुर्खियों में बने इस प्रकरण में आखिरकार पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नामजद आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों, विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट और ट्रस्ट की आधिकारिक शिकायत के बाद दर्ज हुई पहली FIR ने यह साफ संकेत दिया है कि सरकार इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। अब पूरे प्रदेश की निगाहें जांच की अगली कड़ी और अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस कार्रवाई | फोटो: BBC
FIR के बाद पुलिस का बड़ा एक्शन, सभी नामजद आरोपी हिरासत में
राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर पुलिस ने टिन्नू यादव, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्र, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव और करुणेश पांडे सहित आठ नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। इसके बाद पुलिस ने सभी आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, मंदिर परिसर में लगे CCTV कैमरों की फुटेज जांच के दौरान कुछ लोगों की संदिग्ध गतिविधियां सामने आई थीं, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई। हालांकि इस FIR में किसी ट्रस्ट पदाधिकारी का नाम शामिल नहीं किया गया है। पुलिस अब तकनीकी साक्ष्यों, दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।
SIT जांच के बाद सामने आए शुरुआती संकेत, कई पहलुओं की हो रही गहन पड़ताल
चढ़ावे में कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय SIT का गठन किया था। जांच टीम ने लगातार कई दिनों तक मंदिर परिसर का निरीक्षण किया और ट्रस्ट से जुड़े कर्मचारियों, सुरक्षा कर्मियों, बैंक प्रतिनिधियों तथा कैश काउंटिंग प्रक्रिया से जुड़े दर्जनों लोगों से पूछताछ की। जांच के दौरान दान राशि के संग्रह, गिनती, रिकॉर्डिंग और बैंक में जमा करने की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की गई। SIT अध्यक्ष विजय विश्वास पंत ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल केवल प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी गई है, जबकि विस्तृत जांच अभी जारी है। अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
BNS की गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ केस, आरोपियों पर बढ़ीं कानूनी मुश्किलें
इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इनमें कर्मचारी द्वारा चोरी, आपराधिक विश्वासघात, चोरी की संपत्ति का लेन-देन, चोरी की संपत्ति छिपाने में मदद और आपराधिक साजिश जैसी धाराएं शामिल हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं तो दोषियों को कठोर सजा का सामना करना पड़ सकता है। विशेष रूप से विश्वासघात और संगठित साजिश से जुड़ी धाराएं इस मामले को और गंभीर बनाती हैं। पुलिस अब प्रत्येक आरोपी की भूमिका, वित्तीय लेन-देन और जिम्मेदारियों की अलग-अलग जांच कर रही है।
राम मंदिर में बदली पूरी व्यवस्था, पारदर्शिता बढ़ाने के लिए लागू हुए नए सुरक्षा नियम
SIT की प्रारंभिक जांच के बाद राम मंदिर प्रशासन ने दानराशि की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कई बड़े बदलाव किए हैं। अब कैश काउंटिंग प्रक्रिया में केवल मंदिर कर्मियों के बजाय बैंक के नए कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है। पूरे काउंटिंग एरिया में हाई-रिजॉल्यूशन CCTV कैमरे लगाए गए हैं और निगरानी के लिए अलग कंट्रोल रूम बनाया गया है। काउंटिंग रूम में प्रवेश और बाहर निकलने से पहले प्रत्येक कर्मचारी की अनिवार्य तलाशी होगी। वहीं बैंक में दानराशि जमा करने से पहले तीन स्तर पर क्रॉस वेरिफिकेशन और सभी संबंधित अधिकारियों के हस्ताक्षर अनिवार्य किए गए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य भविष्य में किसी भी तरह की अनियमितता की संभावना को पूरी तरह समाप्त करना और श्रद्धालुओं के विश्वास को और मजबूत करना है।
