बांकीपुर उपचुनाव के बीजेपी उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा। | Source: Chrome

बांकीपुर उपचुनाव के बीजेपी उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा।Source : Chrome

बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज है। भारतीय जनता पार्टी ने इस सीट से अभिषेक कुमार सिन्हा उर्फ अभिषेक बंटी को उम्मीदवार बनाया है। टिकट की घोषणा के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि आखिर पार्टी ने अभिषेक बंटी पर ही भरोसा क्यों जताया। माना जा रहा है कि इसके पीछे संगठन में उनकी लंबी सक्रियता के साथ-साथ बांकीपुर का जातीय समीकरण भी अहम भूमिका निभा रहा है।

अभिषेक बंटी पर क्यों जताया भरोसा?

बीजेपी के उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा पिछले करीब 26-27 वर्षों से पार्टी से जुड़े हुए हैं। उन्होंने एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की और लगातार संगठन में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाईं। पटना के बोरिंग रोड निवासी अभिषेक सामान्य परिवार से आते हैं और लंबे समय से पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता के तौर पर सक्रिय रहे हैं।

संगठन में निभा चुके हैं कई अहम जिम्मेदारियां

अभिषेक कुमार सिन्हा ने पार्टी और युवा मोर्चा में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। वर्तमान में वे भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के उपाध्यक्ष हैं। इससे पहले वे पटना महानगर BJYM के अध्यक्ष रह चुके हैं। इसके अलावा दो बार मंडल अध्यक्ष, मंडल मंत्री और मंडल महामंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। उन्हें पार्टी का सक्रिय युवा चेहरा माना जाता है। साथ ही वे कायस्थ समाज के सामाजिक और राजनीतिक कार्यक्रमों में भी लगातार सक्रिय रहे हैं।

कायस्थ बहुल सीट पर फिर खेला गया जातीय समीकरण

बांकीपुर विधानसभा सीट को लंबे समय से कायस्थ बहुल क्षेत्र माना जाता है। इसी वजह से बीजेपी ने एक बार फिर इसी समाज के उम्मीदवार पर दांव लगाया है। इस सीट से पहले विधायक रहे नितिन नवीन भी कायस्थ समुदाय से आते हैं। उनसे पहले उनके पिता नवीन किशोर सिन्हा इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। यानी करीब तीन दशक से इस सीट पर कायस्थ समाज का प्रतिनिधित्व होता रहा है।

मतदाताओं का जातीय समीकरण क्या कहता है?

चुनाव आयोग के अनुसार बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में 3,79,471 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। जातीय आंकड़ों के मुताबिक यहां सबसे अधिक करीब 14 प्रतिशत मतदाता कायस्थ समाज से हैं। इसके बाद यादव 12 प्रतिशत, मुस्लिम 9 से 10 प्रतिशत, चंद्रवंशी और वैश्य 9-9 प्रतिशत, दलित और महादलित 8 प्रतिशत, भूमिहार 7 से 8 प्रतिशत, ब्राह्मण 7 प्रतिशत, राजपूत 5 प्रतिशत, कुर्मी 5 प्रतिशत और कुशवाहा करीब 3 प्रतिशत हैं।

बीजेपी का मजबूत गढ़ मानी जाती है सीट

राजनीतिक जानकारों के अनुसार कायस्थ, ब्राह्मण, भूमिहार और राजपूत समुदाय को मिलाकर इस क्षेत्र में करीब 33 प्रतिशत सवर्ण मतदाता हैं, जिन्हें बीजेपी का पारंपरिक वोट बैंक माना जाता है। वहीं दलित, कुर्मी और कुशवाहा समाज के एक हिस्से का समर्थन भी एनडीए को मिलता रहा है। इसी वजह से बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से बीजेपी का मजबूत गढ़ मानी जाती है।

पिछले चुनाव में मिली थी बड़ी जीत

साल 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार नितिन नवीन ने इस सीट से 51,936 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। ऐसे में इस बार भी पार्टी उसी सामाजिक समीकरण और संगठनात्मक रणनीति के साथ चुनावी मैदान में उतरती नजर आ रही है। अब देखना होगा कि अभिषेक बंटी पार्टी के भरोसे पर कितना खरे उतरते हैं और उपचुनाव में जनता उन्हें कितना समर्थन देती है।