
जामिया मिल्लिया इस्लामिया से निकले एक छात्र ने अपनी मातृ संस्था को वो लौटाया है, जो किसी भी विश्वविद्यालय के लिए सबसे कीमती होता है - भरोसा और भागीदारी।
समाजवादी पार्टी के एमएलसी शाह आलम उर्फ ‘गुड्डू जमाली’ ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देकर एक मिसाल कायम की है। जामिया के पूर्व छात्र गुड्डू जमाली का ये योगदान सीधे विश्वविद्यालय की दो सबसे अहम जरूरतों पर खर्च होगा

कहाँ खर्च होगी ये राशि? एलुमनाई कैंटीन से छात्राओं के हॉस्टल तक
विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक इस फंड का इस्तेमाल दो हिस्सों में होगा:
1. एलुमनाई कैंटीन का निर्माण: कैंपस में एक मॉडर्न कैंटीन बनेगी जो मौजूदा और पूर्व छात्रों के बीच संवाद का अड्डा बनेगी। यहाँ छात्र पढ़ाई के साथ नेटवर्किंग भी कर सकेंगे।
2. छात्राओं के हॉस्टल का अपग्रेड: छात्राओं के रहने की जगह को ज्यादा सुरक्षित, आरामदायक और सुविधा-संपन्न बनाया जाएगा। नए कमरे, बेहतर मेस और सुरक्षा इंतजाम इस योजना का हिस्सा हैं।
जामिया प्रशासन का मानना है कि इस मदद से रुकी हुई विकास परियोजनाओं को रफ्तार मिलेगी।
चेक सौंपने का वो खास पल
इस योगदान को औपचारिक रूप देने के लिए जामिया का एक प्रतिनिधिमंडल गुड्डू जमाली के कार्यालय पहुंचा। विश्वविद्यालय की तरफ से प्रोफेसर आसिफ हुसैन और फाइन आर्ट्स विभाग के अध्यक्ष शाह अबुल फैज मौजूद रहे। वहीं एलुमनाई एसोसिएशन से नदीमुद्दीन चौधरी और सैयद मोहम्मद काजिम ने प्रतिनिधित्व किया।
मुलाकात के दौरान गुड्डू जमाली ने 50 लाख रुपये का चेक सौंपा और भविष्य में भी विश्वविद्यालय के विकास में सहयोग का वादा किया। चर्चा में छात्रों की नई जरूरतों और संभावित प्रोजेक्ट्स पर भी बात हुई।
जामिया बिरादरी ने कहा - 'यही है असली एलुमनाई स्पिरिट'
गुड्डू जमाली के इस कदम की जामिया के छात्रों, शिक्षकों और पूर्व छात्रों ने दिल खोलकर तारीफ की है। सोशल मीडिया पर भी #JamiaAlumniPride ट्रेंड कर रहा है।
जामिया प्रशासन का कहना है जब कोई पूर्व छात्र अपनी संस्था के लिए आगे आता है, तो वो सिर्फ पैसा नहीं देता। वो आने वाली पीढ़ियों को ये भरोसा देता है कि जामिया सिर्फ 4 साल की डिग्री नहीं, जिंदगी भर का रिश्ता है।
क्यों अहम है ये योगदान?
1. छात्राओं को प्राथमिकता: फंड का बड़ा हिस्सा सीधे छात्राओं की सुरक्षा और सुविधा पर खर्च होगा।
2. एलुमनाई कल्चर मजबूत: नई कैंटीन से पूर्व छात्रों का कैंपस से जुड़ाव बढ़ेगा।
3. दूसरों के लिए मिसाल: ये कदम दूसरे सफल पूर्व छात्रों को भी अपनी संस्था के लिए योगदान देने को प्रेरित करेगा।
किसी विश्वविद्यालय की असली ताकत उसकी ऊंची इमारतें नहीं होतीं। उसकी ताकत वो लोग होते हैं, जो डिग्रियाँ लेकर निकलने के बाद भी पीछे मुड़कर देखते हैं... और अपने संस्थान का हाथ थामते हैं। गुड्डू जमाली ने आज जामिया को यही ताकत लौटाई है।
