
दुनिया भर में यौन हिंसा के मामलों में अक्सर पीड़िताओं की आवाज़ दब जाती है कहीं सामाजिक शर्म, कहीं कानूनी पेचीदगियाँ, तो कहीं अपराधी का प्रभाव लेकिन फ्रांस में सामने आया लेटिशिया आर. का मामला उन दुर्लभ मामलों में से है जिसने पूरे यूरोप को झकझोर दिया। यह सिर्फ हिंसा नहीं थी, न सिर्फ क्रूरता यह इंसानियत को तोड़ देने वाली सात साल की दहशत थी, जिसने अदालत के कमरे को भी सन्न कर दिया।लेटिशिया ने अदालत में जो बयान दिया, वह किसी डरावनी घटना का नहीं, बल्कि लगातार चलने वाली हैवानियत की ज़िंदा कहानी थी।एक ऐसी कहानी, जिसमें एक महिला को सिर्फ हिंसा नहीं झेलनी पड़ी उसे अपमान, दहशत, मानसिक कैद और जबरन शरीर को व्यापार की वस्तु बनाने जैसे ज़ुल्मों से गुज़रना पड़ा। उसने अदालत के सामने बताया कि उसका पूर्व साथी गियोम बूची उसे किस तरह यातना, यौन उत्पीड़न, मजबूरी और अपमान के गड्ढे में धकेलता रहा।दुनिया ने जब यह सुना कि यह महिला 487 पुरुषों तक गिनती करती रही, फिर हिसाब छोड़ दिया तो हर कोई हिल गया।जब यह सामने आया कि उसे यूरिन पिलाया गया, उसे पब्लिक टॉयलेट साफ़ करवाया गया, उसे तस्वीरें बनाकर धमकाया गया तो सवाल उठे कि अगर अपराध इतना बड़ा था, तो सज़ा इतनी छोटी क्यों?इसी बैकग्राउंड के साथ यह मामला आज बहस का विषय बन गया है क्या लेटिशिया को वास्तव में न्याय मिला?क्या 25 साल की सजा इस हैवानियत के सामने सस्ती सजा है?और क्या कानून इतने बड़े मानसिक-शारीरिक अत्याचार को समझ पाने के लिए पर्याप्त हैं?
कौन है लेटिशिया और क्या हुआ उसके साथ?
फ्रांस में 32 साल की लेटिशिया आर. ने अदालत में बताया कि उसका एक्स-पार्टनर गियोम बूची उसके साथ सात साल तक लगातार हिंसा, यौन शोषण और अपमानजनक व्यवहार करता रहा।लेटिशिया ने कहा उसे जबरन दर्जनों पुरुषों के साथ सेक्स करने पर मजबूर किया गया।वह 487 पुरुषों तक गिनती रखती रही, फिर टूटकर छोड़ दिया।बूची ने उसे कई बार यूरिन पिलाया उसे पब्लिक टॉयलेट चटवाया उसके निजी वीडियो बनाकर धमकियाँ दीं और उसे मानसिक रूप से इतना तोड़ा कि वह खुद को मशीन की तरह महसूस करने लगी।यह सिर्फ शारीरिक हिंसा नहीं, मानसिक गुलामी थी।लेटिशिया ने कहा कि बूची उसे अलग-थलग करता गया, उसे परिवार और दोस्तों से दूर कर दिया, उसके हर कदम पर कंट्रोल करता रहा।उसके लिए यह सिर्फ रिश्ता नहीं, एक कैद बन चुका था।
अदालत का फ़ैसला 25 साल की सजा, पर सवाल बहुत बड़े
फ्रांसीसी अदालत ने गियोम बूची को रेप,टॉर्चर जबरन सेक्स वर्क करवाने मानसिक उत्पीड़न का दोषी मानते हुए 25 साल की कैद सुनाई।लेकिन फ्रांस में अधिकतम सजा की सीमा कई अपराधों में सीमित होती है। इसलिए इतने बड़े अपराध के बावजूद सजा का 25 साल होना कई लोगों को कम लगा।लेटिशिया का कहना है मैंने जो झेला है, उसके सामने यह सजा कुछ भी नहीं।
लोगों की बड़ी शिकायत इतनी हैवानियत और इतनी कम सजा?
सोशल मीडिया और यूरोपियन महिला अधिकार समूहों में यह चर्चा तेज़ है कि क्या वाकई 25 साल ऐसी प्रताड़ना के सामने पर्याप्त है?क्या फ्रांस का कानून मानसिक-शारीरिक टॉर्चर को पर्याप्त गंभीरता से लेता है?और क्या पीड़िताओं को हाई-प्रोफ़ाइल अपराधियों के खिलाफ न्याय पाना इतना मुश्किल क्यों पड़ता है।लेटिशिया के केस ने महिलाओं की सुरक्षा, घरेलू हिंसा और यौन अपराधों में कानूनी सुधार की बहस को तेज़ कर दिया है।
