दुनिया की सबसे मशहूर इमारतों में शामिल पेरिस का एफिल टावर सिर्फ अपनी खूबसूरती के लिए ही नहीं, बल्कि एक दिलचस्प वैज्ञानिक वजह से भी चर्चा में रहता है। भीषण गर्मी के दिनों में यह टावर कुछ सेंटीमीटर “लंबा” हो जाता है। सुनने में यह किसी फिल्मी कहानी जैसा लग सकता है, लेकिन इसके पीछे पूरी तरह विज्ञान काम करता है। तापमान बढ़ते ही लोहे से बने इस विशाल ढांचे में बदलाव शुरू हो जाता है, जिसकी वजह से इसकी ऊंचाई बढ़ जाती है और यह हल्का सा झुक भी जाता है।


गर्मी बढ़ते ही क्यों लंबा हो जाता है एफिल टावर?

जब पेरिस में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंचता है, तब एफिल टावर की ऊंचाई लगभग 12 से 15 सेंटीमीटर तक बढ़ जाती है। इसके पीछे की सबसे बड़ी वैज्ञानिक वजह “थर्मल एक्सपेंशन” यानी ऊष्मीय प्रसार है।

एफिल टावर करीब 7,300 टन लोहे से बना हुआ है। तेज धूप और गर्मी पड़ने पर लोहे के अंदर मौजूद सूक्ष्म कण तेजी से कंपन करने लगते हैं। इस कारण वे एक-दूसरे से थोड़ा दूर हो जाते हैं और धातु फैलने लगती है। इसी फैलाव की वजह से पूरा टावर कुछ सेंटीमीटर ऊपर की तरफ खिंच जाता है। विज्ञान की भाषा में यह एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन आम लोगों के लिए यह काफी दिलचस्प लगता है।


सिर्फ लंबा ही नहीं, सूरज से बचने के लिए झुक भी जाता है

गर्मी का असर केवल ऊंचाई तक सीमित नहीं रहता। एफिल टावर तेज धूप की वजह से थोड़ा झुक भी जाता है। दरअसल सूरज की किरणें टावर के सभी हिस्सों पर बराबर नहीं पड़तीं। जिस हिस्से पर ज्यादा धूप पड़ती है, वह हिस्सा बाकी हिस्सों की तुलना में ज्यादा गर्म होकर अधिक फैल जाता है।

इस असंतुलन की वजह से टावर का ऊपरी हिस्सा सूरज की विपरीत दिशा में थोड़ा सा झुक जाता है। हालांकि यह झुकाव बेहद मामूली होता है और सामान्य लोगों को आसानी से दिखाई भी नहीं देता। लेकिन वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के लिए यह थर्मल एक्सपेंशन का एक शानदार उदाहरण माना जाता है।


क्या इससे एफिल टावर को कोई खतरा है?

इस बदलाव से एफिल टावर को किसी तरह का नुकसान नहीं होता। करीब 135 साल पहले जब इंजीनियर गुस्ताफ एफिल ने इस टावर को डिजाइन किया था, तब उन्होंने मौसम के प्रभावों को ध्यान में रखते हुए इसकी संरचना तैयार की थी। टावर को इस तरह बनाया गया कि वह गर्मी, ठंड और मौसम के बदलावों को आसानी से सह सके।

इसी वजह से आज भी एफिल टावर मजबूती से खड़ा है और हर साल लाखों पर्यटकों को आकर्षित करता है। यह घटना इस बात का शानदार उदाहरण है कि विज्ञान केवल किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि हमारी दुनिया की हर बड़ी चीज में छिपा हुआ है।

सूरज की गर्मी इंसानों को ही नहीं झुलसाती…

कभी-कभी दुनिया की सबसे मजबूत लोहे की इमारतें भी उसके सामने कुछ सेंटीमीटर “पिघल” जाती हैं।