दिल्ली देश की राजधानी, करोड़ों लोगों का घर, और गर्मियों में प्यास से तड़पता महानगर। यमुना सूखने लगे, तापमान 45° के पार हो जाए और जलाशयों में पानी का स्तर गिरने लगे तो सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि आख़िर दिल्ली को पानी मिलता कैसे है?बहुत से लोग सोचते हैं कि गंगा का पानी सीधा पाइपलाइन से आता होगा। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट है।गंगा से आने वाला पानी न तो साफ़ होता है, न सीधा पीने योग्य। उसमें मिट्टी, कचरा, बैक्टीरिया, कीचड़ क्या नहीं होता।फिर भी यही पानी लाखों घरों की प्यास बुझाता है।लेकिन कैसे?इसका जवाब छिपा है दिल्ली जल बोर्ड के विशाल भागीरथी वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में, जहाँ पानी सिर्फ सप्लाई नहीं होता बल्कि गुजरता है 6 ऐसे कड़े इम्तिहानों से, जिन्हें समझकर आपको पता चलेगा कि हर गिलास पानी कितनी मेहनत के बाद आपके घर तक पहुँचता है।

6 कड़े इम्तिहान

पहला चरण — कच्चा पानी पहुँचता है इनटेक वेल में गंगा से पाइपलाइन के ज़रिए आने वाला पानी पहले इनटेक वेल में जमा होता है।यह पानी बेहद गंदा होता है मिट्टी,कीचड़ काई,प्लास्टिक खेतों की गंदगी सब मिला होता है।यही से असली सफर शुरू होता है।

दूसरा चरण — स्क्रीनिंग बड़े कचरे की छंटाई अब पानी को भारी लोहे की जालियों से गुजारा जाता है।इसे ऐसे समझिए जैसे कपड़े धोने से पहले आप बड़ी गंदगी हटाते हैं।

ये जालियाँ रोक लेती है। लकड़ी। पत्ते,प्लास्टिक,पॉलिथीन,घास

ताकि आगे की मशीनें जाम न हों।

तीसरा चरण — केमिकल मिक्सिंग अलम + कोएगुलेंट यहाँ आता है विज्ञान का कमाल।पानी में कोएगुलेंट और एलम मिलाई जाती है।इनसे क्या होता है?छोटे-छोटे गंदे कण आपस में चिपककर बड़े गुच्छों में बदल जाते हैं।ये गंदगी अब आसानी से नीचे बैठ सकती है।

चौथा चरण —फ्लोक्यूलेशन गंदगी के बड़े फ्लॉक्स बनाना अगले टैंक में पानी को धीरे-धीरे घुमाया जाता है।इससे गंदगी के छोटे कण एक साथ मिलकर बड़े-बड़े फ्लॉक बना लेते हैं।ये फ्लॉक बाद में नीचे गिरने वाले हैं यही इस चरण का मकसद है।

पाँचवाँ चरण — सेडिमेंटेशन गंदगी नीचे बैठ जाती है।यह चरण सबसे शांत लेकिन सबसे प्रभावी है।पानी को एक विशाल टैंक में बिल्कुल स्थिर छोड़ दिया जाता है।धीरे-धीरे,भारी कण मिट्टी,कीचड़ सब नीचे बैठ जाते हैं।ऊपर जो पानी बचता है, वह काफी हद तक साफ हो चुका होता है।

छठा और अंतिम चरण — फ़िल्ट्रेशन + क्लोरीनेशन अब अंतिम सफाई होती है।पानी को कई परतों से गुजारा जाता है रेत,बजरी,कार्बन ये परतें बचे हुए कणों को पकड़ लेती हैं।सबसे अंत में पानी में क्लोरीन मिलाई जाती है ताकि वायरस और बैक्टीरिया खत्म हो जाएँ।यही पानी अब पंपिंग स्टेशन बड़ी पाइपलाइन छोटे वितरण नेटवर्क से होते हुए दिल्ली के घरों तक पहुँचता है।

क्यों जारी की गई यह इनसाइड स्टोरी?

गर्मियों में दिल्ली में पानी का संकट बढ़ गया था।यमुना का जलस्तर गिरने से पानी की कमी सप्लाई में कटौती लोगों की नाराज़गी जैसी खबरें सामने आ रही थीं।इसी माहौल में भागीरथी प्लांट का यह इनसाइड वीडियो सामने आया, ताकि लोगों को समझाया जा सके कि जो पानी आप पी रहे हैं, उसे तैयार करने में कितनी भारी और वैज्ञानिक प्रक्रिया लगती है।