एक ओर राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर जारी विवाद ने उत्तर प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है, तो दूसरी ओर कांग्रेस ने ऐसे समय अयोध्या जाने का फैसला किया है, जब हर राजनीतिक कदम को चुनावी नजरिए से देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस का नौ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को अयोध्या पहुंचकर रामलला के दर्शन और पूजा-अर्चना करेगा। कांग्रेस इसे आस्था का कार्यक्रम बता रही है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस दौरे के कई मायने निकाले जा रहे हैं। खास बात यह है कि यह दौरा ऐसे वक्त हो रहा है, जब राम मंदिर चढ़ावा विवाद, आरोप-प्रत्यारोप और विपक्ष की सक्रियता लगातार चर्चा में है। ऐसे में कांग्रेस का यह कदम केवल धार्मिक नहीं, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले अपनी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है।राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच अयोध्या पहुंचे कांग्रेस नेताओं का प्रतिनिधिमंडल

राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच अयोध्या पहुंचे कांग्रेस नेताओं का प्रतिनिधिमंडल

अजय राय की अगुवाई में अयोध्या पहुंचेगा कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के नेतृत्व में पार्टी का नौ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मंगलवार सुबह करीब नौ बजे अयोध्या पहुंचेगा। इस प्रतिनिधिमंडल में अमेठी से सांसद किशोरी लाल शर्मा, सीतापुर से सांसद राकेश राठौर, प्रयागराज से सांसद उज्ज्वल रमण सिंह, बाराबंकी से सांसद तनुज पुनिया, फरेंदा विधायक वीरेंद्र चौधरी, पूर्व सांसद एपी गौतम, पूर्व एमएलसी दीपक सिंह और पूर्व विधायक नीता गौतम शामिल हैं। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक यह दौरा पूरी तरह धार्मिक आस्था से जुड़ा है और सभी नेता भगवान रामलला के दर्शन कर प्रदेश और देश की खुशहाली की कामना करेंगे। साथ ही मंदिर परिसर का भ्रमण और स्थानीय कार्यकर्ताओं से मुलाकात का भी कार्यक्रम प्रस्तावित है। प्रशासन ने भी दौरे को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।

चढ़ावा विवाद के बीच कांग्रेस के दौरे की टाइमिंग पर उठे सवाल

राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन को लेकर हाल के दिनों में सियासी माहौल काफी गर्म रहा है। इसी बीच कांग्रेस का अयोध्या दौरा कई सवाल खड़े कर रहा है। इससे पहले आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी रामलला के दर्शन करने पहुंचे थे और उन्होंने चढ़ावा विवाद को लेकर सरकार पर सवाल उठाए थे। अब कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल भी अयोध्या पहुंच रहा है, जिससे राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। भाजपा इसे विपक्ष की राजनीतिक रणनीति बता रही है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि भगवान राम किसी एक दल की संपत्ति नहीं हैं और रामलला के दर्शन करना हर श्रद्धालु का अधिकार है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस इस दौरे के जरिए अपनी "सॉफ्ट हिंदुत्व" वाली छवि को और मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

योगी सरकार के निशाने पर सपा और कांग्रेस, बढ़ी सियासी तल्खी

राम मंदिर विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर हमलावर हैं। हाथरस में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस पार्टी की सरकार में रामभक्तों पर गोलियां चलीं, वह आज अयोध्या को धार्मिक नगरी बनाने की बात कर रही है। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर राम के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया। दूसरी ओर कांग्रेस और विपक्षी दल सरकार से चढ़ावा विवाद की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। इस बयानबाजी ने प्रदेश की राजनीति को और अधिक गर्म कर दिया है, जहां राम मंदिर एक बार फिर चुनावी विमर्श का केंद्र बनता दिखाई दे रहा है।

चढ़ावा विवाद की जांच तेज, अदालत के फैसले से बढ़ा मामला

राम मंदिर चढ़ावा मामले में नामजद आठ आरोपियों को अदालत ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। वहीं फैजाबाद बार एसोसिएशन ने फैसला लिया है कि इस मामले में कोई भी वकील आरोपियों की पैरवी नहीं करेगा। इस फैसले ने पूरे विवाद को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। ऐसे माहौल में कांग्रेस का अयोध्या दौरा केवल धार्मिक यात्रा तक सीमित रहेगा या फिर यह आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक संदेश देगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। फिलहाल इतना तय है कि राम मंदिर और अयोध्या एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ चुके हैं और आने वाले समय में इस मुद्दे पर सियासत और तेज होने की संभावना है।